वीरेंद्र बांगड़ू virendrabangroo@gmail.com कुल्लू का धार्मिक संसार अपनी विशिष्टता के लिए जाना जाता है। यहां परंपरागत रूप से लगभग हर गांव का अपना देवता है।
Category: Festival & Religion
अफगान महिलाओं की कैद होती आजादी, चिंता से आगे बढ़कर कार्रवाई की जरूरत
गौतम चौधरी अफगानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता एक बार फिर गहरा गई है। पश्चिमी अफगानिस्तान के हेरात शहर में
भारतीय भाषाओं में रामायण, एक आलोचनात्मक मिमांसा
डॉ. नीरज भारद्वाज हमारे शास्त्रों, ग्रंथों में विद्वानों, आचार्यों आदि ने साहित्य की महिमा का वर्णन लिखते हुए कहा है कि वही साहित्य श्रेष्ठ है
इस्लामी आउटरीच, डिजिटल मीडिया और मुस्लिम युवाओं के सामने कट्टरपंथ की चुनौती
गौतम चौधरी धर्म मनुष्य को जोड़ता है। यह आपस के समन्वय का सबसे शक्तिशाली मानवीय व्यवस्थाओं में से एक रहा है लेकिन जब धर्म तक
तिरहुत की लोकस्मृतियों से प्रेरित कथा/ ‘‘बूढ़ा पीपल और डूबा हुआ गाँव’’
गौतम चौधरी ‘‘बचपन में नेनुआ-फरकिया, खगड़िया आदि की कहानियां सुनने को मिलती थी। वो कहानियां बेहद रोचक और रोमांचकारी होती थी। कहानियां का कोई लिखित
अल-वला वल-बरा : इस्लामी शिक्षा के आलोक में मुसलमानों की कुछ सामाजिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारियाँ भी हैं
गौतम चौधरी अमूमन धार्मिक अवधारणाओं का मूल्यांकन केवल शाब्दिक अर्थ से किया जाता है और उसके व्यापक नैतिक व सामाजिक संदर्भों को नजरअंदाज कर दिया
गुरु पूर्णिमा : गुरु-शिष्य संबंधों का जागरण पर्व
डॉ. घनश्याम बादल तस्मै श्री गुरुवे नमः की भारतीय संस्कृति में यदि किसी संबंध को सर्वाधिक पवित्र और जीवन-निर्माणकारी माना गया है तो वह है
भारतीय मुस्लिम समाज : बहुलतावादी सांस्कृतिक स्वरूप, सामाजिक सहभागिता और राष्ट्र-निर्माण भागीदारी
गौतम चौधरी हाल ही में सहारनपुर के रहने वाले वरिष्ठ चिंतक और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. असलम खान साहब ने एक व्यक्तिगत अनुभव साझा किया। उन्होंने
पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन से ही वक़्फ़ की गरिमा और मर्यादा वापस आ पाएगी
गौतम चौधरी वक़्फ़ इस्लाम की सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक संस्थाओं में से एक है। सदियों से मस्जिदें, कब्रिस्तान, मदरसे, अनाथालय, दरगाहें और अनेक धर्मार्थ संस्थान उन
‘‘हर ज़र्रा चमकता है अनवार-ए-इलाही से ….’’ : अकबर इलाहाबादी के एक शेर के बहाने इस्लाम और भारतीय दर्शन का तुलनात्मक अध्ययन
गौतम चौधरी “हर ज़र्रा चमकता है अनवार-ए-इलाही से,हर साँस ये कहती है, हम हैं तो ख़ुदा भी है।” उर्दू शायरी में ऐसे अनेक शेर मिलते
