उषा जैन ’शीरीं‘
मौत से पहले मर जाने की गलती न जाने कितने लोग नादानीवश करते हैं। काश कोई उन्हें समझा पाता कि यूं सब कुछ होते हुए भी अपने को मार लेना न बुद्धिमानी है न धार्मिकता। यह उम्र ठहराव की जरूर कही जाती है लेकिन यहां ठहराव का मतलब स्थिरता है, सोच का परिपक्व होना है, गति का रूकना नहीं। आध्यात्मिकता की ओर जरूर झुकें क्योंकि यही आपको सही राह दिखाएगी। जीने का मर्म, सुख का फार्मूला, आर्ट आफ लिविंग आप आध्यात्मिक होकर ही सीख सकते हैं।
निम्नलिखित कुछ बातें आपकी लंबी उम्र के लिये महत्वपूर्ण हैं।
सही आहार पर ही शरीर का स्वस्थ रहना निर्भर करता है। भोजन की गलत आदतें बढ़ती उम्र में ज्यादा नुकसानदायक हैं। खुराक में लिये गए पौष्टिक तत्व आपकी कोशिकाओं को ठीक से चलाते हैं और आपके ऊतकों और अंगों को स्वस्थ रखते हैं।
आज की आपाधापी वाली तेज रफ्तार जिन्दगी में कोई व्यक्ति ऐसा नहीं जिसे तनाव से न गुजरना पड़ता हो। तनाव और नींद का छत्तीस का बैर है। तनाव के चलते नींद कहां। फिर बुढ़ापा तो वैसे भी नींद न आने की बीमारी के लिये जाना जाता है। शरीर को आराम और मन को शांति तथा अगले दिन के लिए चुस्ती देने के लिए बढ़िया गहरी नींद जरूरी है।
बुढ़ापे में बदन का लचीलापन कम होने लगता है। कई लोगों का शरीर स्थूल हो जाता है। आर्थराइटिस की शिकायत होने पर जोड़ों का दर्द परेशान करने लगता है। ब्लड प्रेशर व डायबिटीज जैसी बीमारियां इस उम्र में आम हैं। ऐसे में हल्का फुल्का व्यायाम शरीर को क्रियाशील रखने के लिए जरूरी है। चलने से बढ़कर कोई व्यायाम नहीं। न इसे सीखने की जरूरत है, न इसके लिए डॉक्टर से सलाह लेने की। जितना संभव हो चलें। अपना काम स्वयं करने की आदत बनाये रखें। इससे न तो दूसरों पर निर्भर रहना पड़ेगा, न शरीर की मशीनरी जाम होगी।
उम्रदराज होने पर जीवन के बहुत से खट्टे मीठे अनुभवों से आप समृद्ध हो जाते हैं। आपको अच्छे बुरे की बेहतर परख हो जाती है और अपना भला बुरा भी खूब समझने लगते हैं। आप जान जाते हैं कि गुस्सा सेहत के लिये भी बुरा है और रिश्तों के लिये भी। नकारात्मकता से जीवन बोझिल बनता है। स्वयं खुश रहेंगे और औरों को भी खुशियां बांटेंगे तो जीवन बोझ नहीं बनेगा। अति हर चीज की बुरी होती है इसलिये संतुलन बनाए रखना जीने का बढ़िया फार्मूला होगा।
एकाकी व्यक्ति की उम्र कम होती है जबकि परिवारों में रहने वाले दीर्घजीवी होते हैं, यह एक तथ्य है। व्यक्ति के लिये इंटरएक्ट करना उसके मानसिक स्वास्थ्य के हित में होता है। संवेगों को आउटलेट चाहिए। दूसरों से बात करके मन का बोझ हल्का होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। तनाव को मैनेज करने का एक जरिया मिलता है। मजबूत संबंधों से व्यक्ति सुरक्षित फील करता है।
