भारत और नीदरलैंड में व्यापार को व्यापक बनाने व बढ़ावा देने के लिए अहम अनुबंध

भारत और नीदरलैंड में व्यापार को व्यापक बनाने व बढ़ावा देने के लिए अहम अनुबंध

भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 16 मई की सुबह नीदरलैंड्स आ पहुँचे थे। उनका ’’भारत’’ हवाई जहाज ए4 हाई वे से साफ और बहुत ही प्रमुखता की स्थिति में खड़ा हुआ दिखाई दिया। मोदी जी पिछली बार नीदरलैंड्स 2017 में आये थे। पिछले वर्ष मई में भी मोदी जी का नीदरलैंड आने का प्रोग्राम था लेकिन ’’ऑपरेशन सिंदूर’’ के कारण वे नीदरलैंड्स नहीं आ पाए थे।

आज एम्सटर्डम हवाई जहाज से उतरने पर, नीदरलैंड्स के विदेश मंत्री श्री टोम बेरेन्दसन द्वारा मोदीजी का स्वागत किया गया। इसके तुरंत बाद मोदी जी भारतीय डायसपोरा से मिले। जहाँ उनका भारतीय शास्त्रीय नृत्य व संगीत के साथ, उपस्थित डायसपोरा द्वारा करतल ध्वनियों व गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया।

इसी दिन मोदी जी नीदरलैंड के राजा और रानी के साथ दोपहर के भोजन आमंत्रित थे। नीदरलैंड के विदेश मंत्री टोम बेरेन्दसन व नीदरलैंड्स की शिखर कम्पनियों के सीईओ भी उनके साथ भोज में उपस्थित रहे। शाम को मोदी जी नीदरलैंड्स के युवा प्रधानमंत्री श्री रोब येत्तेन के साथ काट्सहाऊस में बैठक हुई। प्रधानमंत्री रोब येत्तेन भी अपनी कूरासावो यात्रा से लौटकर आये हैं। इस काट्सहाऊस की बैठक में भारत और नीदरलैंड व्यापार को व्यापक बनाने व बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों के बीच अनुबंध हुए। इनमें से सबसे प्रमुख एएसएमएल और टाटा के बीच हुआ।

नीदरलैंड्स की एएसएमएल सेमीकंडक्टर बनाने वाली विश्व की शिखर यानि टॉप कम्पनी है। चीन की नजर इस कम्पनी को कब्जाने की बहुत समय से थी। अमेरिका भी नीदरलैंड पर दबाव डालता रहा कि एएसएमएल चीन का हाथों में नहीं पड़नी चाहिए। इस दृष्टि से मोदीजी की नीदरलैंड यात्रा और एएसएमएल और टाटा के बीच हुआ अनुबंध विश्व के प्रमुख अनुबंधों में शिखर का अनुबंध है। इस अनुबंध के साथ, विश्वसनीयता के स्तर पर ही नहीं तकनीकी के क्षेत्र में भारत एक नये युग की शुरूआत करने जा रहा है।

मोदी जी का यह दो दिवसीय दौरा कई अर्थों में महत्वपूर्ण है। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर का मत रहा है कि यूरोप एक धड़े के धड़े के रूप में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाए। जयशंकर की बात वर्तमान काल में एक बहुत ही महत्वपूर्ण संकेत है। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद का इतिहास उठाकर देखें तो यूरोपीय राजनीति अमेरिका की पिछलग्गू रही है। यूरोप का अपना वर्चस्व वैश्विक स्तर पर कभी दिखाई नहीं दिया है।

डच थिंक टैंक का कहना है कि इस अनुबंध के साथ भारत ने नीदरलैंड ही नहीं यूरोप का विश्वास भी जीत और सुदृढ़ आधार बना लिया है। इस समय नीदरलैंड की कम्पनियों का भारत में वैश्विक स्तर पर निवेश चौथे स्थान पर है। नीदरलैंड की कम्पनियाँ भारत के आगामी दशकों के भारत के विकास के आकलन को ध्यान में रखते हुए अधिकाधिक निवेश करने के अवसर तलाश रही हैं। इस दिशा में, भारत नीदरलैंड्स चौम्बर ऑफ कमर्स एण्ड ट्रेड की पिछले कई बरसों से लगातार बैठकें हो रही हैं। लगभग सभी बैठकों में भारतीय व नीदरलैंड्स के विषय विशेषज्ञ चर्चा करते हैं। निवेशकों के प्रश्नों का उत्तर दिया जाता है।

