महुआ : एक वृक्ष नहीं, भारतीय सभ्यता की स्मृति

औपनिवेशिक नीतियों से लेकर स्वतंत्र भारत की उपेक्षा तक गौतम चौधरी यह केवल एक वृक्ष की व्यथा कथा नहीं है, यह भारत की उस संमृद्धि

पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन से ही वक़्फ़ की गरिमा और मर्यादा वापस आ पाएगी

गौतम चौधरी वक़्फ़ इस्लाम की सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक संस्थाओं में से एक है। सदियों से मस्जिदें, कब्रिस्तान, मदरसे, अनाथालय, दरगाहें और अनेक धर्मार्थ संस्थान उन

झारखंड में एक लाख करोड़ का निवेश : क्या इस बार एमओयू से आगे बढ़ेगी कहानी?

गौतम चौधरी झारखंड फिर एक बार सुर्खियों में है। लगभग एक लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव, राज्य का पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र, इस्पात उद्योग

‘‘हर ज़र्रा चमकता है अनवार-ए-इलाही से ….’’ : अकबर इलाहाबादी के एक शेर के बहाने इस्लाम और भारतीय दर्शन का तुलनात्मक अध्ययन

गौतम चौधरी “हर ज़र्रा चमकता है अनवार-ए-इलाही से,हर साँस ये कहती है, हम हैं तो ख़ुदा भी है।” उर्दू शायरी में ऐसे अनेक शेर मिलते

36 वर्ष बाद भी कश्मीरी हिंदुओं को न्याय का इंतज़ार

गजेन्द्र सिंह जब भी भारत में कश्मीर की चर्चा होती है, बहस प्रायः सीमा पार आतंकवाद, सुरक्षा, बहुसंख्यक कश्मीरी मुसलमानों के अधिकारों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति

ग्लैमर और अभिनय के बीच संतुलन साधती संदीपा धर

सुभाष शिरढोनकर अभिनेत्री संदीपा धर इन दिनों संजय लीला भंसाली प्रस्तुत तथा रवि उदयवार निर्देशित फिल्म ’’दो दीवाने शहर में (2026)’’ को लेकर चर्चा में

रामानुजाचार्य : विशिष्टाद्वैत के आचार्य और सामाजिक समरसता के अग्रदूत

#वृतांतों की #यात्रा : #संन्यास बड़ा या #गृहस्थ? अक्षपाद् गौतम भारतीय दार्शनिक परंपरा में आदि शंकराचार्य, रामानुजाचार्य और मध्वाचार्य को वेदांत के तीन प्रमुख स्तंभ

समाचार विश्लेषण/ शेख हसीना की स्वदेश वापसी और भारतीय कूटनीति पर असर

गौतम चौधरी लगभग दो वर्षों से निर्वासन का जीवन जी रहीं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने यह घोषणा कर राजनीतिक हलकों में नई

EPFO के नए नियम : आठ करोड़ कामगारों का भविष्य खतरे में

ज्ञान चंद पाटनी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) से जुड़े हालिया बदलावों से निजी क्षेत्र के आठ करोड़ कर्मचारियों को झटका लगा है। नई व्यवस्था

हेमंत सरकार का दूसरा कार्यकाल : उम्मीदों की राजनीति से परिणाम तक

अक्षपाद् गौतम झारखंड की राजनीति में हेमंत सोरेन का दूसरा कार्यकाल केवल सत्ता की वापसी नहीं है; यह जनादेश का दूसरा अवसर भी है। जनता

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