दम तोड़ता पुश्तैनी व देसी हुनर

राजेश खण्डेलवाल कभी घर-घर में मिट्टी के दीये, मटके और बर्तनों की मांग होती थी। कुम्हार के चाक पर घूमती मिट्टी से सिर्फ बर्तन ही

सितारों की दुनिया/ दीपिका की जगह लेती तृप्ति डिमरी, बॉलीवुड की नई पसंद

सुभाष शिरढोनकर फिल्म ‘एनिमल’ (2023) में जोया का किरदार निभाकर रातोंरात नेशनल क्रश बनीं अभिनेत्री तृप्ति डिमरी इन दिनों बॉलीवुड की सबसे चर्चित अभिनेत्रियों में

1984 का सिख नरसंहार व संघ-कांग्रेस के रिश्ते : विचारधारा, सत्ता और राजनीतिक अवसरवाद का एक अनकहा अध्याय

गौतम चौधरी 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में जो कुछ हुआ, वह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का

रैली की भीर से आगे : राहुल गांधी का नेतृत्व और लोकतंत्र की अग्निपरीक्षा

गौतम चौधरी भारतीय लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका केवल सत्ता का विरोध करना नहीं, बल्कि सत्ता को जवाबदेह बनाए रखना भी है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में

बेगम समरू : सिख कूटनीति, मुगल सत्ता और बदलते राजनीतिक समीकरणों की कहानी

गैतम चौधरी अठारहवीं सदी का भारतीय इतिहास केवल मुगल साम्राज्य के पतन और अंग्रेजी सत्ता के उदय की कहानी नहीं है। यह उस दौर का

गंगा जल समझौते में बिहार की हिस्सेदारी का सवाल

कुमार कृष्णन बिहार में बाढ़ का पानी उतर जाता है, बाढ़ की समस्या नहीं। खेतों में रेत और गाद रह जाती है, नदी किनारे कटते

विरासत 2026 : परंपरा के सुरों में आधुनिक भारत की सांस्कृतिक पहचान

गौतम चौधरी देहरादून/ विशेष आलेख/ 31 अक्टूबर 2026 देहरादून की सांस्कृतिक पहचान केवल उसकी प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ों और शैक्षणिक संस्थानों तक सीमित नहीं है। इस

स्पेन में चोरी हुए बच्चों के मामले में कैथोलिक चर्च पर भी गंभीर आरोप

गौतम चौधरी इतिहास में कुछ अपराध ऐसे होते हैं, जिनकी भयावहता केवल पीड़ितों की संख्या से नहीं मापी जा सकती। वे समाज की नैतिक चेतना,

जनहित ही जनादेश, जनतंत्र का मतलब ही जनकल्याण और एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना

डॉ. शैलेश शुक्ला भारतीय जनतंत्र को जनता के कल्याण पर केंद्रित करने का सबसे विश्वसनीय आधार स्वयं भारतीय संविधान में मौजूद है। संविधान के अनुच्छेद

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