परीक्षा गई, अब फीस लौटेगी/ नीट-यूजी रद्द होने के बाद एनटीए ने खोला रिफंड पोर्टल, छात्र बोले — “पहले भरोसा लौटाइए”

परीक्षा गई, अब फीस लौटेगी/ नीट-यूजी रद्द होने के बाद एनटीए ने खोला रिफंड पोर्टल, छात्र बोले — “पहले भरोसा लौटाइए”

नई दिल्ली/ राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) 2026 रद्द होने के बाद अब लाखों अभ्यर्थियों की निगाहें परीक्षा से हटकर बैंक खाते पर टिक गई हैं। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी National Testing Agency (एनटीए) ने शुक्रवार को घोषणा की कि अभ्यर्थी परीक्षा शुल्क वापसी के लिए अपने बैंक खाते का विवरण एक विशेष पोर्टल पर जमा कर सकते हैं।

एजेंसी की सार्वजनिक सूचना के अनुसार, बैंक खाता विवरण जमा करने की सुविधा 22 मई से 27 मई 2026 रात 11:50 बजे तक उपलब्ध रहेगी। इसके बाद अभ्यर्थियों के खाते में परीक्षा शुल्क लौटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

एनटीए की ओर से जारी संक्षिप्त सूचना प्रशासनिक भाषा में भले सामान्य दिखी हो, लेकिन देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों के लिए यह केवल “रिफंड प्रक्रिया” नहीं, बल्कि पिछले कई सप्ताह से चले आ रहे तनाव का नया अध्याय है।

दिल्ली, पटना, प्रयागराज, कोटा और सीकर जैसे तैयारी केंद्रों में शुक्रवार को कोचिंग संस्थानों के बाहर छात्रों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की रही कि पैसा कब तक वापस आएगा और अगली परीक्षा आखिर कब होगी।

पटना में तैयारी कर रहे एक छात्र ने कहा, “फीस वापस मिल जाएगी, लेकिन जो महीनों का तनाव गया उसका क्या?”

वहीं प्रयागराज की एक छात्रा ने मोबाइल पर पोर्टल खोलते हुए कहा,
“अब पढ़ाई कम, नोटिफिकेशन ज़्यादा देखना पड़ रहा है।”

दरअसल, नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद से छात्र लगातार अनिश्चितता की स्थिति में हैं। पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठे विवादों ने लाखों अभ्यर्थियों के बीच अविश्वास का माहौल पैदा कर दिया है। कई छात्रों का कहना है कि परीक्षा की तैयारी अब केवल पढ़ाई नहीं, बल्कि मानसिक सहनशक्ति की परीक्षा बन गई है।

एनटीए ने अभ्यर्थियों से कहा है कि वे बैंक खाता विवरण सावधानीपूर्वक भरें, ताकि शुल्क वापसी में किसी प्रकार की तकनीकी दिक्कत न आए। एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल सही और सत्यापित विवरण वाले खातों में ही राशि भेजी जाएगी।

हालाँकि सोशल मीडिया पर छात्र इस पूरी प्रक्रिया को लेकर व्यंग्य भी कर रहे हैं। कई लोगों ने लिखा कि देश में अब प्रतियोगी परीक्षाएँ “एग्जाम” कम और “इवेंट मैनेजमेंट” ज़्यादा लगने लगी हैं।

उधर अभिभावकों की चिंता अलग है। कोचिंग फीस, किराया, हॉस्टल और यात्रा पर पहले ही लाखों रुपये खर्च कर चुके परिवार अब यह जानना चाहते हैं कि अगली परीक्षा कब होगी और क्या इस बार व्यवस्था भरोसेमंद होगी।

राजनीतिक स्तर पर भी नीट विवाद लगातार गर्म बना हुआ है। विपक्ष परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार और परीक्षा एजेंसियाँ सुधार और सुरक्षा उपायों की बात कर रही हैं।

लेकिन प्रतियोगी परीक्षाओं की दुनिया में फिलहाल सबसे बड़ी सच्चाई यही है कि छात्र अब प्रश्नपत्र से पहले नोटिफिकेशन पढ़ रहे हैं और रिजल्ट से पहले पोर्टल का सर्वर चेक कर रहे हैं।

फिलहाल एनटीए का पोर्टल खुल चुका है, छात्र बैंक विवरण भर रहे हैं और देशभर के लाखों घरों में एक ही सवाल घूम रहा है—
“पैसा तो वापस आ जाएगा… लेकिन एक साल का भरोसा कौन लौटाएगा?”

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