इस्लामी नारीवाद व मानववाद : धार्मिक परंपरा में समानता, न्याय और मानवीय गरिमा की पड़ताल

गौतम चौधरी समकालीन धार्मिक और शैक्षणिक विमर्श में ‘इस्लामी नारीवाद’ और ‘इस्लामी मानववाद’ जैसी अवधारणाएं बहस के विषय बने हुए हैं। इनके आलोचकों में पारंपरिक

सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता का पैमाना अब नामांकन नहीं, सीखने के परिणाम हों

राम शर्मा भारत में स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में पिछले दो दशकों में बड़ा बदलाव आया है। कभी चुनौती बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने की

नकल रोकने वाला शिक्षक अपराधी कैसे बन गया?

IIT बॉम्बे की घटना ने शिक्षा व्यवस्था, कानून, सामाजिक न्याय और संस्थागत जवाबदेही पर खड़े किए कई असहज सवाल अशोक कुमार झा IIT बॉम्बे जैसे

इस्लाम में बच्चों की परवरिश का बेहतर तरीका है 7-7-7 पैरेंटिंग फ्रेमवर्क

गौतम चौधरी बच्चों की परवरिश केवल परिवार की निजी जिम्मेदारी नहीं है। किसी भी समाज का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि वह

जंतर-मंतर का CJP प्रदर्शन : जब पुलिस की डिजिटल नजर पर ही उठ गए सवाल

गौतम चौधरी जंतर-मंतर पर जुलाई में हुआ Cockroach Janta Party (CJP) से जुड़ा छात्र प्रदर्शन अब केवल एक राजनीतिक आंदोलन या पुलिस कार्रवाई का मामला

संस्कृति पर आक्रमण का साधन बन रहे हैं आधुनिक विज्ञापन

अनिल धर्मदेश एक आभूषण कंपनी के लिए कृति सेनन का रक्षाबंधन विज्ञापन विवादों में है। अभिनेत्री जिस प्रकार अर्धनग्न कपड़ों में राखी बाँध रही है,

भारतीय भाषाओं में रामायण, एक आलोचनात्मक मिमांसा

डॉ. नीरज भारद्वाज हमारे शास्त्रों, ग्रंथों में विद्वानों, आचार्यों आदि ने साहित्य की महिमा का वर्णन लिखते हुए कहा है कि वही साहित्य श्रेष्ठ है

इस्लामी आउटरीच, डिजिटल मीडिया और मुस्लिम युवाओं के सामने कट्टरपंथ की चुनौती

गौतम चौधरी धर्म मनुष्य को जोड़ता है। यह आपस के समन्वय का सबसे शक्तिशाली मानवीय व्यवस्थाओं में से एक रहा है लेकिन जब धर्म तक

तिरहुत की लोकस्मृतियों से प्रेरित कथा/ ‘‘बूढ़ा पीपल और डूबा हुआ गाँव’’

गौतम चौधरी ‘‘बचपन में नेनुआ-फरकिया, खगड़िया आदि की कहानियां सुनने को मिलती थी। वो कहानियां बेहद रोचक और रोमांचकारी होती थी। कहानियां का कोई लिखित

राजमहल की पहाड़ियों से उठती सभ्यता की गुंज

कुमार कृष्णन राजमहल की पहाड़ियों में बहती हवा केवल पेड़ों की सरसराहट नहीं, बल्कि एक प्राचीन सभ्यता की स्मृतियों को भी अपने साथ लेकर चलती

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