हमारे वर्तमान नेतृत्व में न तो सामूहिकता है न ही अनामिकता

गौतम चौधरी  ‘‘निंदक नियरे राखिए ऑंगन कुटी छवाय, बिन पानी साबुन बिना निर्मल करे सुभाय।’’ आलोचना लोकतंत्र का श्रृंगार है। खासकर नेतृत्व को इसे केवल नाकारात्मक

अंदाज-ए-मोदी:वैक्सीनेशन के दौरान प्रधानमंत्री ने नर्सों से कहा- नेता मोटी चमड़े वाले होते हैं, क्या उनके लिए कोई खास सुई है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को जब कोरोना वैक्सीन लगवाने एम्स पहुंचे तो उन्होंने अपने अलग अंदाज के जरिए माहौल को हल्का करने की कोशिश की।

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