मेलोनी से आगे : ‘मेलोडी’ कूटनीति और भारतीय राजनीति का दोहरा चरित्र

अक्षपाद् गौतम जॉर्जिया मेलोनी को लेकर भारतीय राजनीति और सोशल मीडिया में इन दिनों जिस तरह की बहस दिखाई दे रही है, उसमें एक अजीब-सा

असहमति पर बार काउंसिल का डंडा : भारत के लोकतांत्रिक ढ़ंचे पर प्रहार तो नहीं?

गौतम चौधरी लोकतंत्र की ताकत इस बात में नहीं कि उसके नागरिक सत्ता और संवैधानिक संस्थाओं से कितनी सहमति रखते हैं, लोकतंत्र की असली ताकत,

नदियों की अमर प्रेमकथा : घने जंगल और पहाड़ों में आज भी कोयल-कारो की विरह वेदना सुनाई देती है

गौतम चौधरी (4) JANLEKH – YouTube झारखंड की धरती पर नदियां केवल जल प्रवाहित नहीं करती। वह यहां की स्मृतियों, संघर्षों, आजीविका और लोकविश्वासों का

‘मुसाफिर कैफे’ की ‘सुधा’, वेदिका पिंटो

(2) झारखंड हाईकोर्ट एडवोकेट असोसिएशन चुनाव। जरनल सेक्रेटरी पद के उम्मीदवार बिनोद सिंह से ख़ास बातचीत। – YouTube सुभाष शिरढोनकर 24 जुलाई 2026 को नेटफ्लिक्स

मीडिया की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा का सवाल…?

प्रभुनाथ शुक्ल पत्रकारिता और बदलते दौर का सच एक आम विमर्श का मुद्दा बन गया है। अमूमन यह देखा जा रहा है कि आमतौर पर

विकास का दूसरा चेहरा, उखड़ते हाईवे और एक्सप्रेस-वे

ज्ञान चंद पाटनी देश में जिस तेजी से सड़कें, पुल, फ्लाईओवर और दूसरे सार्वजनिक ढांचे खड़े किए जा रहे हैं, उससे विकास की चमकीली तस्वीर

मक्का समझौता : नया ‘इस्लामिक नाटो’ या पश्चिम एशिया की बदलती सुरक्षा व्यवस्था?

गौतम चौधरी पश्चिम एशिया में 7 अगस्त को हुआ मक्का समझौता पहली नजर में तीन देशों-सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान, के बीच हुआ एक रक्षा

एम्प्लॉयी जेनरेशन औपनिवेशिक मानसिकता, एम्प्लॉयर जेनरेशन की मानसिकता लानी होगी

पंकज जायसवाल जेन-जी और पेपर लीक के आंदोलनों की जड़ में जाएँ, तो अंततः वहाँ एक ही सवाल दिखाई देता है वह है रोजगार का

इस्लामी आउटरीच, डिजिटल मीडिया और मुस्लिम युवाओं के सामने कट्टरपंथ की चुनौती

गौतम चौधरी धर्म मनुष्य को जोड़ता है। यह आपस के समन्वय का सबसे शक्तिशाली मानवीय व्यवस्थाओं में से एक रहा है लेकिन जब धर्म तक

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