गौतम चौधरी दुनिया के हर समाज में महिलाओं की भूमिका पर बहस होती रही है, लेकिन मुस्लिम समाजों में यह बहस अक्सर दो वैचारिक चिंतनों
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KGB : सत्ता, भय और निगरानी का सोवियत समाजवादी साम्राज्य
गौतम चौधरी इतिहास में कुछ संस्थाएँ केवल सरकारी ढाँचे का हिस्सा नहीं होतीं, वे अपने समय की राजनीति, भय और सत्ता की मानसिकता का प्रतीक
اسلام: دنیا کا پہلا مذہب جہاں خواتین کے حقوق کی مکمل دستاویز سازی ہوئی
گوتم چودھری عصری دنیا میں جب بھی خواتین کے حقوق، تعلیم یا سیاسی شراکت داری پر بحث ہوتی ہے، تو اکثر یہ تصور سامنے آتا
दक्षिणपंथ/ ‘गनतंत्र’ के बाद ‘गणतंत्र’: वामपंथ का सर्वविधिक पतन
राकेश सैन पांच राज्यों के चुनाव परिणामों के बाद एक चुटुकला सुनने को मिला कि एक व्यक्ति ने अपने मित्र से कहा केरल में भी
दक्षिणपंथ/ संघ का लक्ष्य परमवैभवशाली भारत की स्थापना
डॉ. बालमुकुंद पाण्डेय संघ का उद्देश्य “परम वैभवशाली भारत की स्थापना है।” संघ का संकल्प आगामी वर्षों में “संगठित हिंदू समाज” को “और ज्यादा” मजबूत
केरलम : भारतीय लोकतंत्र का सबसे जटिल और जीवित प्रयोग
गौतम चौधरी भारतीय राजनीति के विशाल परिदृश्य में केरलम अपवाद है। यह वह प्रदेश है जहाँ राजनीति केवल चुनावी प्रबंधन, धार्मिक ध्रुवीकरण या व्यक्तिपूजा तक
धधकती धूणी, तपते संत और बड़ा सवाल : क्या विकास का यही मॉडल है?
बाबूलाल नागा राजस्थान की तपती धरती पर इन दिनों एक ऐसी आग जल रही है, जो केवल धूणी की आग नहीं है। यह आग आस्था,
NEET विवाद : 22.7 लाख विद्यार्थियों का भविष्य और प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था पर गहराता भरोसे का संकट
गौतम चौधरी भारत में डॉक्टर बनना केवल एक पेशा नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों के सपनों, संघर्षों और सामाजिक आकांक्षाओं का प्रतीक माना जाता है। एक
विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट : आर्थिक संकट की चेतावनी या फिर सामान्य उतार-चढ़ाव?
गौतम चौधरी भारत का विदेशी मुद्रा भंडार एक बार फिर राष्ट्रीय आर्थिक बहस के केंद्र में आ गया है। हालिया आँकड़ों में विदेशी मुद्रा भंडार
टैगोर को महज एक महान कवि के रूप में देखना उनके व्यक्तित्व का सतही मूल्यांकण होगा
बिरेन्द्र बांगरू रविन्द्रनाथ टैगोर की जयंती पर उन्हें केवल एक साहित्यिक महानायक या नोबेल पुरस्कार विजेता के रूप में स्मरण करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि
