पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन से ही वक़्फ़ की गरिमा और मर्यादा वापस आ पाएगी

गौतम चौधरी वक़्फ़ इस्लाम की सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक संस्थाओं में से एक है। सदियों से मस्जिदें, कब्रिस्तान, मदरसे, अनाथालय, दरगाहें और अनेक धर्मार्थ संस्थान उन

‘‘हर ज़र्रा चमकता है अनवार-ए-इलाही से ….’’ : अकबर इलाहाबादी के एक शेर के बहाने इस्लाम और भारतीय दर्शन का तुलनात्मक अध्ययन

गौतम चौधरी “हर ज़र्रा चमकता है अनवार-ए-इलाही से,हर साँस ये कहती है, हम हैं तो ख़ुदा भी है।” उर्दू शायरी में ऐसे अनेक शेर मिलते

श्री रामलला मंदिर में चढ़ावा चोरी संघ साधना पर वज्राघात

डॉ. मत्स्येन्द्र प्रभाकर अयोध्या स्थित राम मन्दिर न केवल ऐतिहासिक बल्कि भारत की सनातन परम्परा एवं संस्कृति का अद्वितीय प्रतीक है। लगभग पाँच शताब्दी के

रामानुजाचार्य : विशिष्टाद्वैत के आचार्य और सामाजिक समरसता के अग्रदूत

#वृतांतों की #यात्रा : #संन्यास बड़ा या #गृहस्थ? अक्षपाद् गौतम भारतीय दार्शनिक परंपरा में आदि शंकराचार्य, रामानुजाचार्य और मध्वाचार्य को वेदांत के तीन प्रमुख स्तंभ

तन्जीह बनाम तश्बीह : इस्लामी धर्मशास्त्र की दो व्याख्यात्मक परंपराएँ, इसे तसल्ली से समझना होगा

#वृतांतों_की_यात्रा/ #दरभंगा/ पार्ट 01/ #कांच की #चूड़ियां/ गौतम चौधरी ’‘लैसा कमिस्लिही शै‘उन’’: उसके समान कोई भी वस्तु नहीं है। (सूरह अश-शूरा 42ः11) इस्लाम की संपूर्ण

हिमलिंग से परे : कश्मीर के अमरनाथ में अमरेश्वर की पहचान

वीरेन्द्र बंगरू सनातन धर्म की दार्शनिक परंपरा में किसी देवता का नाम (नाम) मात्र एक संबोधन नहीं होता। वह आध्यात्मिक सत्य, पौराणिक स्मृति, भाषिक इतिहास

थाली के गंध व स्वाद को भारतीय संविधान की मर्यादा में रखें, ध्रुवीकरण का हथियार न बनाएं

गौतम चौधरी लोकतंत्र की सबसे बड़ी विशेषता भिन्न-भिन्न जीवनशैलियों के साथ सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार है। भारत जैसे बहुलतावादी समाज में यह सिद्धांत और भी

‘‘श्रीरामलला मंदिर दानपेटी में कथित गड़बड़ी का मामला महापाप, प्रबंधन भक्तों के हाथों में सौंपे’’

अहमदाबाद/ अयोध्या का श्रीराम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि विश्वभर के करोड़ों हिंदुओं के सदियों के बलिदान, लंबे संघर्ष और अटूट श्रद्धा

कश्मीरी पंडित, खीर भवानी यात्रा और वापसी का प्रश्न

वीरेंद्र बंगरू पिछले कुछ दिनों से तुलमुला स्थित खीर भवानी मंदिर की वार्षिक यात्रा में कश्मीरी पंडितों की भागीदारी को लेकर चर्चा फिर तेज हो

संस्कृति और संस्कार : समाज या व्यक्ति का स्वरूप ही नहीं संसाधन व पूंजी भी है

गौतम चौधरी हमारे समय की एक बड़ी विडंबना यह है कि संस्कृति पर चर्चा तो बहुत होती है लेकिन संस्कृति को समझने का प्रयास कम

1 2 3 27
Translate »