NEET विवाद : 22.7 लाख विद्यार्थियों का भविष्य और प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था पर गहराता भरोसे का संकट

गौतम चौधरी भारत में डॉक्टर बनना केवल एक पेशा नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों के सपनों, संघर्षों और सामाजिक आकांक्षाओं का प्रतीक माना जाता है। एक

टैगोर को महज एक महान कवि के रूप में देखना उनके व्यक्तित्व का सतही मूल्यांकण होगा

बिरेन्द्र बांगरू रविन्द्रनाथ टैगोर की जयंती पर उन्हें केवल एक साहित्यिक महानायक या नोबेल पुरस्कार विजेता के रूप में स्मरण करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि

नामांकन के बहाने सरकारी स्कूलों को बंद करने की कवायद : एक नीतिगत मामला 

सरदूल सिंह  नया  सत्र शुरू होते ही सरकारी स्कूलों में घटते नामांकन और उनके बंद होने या अन्य स्कूलों में विलय  करने की खबरें आम

चक्रव्यूह बनते कोचिंग सेंटर एवं भारतीय शिक्षण संस्थान

डॉ. वेदप्रकाश शिक्षण संस्थानों और कोचिंग सेंटरों में भिन्न-भिन्न कारणों से विद्यार्थियों में आत्महत्या की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसा लगता है जैसे ऐसे कुछ

गालवलकर के एकात्म सांस्कृतिक राष्ट्र की अवधारणा बनाम समावेशी राष्ट्र व भारतीय संविधान का संघीय ढ़ंचा

गौतम चौधरी भारत केवल एक राजनीतिक इकाई नहीं, बल्कि भाषा, संस्कृति, जातीय स्मृतियों और क्षेत्रीय अस्मिताओं का विराट संगम है। यही कारण है कि भारतीय

डॉ. कार्ल मार्क्स : ‘‘दुनिया में ऐसी कोई समस्या नहीं होती जिसका भौतिक समाधान मौजूद न हो’’

सरदूल सिंह 5 मई 1818 को जर्मनी के त्रियेर शहर में जन्मे डॉ. कार्ल मार्क्स एक ऐसे महान दार्शनिक सिद्ध हुए जिनके विचारों ने न

न वैराग्य और न भयंकर उपभोग, मध्यमार्ग का सर्वोत्तम ग्रंथ है ‘पवित्र कुरान’

गौतम चौधरी इस्लामिक मान्यता के आधार पर पवित्र कुरान अल्लाह द्वारा अवतरित मार्गदर्शन की अंतिम पुस्तक है। यह ग्रंथ न केवल आध्यात्मिक दिशा प्रदान करता

प्रेस की स्वतंत्रता पर आई खतरनाक रिपोर्ट, भारत में भी नकारात्मक असर की चर्चा

गौतम चौधरी दुनिया के बदलते लोकतांत्रिक परिदृश्य में एक और चिंताजनक संकेत सामने आया है। Reporters Without Borders (RSF) की 2026 की रिपोर्ट बताती है

भारतीय ज्ञान परंपरा के वाहक और ‘‘भामती’’ ग्रंथ के रचयिता, महान दार्शनिक वाचस्पति मिश्र

गौतम चौधरी भारतीय दर्शन की परंपरा में कुछ नाम ऐसे हैं, जिनके जीवन और कृतित्व में ज्ञान, तप और मानवीय संवेदना का अद्भुत संगम दिखाई

मई दिवस : आज एक बार फिर से श्रम अधिकारों की विरासत को बचाने जरूरत है

गौतम चौधरी इतिहास में कुछ तिथियाँ ऐसी होती हैं, जो केवल स्मरण के लिए नहीं, बल्कि आत्मपरीक्षण के लिए लौटती हैं। 1 मई, मई दिवस,

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