मधुपुर उपचुनाव : फिलहाल भाजपा का पलड़ा भारी

मधुपुर उपचुनाव : फिलहाल भाजपा का पलड़ा भारी

गौतम चौधरी

विगत दिनों झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रजनीति का मास्टर स्टोक लगाते हुए दिवंगत मंत्री पुत्र, हफीजुल हसन अंसारी को मंत्री बना दिया। इसके बाद उस कयास पर विराम लग गया है कि मधुपुर विधानसभा के उपचुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से कौन लड़ेगा। अब यह तय हो चुका है कि मधुपुर उपचुनाव में हाजी के लड़के हफीजुला हसन को ही जेएमएम अपना उम्मदवार बनाएगा। इधर भारतीय जनता पार्टी के अंतःपुर वाले खेमें की चर्चा पर विश्वास करें तो भाजपा एक बार फिर राज पालीवाल पर ही अपना दाव लगाने वाली है। कुल मिलाकर देखें तो इस बार के उपचुनाव में भी पारंपरिक प्रतिद्वंद्वियों के बीच ही मुख्य मुकाबला होगा।

दलों की स्थिति, ताकत और चुनाव का रूझान इस उपचुनाव को निःसंदेह प्रभावित करेगा। इसके लिए सबसे पहले हम चुनाव के रूझानों की ओर अपना रूख़ करते हैं। मधुपुर विधानसभा सीट झारखंड के देवघर जिले में आती है। 2019 में मधुपुर में लगभग 67 प्रतिशत वोट पड़े थे। इसमें से 38.40 प्रतिशत मत हाफिज को पड़े जबकि 28 प्रतिशत के करीब पालीवाल को वोट मिले। 2019 में झारखंड मुक्ति मोर्चा से हाजी हुसैन अंसारी ने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार राज पालीवाल को कुल 23069 वोटों के अंतर से हराया था। यह सीट भले देवघर जिला का अंग है लेकिन इसका लोकसभा क्षेत्र गोड्डा है।

इस संसदीय क्षेत्र के सांसद फिलहाल भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे हैं। दुबे झारखंड के कद्दावर नेता माने जाते हैं। दुबे अपनी जगह बेहद मजबूत हैं। दुबे के बारे में यहां तक कहा जाता है कि वे संथाल परगना के अधिकतर सीटों पर प्रभावशाली भूमिका निभाते हैं। विछले संसदीय आम चुनाव में उन्होंने झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) के उम्मीदवार प्रदीप यादव को 184227 वोटों से हराया था।

यदि पीछे के रूझानों को देखें तो भाजपा का यहां पलड़ा भारी रहा है। 2005 से लेकर अबतक यानी 2019 के विधानसभा चुनाव तक ज्यादा प्रभाव भाजपा के राज पालीवाल का ही देखने को मिलता है। चुनावों में एक बात बेहद खास दिख रहा है। बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व वाली पार्टी झारखंड विकास मोर्चा प्रजातांतिक और सुदेश महतो के नेतृत्व वाली आजसू पार्टी भाजपा को क्षति पहुंचाती रही है। इस बार के उपचुनाव में यह दोनों पार्टियां भाजपा के साथ है। बाबूलाल की पार्टी एक तरह से भाजपा में विलय कर चुकी है जबकि आजसू पार्टी का भाजपा के साथ गठबंधन हो चुका है। 2019 के चुनाव में राज कुल 23069 वोट से पराजीत हुए थे, जबकि आजसू पार्टी के उम्मीदवार गंगा नारायण राय को 45620 वोट मिले। यहां बता दें कि 2019 विधानसभा में आजसू अकेले चुनाव लड़ी थी। वहीं झारखंड विकास मोर्चा के उम्मीदवार मोहम्मद सहीम खान को 4222 वोट मिले थे। सहीम का वोट तो भाजपा के पाले में आना थोड़ा कठिन लगता है लेकिन गंगा नारायण वाला वोट भाजपा को मिल सकता है। यदि यह वोट राज पालीवाल को मिलता है तो निश्चित रूप से राज का पलड़ा भारी होगा।

दूसरी ओर हेमंत के खिलाफ कोई खास आक्रोश नहीं दिख रहा है। कुल मिलाकर हेमंत अभी तक ठीक-ठाक सरकार चलाते रहे हैं और अपने आधार वोटरों को बांधे हुए हैं। इसलिए फिलहाल उनके वोट बैंक में सेंध संभव नहीं दिख रहा है लेकिन गठबंधन और जेवीएम के विलय के बाद भाजपा पूरे प्रदेश में मजबूत हुई है। यदि कोई बड़ा बखेड़ा नहीं हुआ तो मधुपुर की सीट भाजपा निकाल सकती है। हालांकि भाजपा के अंदर भी सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। कई धरे हैं और हर एक धरा, एक-दूसरे को कमजोर करने की फिराक में है। पिछले उपचुनाव में निरसा और दुमका की हाल के पीछे का कारण भी यही है। दूसरा, ऐन मौके प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दीपक प्रकाश का सरकार गिरा देने वाला बयान भी भाजपा को क्षति पहुंचा गया। अभी भी भाजपा चेती नहीं है। गाहे-बगाहे अध्यक्ष अनड़गल बयानबाजी करते रहते हैं। हेमंत के रणनीतिकार इस बयानबाजी को अपने अपने हितों में जबरदस्त तरीके से उपयोग करते हैं। इससे भाजपा के खिलाफ पुराना वाला आक्रोश अभी बना हुआ ही है। इसके साथ ही लगातार बढ़ रही महंगाई और केन्द्र की नीतियों का भी उपचुनाव पर प्रभाव पड़ सकता है।

मधुपुर उपचुनाव में फिलहाल भाजपा का पलड़ा भारी दिख रहा है लेकिन भाजपा के रणनीतिकार यदि कोई रणनीतिक चूक करते हैं तो वोट रहते भाजपा की मधुपुर में हार भी हो सकती है। इसलिए भाजपा को सतर्क रहकर सांगठनिक रणनीति के आधार पर चुनाव लड़ना चाहिए। यदि राजनीतिक बयानबाजी हुई तो फिर भाजपा की हार यहां भी हो सकती है।

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