इस उम्र में सोशल सर्विस एक अच्छी हाबी प्रूव होगी। हर उम्र के लोगों से दोस्ती जीवन को रसयुक्त बनाती है। संभव हो तो कुछ वक्त बच्चों के साथ गुजारें। उनकी भोली मीठी बातें आप में नवजीवन का संचार कर देंगी।
हमउम्र लोगों के साथ हल्के फुल्के टापिक डिस्कशन आपके दिमाग को एलर्ट रखेंगे और ताजगी देंगे। इसके अलावा वर्ग पहेली हल करना, सुडोकू जैसी दिमागी कसरत ब्रेन सैल्स को एक्टिवेट रखेगी।
डाक्टर के पास जाना न टालेंरू- अगर कई लोगों को छोटी से छोटी तकलीफ के लिये डाक्टरों के पास दौड़ने की आदत होती है तो कई लोगों को डाक्टर के पास जाने से फोबिया होता है। वे सफर करते रहते हैं लेकिन डाक्टर के पास बीमारी ज्यादा बढ़ने पर ही बहुत मजबूरी में जाते हैं। यहां कामनसेंस बरतना जरूरी है कि कब आपको उनके पास जाना चाहिए, कब नहीं।
जख्म से खून बहना बंद न हो रहा हो, तेज बुखार हो, ऐसे में फौरन डाक्टर को दिखाना चाहिए। इसके अलावा गंभीर रोग जैसे दिल की बीमारी, हाई बीपी, डायबिटीज, किडनी, लिवर में इंफेक्शन, किसी किस्म का तेज दर्द या और कोई रोग जिसमें सर्जरी की आवश्यकता हो, के लिए डाक्टर के पास जाना न टालें। किसी तरह की गांठ भी जानलेवा बन सकती है। इसलिए चेकआप से परहेज न करें। शुरूआती दौर में बीमारी जल्दी ठीक हो जाती है।
वक्त का बहाव थमता नहीं। वक्त के साथ-साथ पुराना बहुत कुछ बदल जाता है। कोई चाहे न चाहे लेकिन यही जीवन-धर्म है। जो वक्त के साथ तालमेल बैठा लेते है उनका जीवन सरल बन जाता है लेकिन रिजिड बने रहने वालों को नई पीढ़ी से विद्रोह का सामना करना पड़ता है जिसके चलते वे उन्हें बार-बार अपमानित करते हैं। आउटडेटेड, पुरातनपंथी, दकियानूसी जैसे शब्दों से नवाज कर उन्हें डिग्रेड करते हैं।
अपनी उम्र से प्यार आप तभी कर पाते हैं जब उसमें ताज़गी भरते हुए आसपास की दुनिया से थोड़ा समन्वय कर लेते हैं। पुराने से चिपके रहने की सूरत में जीवन में ऊब से छुटकारा नहीं मिलेगा। फिर यह मुश्किल भी होगा। आज ग्लोबलाइजेशन का जमाना है। दुनिया कहां से कहां पहुंच गई है। बच्चों से लेकर बड़ों तक की सोच में भारी बदलाव आया है। अलग थलग रहने की सूरत में आप अकेले पड़ जाएंगे।
बड़ी उम्र के जिन्दादिल लोग जिन्हें बनने ठनने का शौक है, जिनके जीवन से रोमांस काफूर नहीं हुआ है, सुंदर खूबसूरत चीजें उन्हें ‘ए थिंग आफ ब्यूटी इज जाय फार एवर’ लगती है। जो अपने को रचनात्मक कार्यों से जोड़े रहते हैं और कुछ हाबीज रखते हुए निरंतर अपने भीतर की ग्रोथ के लिये प्रत्यनशील रहते हैं, हमेशा कुछ नया करने, सीखने को लालायित-ऐसे लोग वास्तव में अपने हमउम्र ही नहीं बल्कि कई बुझे मन वाले जवानों के लिये भी प्रेरणास्रोत हैं।
