गौतम चौधरी
वैसे तो संपूर्ण पाकिस्तान ही संगठित आपराधिक गिरोह और आतंकवादी संगठनों के जद में है लेकिन इधर के दिनों में न केवल आतंकवाद नहीं अपितु संगठित आपराधिक समूह भी कानून व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती खड़ी करने लगे हैं। विगत 17 अप्रैल 2026 को सिंध प्रांत की राजधानी करांची के ओरंगी टाउन मंगोपिर क्षेत्र में सशस्त्र हमले में एक पुलिसकर्मी मारा गया। हमले में मारे गए सुरक्षाकर्मी की पहचान कांस्टेबल खादिम अली शाह के रूप में हुई। वहीं दूसरा सुरक्षाकर्मी, जिसकी पहचान, मोहम्मद तुफैल खान के रूप में हुई है, बुरी तरह घायल हो गया। यह घटना बेहद गंभीर है। इस घटना को इसलिए भी जटिल माना जा रहा है कि हमले की जिम्मेदारी Tehreek-e-Taliban Pakistan (TTP) ने ली है।
वहीं दूसरी ओर 17 अप्रैल 2026 को ही, सुरक्षा बलों (SFs) ने कराची के लियारी टाउन में एक संयुक्त अभियान के दौरान टीटीपी के तीन आतंकवादियों को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से हथियार और गोला-बारूद, जिनमें एक 30-बोर पिस्तौल और 18 कारतूस शामिल थे, बरामद किए गए। प्रारंभिक पूछताछ के दौरान, आतंकवादियों ने कथित तौर पर महत्वपूर्ण खुलासे किए, जिनमें कराची में एक बड़े हमले की योजना का खुलासा हुआ।
बीते 10 अप्रैल 2026 को एक नमाज़ी रेहान, पुत्र गुलाम नबी, को कराची में ख्वाजा अजमेर नगरी पुलिस स्टेशन के सेक्टर 5C-1 में एक मस्जिद के बाहर अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना तब हुई जब सशस्त्र मोटरसाइकिल सवारों ने फजर की नमाज़ के तुरंत बाद फारूक-ए-आज़म मस्जिद के प्रवेश द्वार पर रेहान पर फायरिंग कर दी।
10 अप्रैल 2026 को ही, संघीय जांच एजेंसी (FIA) के साथ संयुक्त अभियान में, काउंटर-टेररिज्म विभाग (CTD) ने कराची के यूनिवर्सिटी रोड के पास प्रतिबंधित शिया आतंकवादी संगठन Zainabiyoun Brigade से जुड़े एक टारगेट किलर को गिरफ्तार किया। CTD द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, ‘‘अभियान के दौरान, टीम ने टारगेट किलर मुहम्मद फरहान खान, पुत्र मुहम्मद इस्माइल को गिरफ्तार किया और उसके पास से एक 9 MM पिस्तौल के साथ आठ गोलियों से भरी मैगज़ीन बरामद की। इस पिस्तौल का उपयोग 2023 की लक्षित हत्या में किया गया था। वह पहले भी कई सांप्रदायिक और धार्मिक आतंकवादी गतिविधियों में शामिल रहा है।’’
South Asia Terrorism Portal द्वारा संकलित विश्वस्थ आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान वर्ष में (19 अप्रैल 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार) सिंध में आतंकवाद से संबंधित 10 मौतें दर्ज की गई हैं, जिनमें आठ आतंकवादी, एक नागरिक और एक सुरक्षा बल का जवान शामिल है। 2025 की इसी अवधि के दौरान, प्रांत में 12 मौतें दर्ज की गई थीं (सात सुरक्षा बल कर्मी, पाँच नागरिक और एक आतंकवादी)। वहीं, पूरे वर्ष 2025 में सिंध में 49 आतंकवाद-संबंधित मौतें दर्ज की गईं (26 नागरिक, 16 सुरक्षा बल कर्मी और सात उग्रवादी), जबकि 2024 में यह संख्या 38 थी (15 नागरिक, 14 सुरक्षाबल कर्मी और नौ उग्रवादी), जो 28.94 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।
नागरिकों की मौतें 2024 में 15 से बढ़कर 2025 में 26 हो गईं, जो 73.33 प्रतिशत की वृद्धि है। इसी तरह, सुरक्षा बलों की मौतें 2024 में 14 से बढ़कर 2025 में 16 हो गईं। वहीं, आतंकवादियों की मौतें 2024 में नौ से घटकर 2025 में सात हो गई। यह मामला देखने में सहज लगता है लेकिन नागरिक सुरक्षा को लेकर गंभीर चुनौती प्रस्तुत कर रहा है।
