अहमदाबाद/ अयोध्या का श्रीराम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि विश्वभर के करोड़ों हिंदुओं के सदियों के बलिदान, लंबे संघर्ष और अटूट श्रद्धा का प्रतीक है। मंदिर की दानपेटी में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित धन का दुरुपयोग करना महापाप है और प्रभु श्रीराम ऐसे कर्म करने वालों को उनके कर्मों का फल अवश्य देंगे। किंतु सरकार को चाहिए कि इस मामले में शीघ्रता से निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करे कि दोषी कौन हैं तथा सच्चाई जनता के सामने लाए। साथ ही दोषियों के विरुद्ध कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए। यह मांग हिंदू जनजागृति समिति ने की है।
समिति की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि वह पहले भी अनेक बार यह मांग उठा चुकी है कि किसी भी मंदिर की प्रबंधन समिति में केवल भगवान के सच्चे भक्त ही होने चाहिए। एक सच्चा भक्त ईश्वर का उपासक होता है, इसलिए वह देवधन (भगवान के धन) की चोरी या दुरुपयोग करने का विचार भी स्वप्न में नहीं कर सकता। यदि वास्तव में मंदिरों का उत्थान करना है, तो मंदिरों की व्यवस्था ऐसे ही श्रद्धालु एवं समर्पित भक्तों को सौंपी जानी चाहिए। ऐसे मामलों के आधार पर सरकार यदि मंदिरों का सरकारीकरण करने का प्रयास करती है, तो हिंदू जनजागृति समिति उसका सदैव विरोध करेगी।
समिति के हवाले से समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता रमेश शिंदे ने आगे कहा कि जो सरकारी अधिकारी स्वयं भ्रष्टाचार से मुक्त नहीं हैं अथवा जो सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्ट व्यवस्था का हिस्सा हैं, वे मंदिर प्रबंधन में होने वाले भ्रष्टाचार को कैसे रोक सकते हैं? इसलिए धर्मनिरपेक्ष सरकार का धार्मिक स्थलों के प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। देशभर में ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जहाँ मंदिरों के सरकारीकरण के बाद मंदिरों के धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आई हैं। अतः मंदिरों की जिम्मेदारी ऐसे सच्चे भक्तों को ही सौंपी जानी चाहिए, जो इसे भगवान की सेवा मानकर पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाएँ।
