अनिल धर्मदेश अभी एक दशक पहले तक सार्वजनिक स्थलों पर सरकार द्वारा नियमित घोषणा करायी जाती थी कि किसी लावारिस बैग या वस्तु को न
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जबरन धर्मांतरण या लव जिहाद इस्लाम के मूल चिंतन का अंग नहीं
डॉ. अनुभा खान हाल के दिनों में, ‘लव जिहाद’ शब्द समाचार माध्यमों के एक खास वर्ग में बड़ी तेजी से सुर्खियां बटोरने लगा है। इसके
महामंत्री आदित्य द्वारा नेताओं पर की गयी कर्रवाई प्रदेश भाजपा की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा
गौतम चौधरी झारखंड प्रदेश भारतीय जनता पार्टी, संसदीय चुनाव में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए, केवल बहुसंख्यक ध्रुवीकरण के भरोसे ही नहीं है। भाजपा
खालिस्तानियों का चुनाव लडऩा स्वागत योग्य है लेकिन सतर्कता भी जरूरी
राकेश सैन लोकसभा चुनावों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत असम की डिब्रूगढ़ जेल में बन्द खालिस्तानी अलगाववादी अमृतपाल के खडूर साहिब से नामांकन
पूँजीवाद में विज्ञापनों की विचारधारा और पूँजीवादी विचारधारा का विज्ञापन
शिवानी टेलीविज़न, इण्टरनेट, अख़बार आदि में विज्ञापन तो आप ज़रूर देखते होंगे चाहे आपको यह कितना ही नापसन्द क्यों न हों। रेडियो पर सुनते भी
भारतीय लोकतंत्र की रक्षा के लिए मुसलमानों को भी करना होगा सहयोग
गौतम चौधरी भारत के बहुसांस्कृतिक स्वरूप की जटिल संरचना में, मुस्लिम समुदाय का न केवल महत्वपूर्ण स्थान है, अतिपु यह समाज देश के चहुमुखी विकास
सामोहिक शक्ति का जागरण चाहती है तो सांस्कृतिक नहीं समावेशी राष्ट्रवाद के चिंतन को आत्मसात करे भाजपा
गौतम चौधरी हर विधानसभा स्तर पर मानदेय युक्त यानी वेतनभोगी पूर्णकालिक कार्यकर्ता। पन्ना प्रमुख स्तर तक सांगठनिक नेटवर्क। राष्ट्रीय से लेकर मंडल स्तर तक कार्यसमिति
संसदीय आम चुनाव 2024 : मुसलमानों के चुनावी एजेंडे और प्राथमिकताएं
डॉ. हसन जमालपुरी देश के कोने-कोने में संसदीय आम चुनाव की धूम है। हर राजनीतिक दल अपने तरीके से चुनाव को अपने पक्ष में करने
पटना की वो तवायफ जो मच्छरहट्टा के सतघरवा में रहती थी
अरुण सिंह अगली पुस्तक के लिए पटना की तवायफों पर काम करते हुए बी. छुट्टन नाम की एक बेमिसाल किरदार से सामना हुआ। वह 1875
आधुनिकीकरण से प्राप्त सुविधाओं के साथ काँटे भी, जिसे स्वीकारना पड़ेगा
चन्द्र प्रभा सूद कुछ दशक पूर्व हमारे देश में सभी गृहणियाँ बैठकर खाना पकाया करती थीं। जमीन पर चूल्हा बनाया जाता था, उसमें लकड़ी जलाकर