आतंकवाद के अन्य मानकों में भी पिछले वर्ष की तुलना में वृद्धि हुई। 2025 में पाँच बड़े घटनाक्रम (प्रत्येक में कम से कम तीन मौतें) दर्ज किए गए, जबकि 2024 में ऐसे चार घटनाक्रम थे। इसी तरह, बड़े घटनाक्रमों से होने वाली मौतें 2024 में 13 से बढ़कर 2025 में 19 हो गई। 2025 का प्रमुख हमला 26 अगस्त को हुआ, जब टीटीपी आतंकवादियों ने कराची में साइट सुपर हाईवे पर फकीरा गोठ क्षेत्र के पास फायरिंग की, जिसमें चार लोग मारे गए और एक घायल हुआ। टीटीपी ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए बयान जारी किया।
सिंध में विस्फोट की घटनाओं में भी वृद्धि हुई है। 2025 में ऐसी 14 घटनाएँ हुई, जिनमें 14 मौतें हुई, जबकि 2024 में ऐसी नौ घटनाएँ हुई थीं, जिनमें 10 मौतें हुई थीं। जानकार बताते हैं कि सिंध के 30 जिलों में से प्रांतीय राजधानी कराची आतंकवाद का केंद्र बनता जा रहा है। 2025 में प्रांत में दर्ज 49 मौतों में से केवल कराची में 31 मौतें हुई। शेष 18 मौतें कश्मोर जिला (8), घोटकी जिला (6), नौशहरो फिरोज जिला (2), लरकाना जिला (1) और बदिन जिला (1) में दर्ज की गई। 2024 में प्रांत में दर्ज 38 मौतों में से कराची में 27 मौतें हुई, जबकि शेष 11 मौतें घोटकी (5), कश्मोर (2), शिकारपुर (2), जैकबाबाद (1) और जमशोरो (1) में दर्ज की गईं।
टीटीपी और बलूच अलगाववादी समूहों सहित इस्लामवादी आतंकवादी संगठनों के अलावा, सिंधी अलगाववादी समूह जैसे Sindhudesh Revolutionary Army और Sindhudesh Liberation Army भी क्षेत्र में सक्रिय हैं। जानकारों की मानें तो बलूच अलगाववादी समूहों के साथ समन्वय में, सिंधी संगठनों ने क्षेत्र में पंजाबी वर्चस्व का मुकाबला करने के लिए मिलकर काम करना प्रारंभ कर दिया है। 2 मार्च 2025 की एक मीडिया रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि SRA ने Baloch Raji Aajoi Sangar में शामिल होकर पाकिस्तान की केन्द्रीय सरकार और चीन के खिलाफ अपने अभियानों को तेज कर दिया है। एक बयान में BRAS के प्रवक्ता बलोच खान ने बताया कि BLA, बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF), बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स (BRG) और SRA के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई थी।
इस गठबंधन का परिणाम 4 मार्च 2025 के हमले में देखा गया, जब SRA कैडरों ने सिंध के सुजावल जिले (पूर्व में ठट्टा जिला) के सुजावल-मीरपुर बठोरो रोड पर नेशनल लॉजिस्टिक्स सेल (NLC) के वाहनों पर घात लगाकर हमला किया गया, जिसमें दो ड्राइवर घायल हो गए। स्थानीय मीडिया के साथ साझा एक बयान में SRA के प्रवक्ता सोधो सिंधी ने दावा किया कि ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हुए और वाहनों को नुकसान पहुंचा। सोधो सिंधी ने पाकिस्तानी सरकार का ‘सिंध पर कब्जा’ करने और उसके संसाधनों का ‘बिना रोक-टोक शोषण’ करने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘सिंध की भूमि और संसाधन सिंधी लोगों की भावी पीढ़ियों के लिए है और उनकी रक्षा हर कीमत पर की जाएगी…, हम तब तक अपना प्रतिरोध जारी रखेंगे, जब तक सिंध की पूर्ण राष्ट्रीय स्वतंत्रता हासिल नहीं हो जाती।’ उल्लेखनीय है कि SRA ने 2 मार्च को BRAS की उच्च स्तरीय बैठक के केवल दो दिन बाद 4 मार्च को यह हमला किया। इस हमले की कार्यप्रणाली भी बलूच विद्रोही हमलों के पैटर्न का अनुसरण करती दिख रही है।