जिन कम्पनियों ने निवेश किया हुआ है उनके लाभ व उनके प्रबंधक अपना अनुभव साझा करते हैं। विगत वर्षों में कुछ बैठकों में मैंने स्वयं भी भाग लिया है। इन बैठकों में वाटर मैनेजमेंट, सोलर एनर्जी, इन्नोवेशन, न्यू टेक्नोलॉजी, वेस्ट मैनेजमेंट आदि विभिन्न विषयों के साथ भारत में न्याय प्रक्रिया पर चर्चा, निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने, उत्पादन को गति देने और कर व्यवस्था पर भी बात की जाती रही है। और ये प्रयास जारी हैं। समय समय पर भारत के राजदूत श्री तुहिन कुमार भारत सरकार की ओर से निवेशकों को दी जाने वाली सहुलियत व सहयोग पर अपना वक्तव्य देते रहे हैं।

नीदरलैंड की कंपनियों के लिए अगले आंकड़े बहुत ही रुचिकर हैं। इस समय भारत की जनसंख्या 140 करोड़ है। यूरोप की कुल जनसंख्या इस समय 40 करोड़ है। भारत की जनसंख्या, इस समय यूरोप की कुल जनसंख्या, उत्तरी अमेरिका और दक्षिणी अमेरिका की कुल जनसंख्या से अधिक है। इसमें यदि रूस की कुछ जनसंख्या मिलाई जाए तब जनसंख्या का आँकड़ा बराबर होता है। इस समय भारत की जनसंख्या का कुल 30 प्रतिशत मध्यम वर्ग है।

भारतीय मध्यम वर्ग भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। 2047 तक यह मध्यम वर्ग, भारतीय जनसंख्या का 60 प्रतिशत तक हो जाएगा। इस समय भारत में धनवान लोगों की संख्या कुल जनसंख्या का 3 प्रतिशत है जो 2047 तक 15 प्रतिशत हो जाने का अनुमान है। इस दृष्टि से केवल भारतीय धनवंतरियों का यह 15 प्रतिशत यूरोप की तीन चौथाई जनसंख्या का हिस्सा है। इसका अर्थ है कि अगले 20 वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था के शिखर छूने के बहुत अच्छे अवसर हैं।

आपको याद होगा कि 27 जनवरी को भारत की यूरोपीय यूनियन के साथ फ्री ट्रेड डील हुई थी। भारत और यूरोपियन यूनियन की यह ट्रेड डील जनसंख्या के आयाम की दृष्टि से अब तक की विश्व की सबसे बड़ी ट्रेड डील है। उसी क्रम में मोदी जी की विदेश यात्रा के क्रम में नीदरलैंड्स एक पड़ाव है। वे केवल नीदरलैंड नहीं आये हैं बल्कि स्कैण्डिनेवियन देशों व इटली भी जायेंगे। इन यात्राओं का मकसद अमेरिका पर आर्थिक निर्भरता कम करने की दिशा में ठोस प्रयास हैं।

भारत का प्रयास, भारत में निवेश के साथ साथ, महत्वपूर्ण तकनीकी के साथ साझेदारी और देश में उत्पादन से रोजगार के साधन सृजित करना है। भारत का यह कदम समर्थ भारत की दिशा में ठोस प्रयास है।

अमेरिका और चीन के साथ अपने सम्बन्धों को साधते हुए, रूस के साथ अपनी पुरानी मैत्री के साथ, भारत अपनी स्वतंत्र व्यापार व विदेश नीति में यूरोपीय यूनियन व ग्लोबल साउथ को साथ लेकर वैश्विक संतुलन के साथ, अपनी नीतियों की राह, विकसित होने की ओर आगे बढ़ रहा है।

आलेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं। इससे हमारे प्रबंधन का कोई सरोकार नहीं है।

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