गौतम चौधरी
दरअसल, यह सच्ची कहानी मुझे मनिकान्त रामकृष्ण गौतम ने भेजी है। वेमपति श्रीनिवास राव उनके पिता हैं। मेरा ईमेल आईडी गौतम को कहां से मिला मुझे पता नहीं लेकिन उन्होंने मुझे मेल किया। यह कहानी प्रेरणादायी है। इसलिए मैंने इसे अपने माध्यम पर सार्वजनिक करने की सोची। और आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूं। मैं यहां गैतम के आग्रह को भी प्रस्तुत कर रहा हूं। गैतम के द्वारा भेजे तथ्य को मैंने अपने तरीके से थोड़ा संपादित कर दिया है। यह इसलिए कर रहा हूं कि यदि सच्चे मन से कोई किसी से निवेदन करे तो अगला सोचने के लिए मजबूर जरूर हो जाता है। इसलिए प्रयास करते रहना चाहिए और मानवता की सेवा करने वालों को इसका ज्यादा असर देखने को मिलता है।
गौतम कहते हैं, ‘‘मेरे पिता, वेमपति श्रीनिवास राव, काकीनाडा पोर्ट स्टेशन पर शंटिंग मास्टर-एक के रूप में 40 वर्षों की समर्पित सेवा के बाद 29 मार्च, 2026 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। बिना किसी शोर-शराबे के रेलवे की प्रगति में उनका यह योगदान, राष्ट्र सेवा और असीम समर्पण की एक मिसाल है। यदि आप इस प्रेरणादायक लेख को प्रकाशित करते हैं, तो कृपया हमारे साथ न्यूज़ क्लिपिंग या लिंक साझा करने की कृपा करें।’’
29 मार्च 2026 की संध्या आंध्र प्रदेश के काकीनाडा पोर्ट स्टेशन के लिए एक भावुक क्षण लेकर आएगी। यह केवल एक कर्मचारी की विदाई नहीं होगी, बल्कि समर्पण, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की एक अद्वितीय यात्रा का सम्मान होगा। शंटिंग मास्टर-प् वेमपति श्रीनिवास राव, जिन्होंने भारतीय रेलवे के साथ चार दशकों तक निष्ठा से सेवा की, अब सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं।
वेमपति श्रीनिवास राव का करियर इस बात का सशक्त उदाहरण है कि निरंतर मेहनत और समर्पण से किस प्रकार कोई व्यक्ति अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल कर सकता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जमीनी स्तर से की और धीरे-धीरे संचालन, माल ढुलाई प्रबंधन, सुरक्षा मानकों और पोर्ट लॉजिस्टिक्स जैसे जटिल क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता विकसित की।
उनके सहकर्मी उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के रूप में याद करते हैं, जिन्हें “ट्रैक के नट-बोल्ट से लेकर पूरे पोर्ट संचालन की रणनीतियों तक” हर पहलू की गहन समझ थी। यह केवल ज्ञान नहीं, बल्कि अपने कार्य के प्रति उनके गहरे लगाव का प्रमाण था।
राव का नेतृत्व शैली दिखावे से परे, कर्मप्रधान रही। उन्होंने कभी सुर्खियों की तलाश नहीं की, बल्कि अपने कार्य और आचरण से उदाहरण प्रस्तुत किया। उनका सरल लेकिन प्रभावी सिद्धांतक-“हर ट्रेन का समय पर प्रस्थान ही हमारी सामूहिक सत्यनिष्ठा का पैमाना है” -उनकी कार्यनिष्ठा और सोच को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें ‘करियर अचीवमेंट अवार्ड’ से सम्मानित किया गया, जो उनके योगदान की औपचारिक स्वीकृति है। लेकिन उनके साथ काम करने वालों के लिए उनका सबसे बड़ा सम्मान उनका मार्गदर्शन और प्रेरणा है।
आज के समय में, जब नौकरी बदलना सामान्य हो गया है और स्थिरता कम होती जा रही है, राव की कहानी एक मजबूत संदेश देती है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि-’’समर्पण से साख बनती है’’ लंबे समय तक एक संस्था से जुड़े रहने से गहरी विशेषज्ञता और विश्वास का निर्माण होता है।
’’निरंतरता ही नेतृत्व है’’ सच्चा नेतृत्व आदेशों से नहीं, बल्कि उदाहरण से स्थापित होता है।
’’कार्य को उद्देश्य बनाना’’ जब काम केवल नौकरी न रहकर एक बड़े उद्देश्य से जुड़ जाता है, तब वह जीवन को सार्थक बना देता है।
वेमपति श्रीनिवास राव की सेवानिवृत्ति एक अंत नहीं, बल्कि एक गौरवशाली अध्याय का समापन है। उनके द्वारा स्थापित मूल्य, उनका कार्य और उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
उनकी कहानी हमें यह याद दिलाती है कि महान संस्थाएं केवल ढांचे और तकनीक से नहीं, बल्कि उन समर्पित लोगों से बनती हैं जो अपने कर्तव्य को सर्वाेपरि मानते हैं। जब तक काकीनाडा पोर्ट स्टेशन की पटरियों पर रेलगाड़ियां दौड़ती रहेंगी, वेमपति श्रीनिवास राव का समर्पण और भावना उन पटरियों के साथ जीवित रहेगी-एक सच्चे कर्मयोगी की अमर पहचान के रूप में।