इससे पहले, 15 फरवरी 2025 को SRA कैडरों ने घोटकी जिले के मीरपुर माठेलो क्षेत्र के पास NLC टैंकरों पर हमला किया। SRA के प्रवक्ता सोधो सिंधी ने कहा कि ‘यह हमला पाकिस्तानी राज्य द्वारा सिंध के संसाधनों के शोषण के खिलाफ प्रतिक्रिया था, राज्य सिंधु नदी से छह नहरों के माध्यम से पानी मोड़ता है, जिससे सिंधी राष्ट्र आर्थिक रूप से बर्बाद और व्यवस्थित रूप से उत्पीड़ित हो रहा है।’ उन्होंने आगे आरोप लगाया कि ‘ग्रीन पाकिस्तान पहल के तहत पाकिस्तानी सेना सिंध में लाखों एकड़ भूमि पर कब्जा कर रही है।’
सिंधी अलगाववादियों द्वारा राज्य संस्थानों पर अन्य हमले भी उनके असंतोष को दर्शाते हैं। 22 अप्रैल 2025 को SRA कैडरों ने हैदराबाद जिले के हुसैनाबाद क्षेत्र में गुड्डू चौक के पास पंजाब जाने वाली एक यात्री ट्रेन पर हमला किया गया। जिसकी जिम्मेदारी लेते हुए SRA के प्रवक्ता सोधो सिंधी ने कहा कि ‘यह हमला पंजाबी बसने वालों को निशाना बनाकर किया गया था, जिनमें से कई घायल हुए। SRA ने कहा कि ‘यह कार्रवाई पाकिस्तानी राज्य और सेना द्वारा सिंध के लगातार औपनिवेशिक शोषण के विरोध में की गई।’ समूह ने आरोप लगाया कि ‘राज्य सिंधु नदी पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करना चाहता है, जिसे उसने सिंधी लोगों की जीवन रेखा और राष्ट्रीय पहचान बताया, ताकि सिंध को स्थायी रूप से कमजोर किया जा सके।’ उसने सिंधी अधिकारों और क्षेत्र की रक्षा के लिए सशस्त्र संघर्ष जारी रखने की बात भी दुहराई है।
इसके अलावा, 4 जून 2025 को SRA कैडरों ने रात में हैदराबाद शहर (हैदराबाद जिला) के नसीम नगर पुलिस स्टेशन पर हैंड ग्रेनेड से हमला किया। जिम्मेदारी लेते हुए SRA के प्रवक्ता सोधो सिंधी ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी पंजाबी राज्य ने सिंध की भूमि, प्राकृतिक संसाधनों और सिंधु नदी पर पूर्ण कब्जे की योजना बनाई है, और सिंध पुलिस इस योजना को लागू करने में प्रमुख भूमिका निभा रही है, जिसे उन्होंने सिंधी राष्ट्र के खिलाफ नरसंहार अभियान बताया। सोधो सिंधी ने आरोप लगाया कि सिंध पुलिस सिंध के राष्ट्रीय राजनीतिक आंदोलनों को दबाने में अग्रणी रही है और विशेष रूप से हैदराबाद पुलिस, खासकर नसीम नगर पुलिस स्टेशन, पर वधु वाह बाईपास पर राष्ट्रीय विरोध प्रदर्शनों और धरनों को हिंसक तरीके से तितर-बितर करने का आरोप लगाया।
जहां राज्य प्राधिकरण सिंधी राष्ट्रवादियों की आवाज़ को दबाने में व्यस्त रहे, वहीं अपराधी पूरे प्रांत में, विशेषकर कराची में, बेखौफ घूमते रहे। ये अलगाववादी सड़क अपराध सुरक्षा तंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं। 2026 के पहले तीन महीनों में कराची में 14,000 से अधिक घटनाएँ दर्ज की गईं। Citizens-Police Liaison Committee के 9 अप्रैल को जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, इस वृद्धि में हजारों वाहन चोरी और लूट के दौरान कई मौतें शामिल थीं। केवल पहले तीन महीनों में ही लगभग 134 लोग लूटपाट का विरोध करते हुए मारे गए।
हालांकि सिंध में आतंकवाद को कुछ हद तक नियंत्रित किया गया है, लेकिन विशेष रूप से कराची में लगातार उच्च अपराध दर राज्य के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जो व्यापक और निरंतर कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई है। उक्त संगठित अपराध और अलगाववादी घटनाएं साबित कर रहा है कि पाकिस्तान का अब दूसरा क्षेत्र भी पंजाबी बर्चस्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यह एक असफल राष्ट्र की पहचान को रेखांकित करता है। इससे साफ साबित होता है कि पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर नागरिक असंतोष का उभार हो रहा है।
