चुनाव में आखिर मुसलमानों का एजेंडे क्या होना चाहिए? 

गौतम चौधरी  चुनावी मौसम चल रहा है। एक जून को अंतिम चरण का चुनाव होना है। देश के कई हिस्सों में अधिकतर स्थानों पर चुनाव

पंजाब की राजनीति में क्षेत्रवाद के रोगाणु

राकेश सैन क्षेत्रवाद व उपराष्ट्रवाद की जिस मानसिकता से भारत सदियों तक विदेशी संत्रास झेलता आया है उसके रोगाणु आज भी देश की राजनीति में

अधिक से अधिक मताधिकार का प्रयोग कर लोकतंत्र को मजबूत बनाने की करें कोशिश

कलीमुल्ला खान भारत की वैविध्यपूर्ण सांस्कृतिक जटिलता इसकी विशेषताओं में से एक है। यह देश कभी पांथिक एकरूपता का शिकार नहीं हुआ। बहुपांथिक परंपरा इस

वामपंथ/ लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रही कंपनियां

पुष्पिंदर भोजन इंसान के ज़िंदा रहने के लिए लाज़िमी है। लेकिन मुनाफ़े पर आधारित यह पूँजीवादी व्यवस्था लोगों को ना केवल भूख से मार रही

मोदी सरकार की बड़ी सफलताओं में से एक है आंतरिक सुरक्षा का मजबूत प्रबंधन

प्रो. महेश चंद गुप्ता एक जमाने में देश के हर हिस्से में असुरक्षा और दहशत का माहौल था। देश में आतंकी हमले होना आम बात

षड्यंत्र-मुक्त अंतरधार्मिक विवाह का परिवेश

अनिल धर्मदेश अभी एक दशक पहले तक सार्वजनिक स्थलों पर सरकार द्वारा नियमित घोषणा करायी जाती थी कि किसी लावारिस बैग या वस्तु को न

जबरन धर्मांतरण या लव जिहाद इस्लाम के मूल चिंतन का अंग नहीं 

डॉ. अनुभा खान हाल के दिनों में, ‘लव जिहाद’ शब्द समाचार माध्यमों के एक खास वर्ग में बड़ी तेजी से सुर्खियां बटोरने लगा है। इसके

महामंत्री आदित्य द्वारा नेताओं पर की गयी कर्रवाई प्रदेश भाजपा की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा

गौतम चौधरी झारखंड प्रदेश भारतीय जनता पार्टी, संसदीय चुनाव में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए, केवल बहुसंख्यक ध्रुवीकरण के भरोसे ही नहीं है। भाजपा

खालिस्तानियों का चुनाव लडऩा स्वागत योग्य है लेकिन सतर्कता भी जरूरी

राकेश सैन लोकसभा चुनावों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत असम की डिब्रूगढ़ जेल में बन्द खालिस्तानी अलगाववादी अमृतपाल के खडूर साहिब से नामांकन

पूँजीवाद में विज्ञापनों की विचारधारा और पूँजीवादी विचारधारा का विज्ञापन

शिवानी टेलीविज़न, इण्टरनेट, अख़बार आदि में विज्ञापन तो आप ज़रूर देखते होंगे चाहे आपको यह कितना ही नापसन्द क्यों न हों। रेडियो पर सुनते भी

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