लोकतंत्र में कानून की विश्वसनीयता समानता से बनती है, चयनात्मकता से नहीं

गौतम चौधरी लोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि उसे सबसे अधिक क्षति उसके घोषित शत्रुओं से नहीं, बल्कि उसके घोषित रक्षकों से भी

डिजिटल संप्रभुता : जब राष्ट्र की आवाज़ निजी माध्यमों पर निर्भर हो जाए

गौतम चौधरी आधुनिक युद्ध अब केवल सीमाओं पर नहीं लड़े जा रहे हैं। वे सूचनाओं,…

AI के दौर में भी MBA की चमक बरकरार, नियोक्ताओं का भरोसा कायम

नयी दिल्ली/ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच यह आशंका लगातार…

नवाचार के आयाम और औजार के रूप में विकसित हो रहा है ड्रोन तकनीक

सचिन त्रिपाठी साल 2020 के बाद भारत में जिस तकनीक ने सबसे तेजी से अपनी…

AI का सुनहरा सब्जवाग, टेक कंपनियों की रणनीति और भारतीय युवाओं में बेचौनी

गौतम चौधरी कभी भारतीय आईटी उद्योग को देश के उभरते मध्यम वर्ग का सबसे बड़ा…

रहस्य-रोमांच/ क्या सच-मुच हमारी इस आधुनिक सभ्यता के बीच आ चुके हैं एलियंस?

उमेश कुमार साहू ​ष्या तो हम इस असीम ब्रह्मांड में बिल्कुल अकेले हैं, या फिर…

स्मृर्ति शेष : हिन्दी के पहले तिलिस्मी लेखक बाबू देवकीनन्दन खत्री

मोहन मंगलम बाबू देवकीनन्दन खत्री एक दूरदर्शी लेखक थे। अपनी अद्भुत कल्पना और सरल लेखन शैली से उन्होंने हिन्दी साहित्य को एक नई दिशा दी।

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