गौतम चौधरी ऐसे समय में, जब समाज संदेह, अफवाहों, वैचारिक ध्रुवीकरण और परस्पर शत्रुता के कारण लगातार विभाजित होते जा रहे हैं, शांति और सामाजिक
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BRICS : वर्तमान वैश्विक परिदृष्य में कहां खड़ा है भारत?
गौतम चौधरी विश्व राजनीति के बदलते परिदृश्य में ब्रिक्स आज केवल एक आर्थिक मंच नहीं रह गया है। यह उस वैश्विक असंतोष की अभिव्यक्ति बन
जारी है गरिमा और बुनियादी अधिकारों की लड़ाई
कुमार कृष्णन बिहार के वैशाली में एक सेप्टिक टैंक के भीतर एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गयी। छत्तीसगढ़ के रायपुर में
डराने-धमकाने की प्रशासनिक कार्यशैली लोकतांत्रिक शैली के लिए बेहद खतरनाक
धीतेन्द्र कुमार शर्मा राष्ट्रीय कार्यक्रमों में तैनात कार्मिकों को धमकाना शायद हमारे प्रशासनिक तंत्र की फितरत ही बन गई है। कुछ माह पहले राजस्थान समेत
वामपंथ/ कॉकरोच जनता पार्टी : जनअसंतोष, व्यंग्य और विकल्पहीनता की राजनीति
गायत्री भारद्वाज सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत द्वारा बेरोज़गार युवाओं के लिए कथित तौर पर “कॉकरोच” शब्द के प्रयोग के बाद देशभर में
समुद्र से सरहद तक : RSS के सरकार्यवाह होसबले की नसीहत और भारत की आसन्न कूटनीतिक रणनीति
गौतम चौधरी दक्षिण एशिया की राजनीति में कई बार वास्तविक परिवर्तन सरकारी घोषणाओं से नहीं, बल्कि भूगोल, व्यापार और बाज़ार की हलचलों से दिखाई देने
2014 के बाद के भारत का आलोचनात्मक विवेचन : तो सचमुच नरेन्द्र मोदी की सरकार क्रूर पूंजीवार के मजबूत बना रही है?
गौतम चौधरी 2014 में जब नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में लौटी, तब भारतीय राजनीति में केवल सरकार नहीं
24 मई 2026 की प्रमुख खबरें : मानसून पूर्व बारिश और आंधी, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा दिल्ली-एनसीआर में मौसम सुहावना
राष्ट्रीय समाचार प्रधानमंत्री Narendra Modi और अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio के बीच दिल्ली में महत्वपूर्ण वार्ता हुई। भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी, व्यापार और रक्षा सहयोग
भारत : अंतर धार्मिक संवाद का देश, जहां समय-समय पर पांथिक विमर्श भी जरूरी
गौतम चौधरी भारत जैसे देश में धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि लोगों की स्मृतियों, संस्कारों, त्योहारों, जीवन पद्धति और जीवन-दृष्टि का हिस्सा है। यहाँ एक
पश्चिम एशिया का संकट : सैन्य उपप्रमुख की चेतावनी, “हार्ड पावर” की वापसी और भारत की दुविधा
गौतम चौधरी दुनिया एक बार फिर ऐसे मोड़ पर आकर खड़ी हो गयी है जहाँ कूटनीति की भाषा के समानांतर सैन्य शक्ति की विकृत और
