गौतम चौधरी “हर ज़र्रा चमकता है अनवार-ए-इलाही से,हर साँस ये कहती है, हम हैं तो ख़ुदा भी है।” उर्दू शायरी में ऐसे अनेक शेर मिलते
गौतम चौधरी “हर ज़र्रा चमकता है अनवार-ए-इलाही से,हर साँस ये कहती है, हम हैं तो ख़ुदा भी है।” उर्दू शायरी में ऐसे अनेक शेर मिलते