गौतम चौधरी गाजा युद्ध ने एक बार फिर दुनिया के सामने एक कठिन प्रश्न खड़ा कर दिया है-क्या किसी देश के रणनीतिक हित और उसकी
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सिल्क्यारा से तीस्ता तक : क्या सबक सिखा रही हैं हिमालय की चेतावनियां?
जयसिंह रावत सिक्किम की तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में मीथेन गैस विस्फोट से हुई बड़ी जनहानि और उत्तराखंड की सिल्क्यारा-बड़कोट सुरंग में
‘आशीर्वाद’ को अब ‘भूतिया बंगला’ कहने पर बॉम्बे हाईकोर्ट की रोक
रामस्वरूप रावतसरे मुंबई हाईकोर्ट ने मशहूर अभिनेता दिवंगत राजेश खन्ना के घर ‘आशीर्वाद’ को भूतिया, शापित, मनहूस या अशुभ कहने पर रोक लगा दी है।
अल-वला वल-बरा : इस्लामी शिक्षा के आलोक में मुसलमानों की कुछ सामाजिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारियाँ भी हैं
गौतम चौधरी अमूमन धार्मिक अवधारणाओं का मूल्यांकन केवल शाब्दिक अर्थ से किया जाता है और उसके व्यापक नैतिक व सामाजिक संदर्भों को नजरअंदाज कर दिया
लोकतंत्र में कानून की विश्वसनीयता समानता से बनती है, चयनात्मकता से नहीं
गौतम चौधरी लोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि उसे सबसे अधिक क्षति उसके घोषित शत्रुओं से नहीं, बल्कि उसके घोषित रक्षकों से भी
क्या कॉकरोच आंदोलन का असर आने वाले चुनावों पर पड़ेगा?
राजेश श्रीवास्तव 12 साल पुरानी केंद्र की मोदी सरकार, मामला चाहे सीएए-एनआरसी प्रोटेस्ट का हो या संसद में बीच सत्र से 146 विपक्षी सांसदों का
बाज़ार: AI का उफान थमा, अब बारी वास्तविक मूल्यांकन की
अक्षपाद् गौतम किसी नई तकनीक का सबसे कठिन दौर वह होता है, जब दुनिया उससे परिणाम मांगने लगती है। कृत्रिम मेधा (AI) आज ठीक इसी
वियतनाम का चंपा : अंगदेश की सांस्कृतिक स्मृति का अवशेष?
गौतम चौधरी इतिहास में कुछ प्रश्न ऐसे होते हैं जिनका उत्तर किसी एक शिलालेख, किसी एक ग्रंथ या किसी एक पुरातात्त्विक खोज से नहीं मिलता।
गाड़ी खरीदने के बजाय किराये की गाड़ी के प्रयोग के बहुआयामी लाभ
डॉ. शैलेश शुक्ला बीसवीं सदी ने दुनिया को यह विश्वास दिलाया कि निजी कार आधुनिकता, समृद्धि और स्वतंत्रता का सबसे बड़ा प्रतीक है लेकिन इक्कीसवीं
स्मृर्ति शेष : हिन्दी के पहले तिलिस्मी लेखक बाबू देवकीनन्दन खत्री
मोहन मंगलम बाबू देवकीनन्दन खत्री एक दूरदर्शी लेखक थे। अपनी अद्भुत कल्पना और सरल लेखन शैली से उन्होंने हिन्दी साहित्य को एक नई दिशा दी।
