उमेश भाई ………………. तुम्ही सो गए दास्तां कहते-कहते!

उमेश भाई ………………. तुम्ही सो गए दास्तां कहते-कहते!

गौतम चौधरी 

नहीं… अभी तो अनेक संघर्षों में आपका साथ चाहिए था… अभी तो लंबी लड़ाई थी…! आपने धोखा दिया। आप कैसे जा सकते हैं। 

झारखंड के जाने-माने राजनीतिक-सामाजिक लीडर और संस्कृतिकर्मी उमेश नजीर क्रूर कोरोना वायरस से लड़ते हुए जीवन की जंग हार गये।  वे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी झारखंड राज्य परिषद के सदस्य थे। इलाज के दौरान रिम्स में रविवार को सुबह साढ़े आठ बजे उनका निधन हो गया। 

उमेश नजीर ने औपचारिक तौर पर 1986 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। वे राज्य परिषद के सदस्य होने के साथ-साथ रांची जन नाट्य संघ में सांस्कृतिक मोर्चे पर बहुत सक्रियता रहते थे।   

राजनीतिक, सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय होने के साथ-साथ उमेश नजीर, झारखंड के अनेक जनांदोलनों और सामाजिक संगठनों को नेतृत्व प्रदान करने का काम भी कर रहे थे। वे पार्टी के प्रत्येक आंदोलनों और कार्यक्रमों में पूरी लगन, ईमानदारी और समर्पण के साथ शामिल होते थे।  

एक संस्कृतिकर्मी के तौर पर उमेश नजीर ने अनेक नाटकों, गीतों, समूह गानों, नुक्कड़ नाटकों और सांस्कृतिक कार्यशालाओं में सक्रियतापूर्वक शामिल रहे हैं। गत 20 मार्च 2021 को रामगढ़ में आयोजित जनवादी गीत कार्यशाला में उन्होंने मुख्य वक्ता के तौर पर अपना आखिरी भाषण दिया था। वे स्वतंत्र पत्रकार भी थे और जनलेख नामक पोर्टल के लिए नियमित तौर पर जनसरोकार के मुद्दों पर लिखते थे। इसके अलावा अनेक पत्र-पत्रिकाओं में उनके आलेख  और रचनाएं प्रकाशित हुई हैं।

उमेश भाई हमलोगों को असमय छोड़ कर चले गए। उमेश दा को सादर अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि।

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