गौतम चौधरी भारतीय राजनीति में एक विचित्र विडम्बना लगातार गहराती जा रही है। एक ओर चुनावी मंचों पर “विश्वगुरु”, “पाँच ट्रिलियन अर्थव्यवस्था” और “विकसित भारत”
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अहिल्याबाई होल्कर : सत्ता नहीं, सेवा की विरासत से लेकर लोकमाता तक का सफर
गौतम चौधरी भारतीय इतिहास में अनेक राजा और महाराजा हुए जिन्होंने अपने साम्राज्य का विस्तार किया, युद्ध जीते और सत्ता का प्रदर्शन किया। लेकिन कुछ
KGB : सत्ता, भय और निगरानी का सोवियत समाजवादी साम्राज्य
गौतम चौधरी इतिहास में कुछ संस्थाएँ केवल सरकारी ढाँचे का हिस्सा नहीं होतीं, वे अपने समय की राजनीति, भय और सत्ता की मानसिकता का प्रतीक
भारतीय राजनीति का ‘नया भूगोल’: भारत में ‘नारी शक्ति’ का आधुनिक अध्याय
ओ.पी. पाल भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में 16 अप्रैल का दिन एक युगांतरकारी मोड़ साबित हो सकता है। केंद्र सरकार ने श्नारी शक्ति वंदन अधिनियमश् को
Kautilya’s Arthashastra : The Strength of the State Lies in Service to the People
By Gautam Chaudhary In the Indian philosophical tradition, the four Purusharthas—Dharma, Artha, Kama, and Moksha—hold special significance. Among them, Artha (wealth and material resources) occupies
कौटिल्य का अर्थशास्त्र : जनता की सेवा में निहित है राज्य की शक्ति
गौतम चौधरी भारतीय चिंतन परंपरा में पुरुषार्थ चतुष्टय-धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का विशेष महत्व है। इनमें “अर्थ” को अत्यंत केंद्रीय स्थान प्राप्त है, क्योंकि
उन्नाव रेप केस : न्याय, सत्ता और कानून की कसौटी पर सुप्रीम कोर्ट की दखल
बाबूलाल नागा देश के सबसे चर्चित और संवेदनशील आपराधिक मामलों में शामिल उन्नाव रेप केस एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में है। सुप्रीम
आसुरी शक्ति के प्रणेता दानव मधु और कैटभ, देवी ने भ्राताद्वय के संघार में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
अशोक प्रवृद्ध नवरात्र काल में आदि काल में सृष्टि निर्माण से संबंधित दो प्रसिद्ध दैत्य मधु व कैटभ नामक भ्राताद्वय के वध की कथाएं लोगों
सामोहिक शक्ति का जागरण चाहती है तो सांस्कृतिक नहीं समावेशी राष्ट्रवाद के चिंतन को आत्मसात करे भाजपा
गौतम चौधरी हर विधानसभा स्तर पर मानदेय युक्त यानी वेतनभोगी पूर्णकालिक कार्यकर्ता। पन्ना प्रमुख स्तर तक सांगठनिक नेटवर्क। राष्ट्रीय से लेकर मंडल स्तर तक कार्यसमिति
सत्ता के विधायी इकाइयों में मुस्लिम महिलाओं की भी हिस्सेदारी सुनिश्चित होनी चाहिए
गौतम चौधरी सत्ता के विभिन्न विधायी पंचायतों में महिलाओं का एक तिहाई आरक्षण तो ठीक है लेकिन इसमें अल्पसंख्यक, खासकर मुस्लिम महिलाओं की हिस्सेदारी भी
