क्या हम कृत्रिम मेधा के प्रयोग से उत्पन्न संकटों के लिए तैयार हैं?

डॉ. शैलेश शुक्ला मानव सभ्यता के इतिहास में तकनीकी क्रांतियों ने सदैव हमारे अस्तित्व की दिशा को बदला है किंतु वर्तमान में कृत्रिम मेधा यानी

ओरायन : तारामंडल से षड्यंत्र सिद्धांत तक, सच, मिथक और सोशल मीडिया का दुष्प्रचार

गौतम चौधरी आधुनिक समय में सोशल मीडिया ने ज्ञान के प्रसार को जितना आसान बनाया है, उतना ही भ्रम फैलाने का रास्ता भी खोल दिया

व्यापार से साम्राज्य तक : ईस्ट इंडिया कंपनी के उत्थान और भारत के विघटन की कहानी

गौतम चौधरी सत्रहवीं शताब्दी में जब ईस्ट इंडिया कंपनी भारत के तटों पर पहुँची, तब वह किसी विजेता की मुद्रा में नहीं, बल्कि एक विनम्र

भारतीय संविधान की मूल भावना और वर्तमान ज़रूरतों के हिसाब से रोजगार की गारंटी दे सरकार

सरदूल सिंह भारत के संविधान की विशेषताएं जब पढ़ी और पढ़ाई जाती हैं तो उसमें दुनिया का सबसे विस्तृत, लिखित, लचीला और कठोर जिसमें मूल

जेरूसलम : इतिहास, मिथक, आस्था और राजनीति के बीच उलझा सच

रजनी राणा चौधरी जेरूसलम केवल एक शहर नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और राजनीतिक आकांक्षाओं का ऐसा संगम है, जिसने सदियों से मानव सभ्यता को प्रभावित

मदरसा और विश्वविद्यालयों का एकीकरण परंपरा व प्रयोग का बेहतर संतुलन

गौतम चौधरी उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा को लेकर हाल के घटनाक्रम, भारतीय मुस्लिम समुदाय की शैक्षिक और सामाजिक दिशा में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का

अमेरिकी साम्राज्यवाद के केन्द्र में है ईसाई इवेंजेलिकल आंदोलन

गौतम चौधरी ईसाई धर्म को अक्सर एक एकरूप धार्मिक परंपरा के रूप में देखा जाता है, जबकि वास्तविकता इससे कहीं अधिक जटिल और भिन्न है।

उत्तर आधुनिकवाद : संयुक्त राजय अमेरिका और इतिहास के बीच मुठभेड़ की वास्तविकता

गौतम चौधरी समकालीन बौद्धिक विमर्श में “उत्तर आधुनिकता” को लेकर बहसें जितनी तीखी हैं, उतनी ही उलझी हुई भी। कुछ आलोचक इसे पश्चिमी-विशेषकर अमेरिकी, सांस्कृतिक

कृत्रिम बुद्धिमत्ता : सचमुच एक साम्राज्यवादी प्रचार का साधन है या फिर नाहक दुष्प्रचार

गौतम चौधरी डिजिटल युग में सूचना का प्रवाह अत्यंत तीव्र और व्यापक हो गया है। विशेष रूप से सोशल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित

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