गौतम चौधरी ईसाई धर्म को अक्सर एक एकरूप धार्मिक परंपरा के रूप में देखा जाता है, जबकि वास्तविकता इससे कहीं अधिक जटिल और भिन्न है।
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उत्तर आधुनिकवाद : संयुक्त राजय अमेरिका और इतिहास के बीच मुठभेड़ की वास्तविकता
गौतम चौधरी समकालीन बौद्धिक विमर्श में “उत्तर आधुनिकता” को लेकर बहसें जितनी तीखी हैं, उतनी ही उलझी हुई भी। कुछ आलोचक इसे पश्चिमी-विशेषकर अमेरिकी, सांस्कृतिक
कृत्रिम बुद्धिमत्ता : सचमुच एक साम्राज्यवादी प्रचार का साधन है या फिर नाहक दुष्प्रचार
गौतम चौधरी डिजिटल युग में सूचना का प्रवाह अत्यंत तीव्र और व्यापक हो गया है। विशेष रूप से सोशल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित
झारखंड की राजधानी रांची में पड़ी थी पहली स्वदेशी संगीत उद्योग की नीब
गौतम चौधरी रांची के बहूबाजार की एक पुरानी इमारत पर लिखा “संगीत रिकार्डिंग कंपनी” केवल एक जर्जर बोर्ड नहीं, बल्कि भारतीय संगीत इतिहास के उन
जीवन के रंग/ बदलते वक्त में यौन शुचिता का महत्व
उषा जैन शीरीं सेक्स को लेकर आज की युवा पीढ़ी में जो खुलापन आया है वह जग जाहिर है। लद गए वो जमाने शर्म और
कहीं मध्य एशिया की सर्प जाति का सांस्कृतिक विस्तार तो नहीं भारत की नाग सभ्यता?
गौतम चौधरी इतिहास और मिथक के बीच की रेखा अक्सर धुंधली होती है, लेकिन इसी धुंधले अवशेषों में सभ्यताओं की आत्मा छिपी रहती है। फ़ारसी
अत्यंत गंभीर है कृत्रिम मेधा के विकास में भारतीय भाषाओं के डाटा की कमी का मामला
डॉ. शैलेश शुक्ला इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में कृत्रिम मेधा या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विश्व की सबसे प्रभावशाली तकनीकों में से एक बन चुकी है।
Kautilya’s Arthashastra : The Strength of the State Lies in Service to the People
By Gautam Chaudhary In the Indian philosophical tradition, the four Purusharthas—Dharma, Artha, Kama, and Moksha—hold special significance. Among them, Artha (wealth and material resources) occupies
कौटिल्य का अर्थशास्त्र : जनता की सेवा में निहित है राज्य की शक्ति
गौतम चौधरी भारतीय चिंतन परंपरा में पुरुषार्थ चतुष्टय-धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का विशेष महत्व है। इनमें “अर्थ” को अत्यंत केंद्रीय स्थान प्राप्त है, क्योंकि
उल्लू : मिथक, मान्यताएँ और वास्तविकता
ललित नारायण उपाध्याय मानव समाज में कुछ प्रतीक ऐसे होते हैं, जो समय के साथ अपनी वास्तविक पहचान से अधिक धारणाओं और मान्यताओं के बोझ
