ध्रुवीकृत विश्व में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता : संतुलित कूटनीति का व्यावहारिक मॉडल

ध्रुवीकृत विश्व में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता : संतुलित कूटनीति का व्यावहारिक मॉडल

आज के बढ़ते ध्रुवीकृत वैश्विक परिदृश्य में, जहाँ महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज होती जा रही है, भारत ने अपनी विदेश नीति के केंद्र में रणनीतिक स्वायत्तता को रखा है। यह दृष्टिकोण शीत युद्ध काल के गुटनिरपेक्ष आंदोलन की सरल पुनरावृत्ति नहीं है, बल्कि उसका विकसित रूप है, जिसे अक्सर बहु-संरेखण (मल्टी-अलाइनमेंट) के रूप में समझा जाता है। इसके तहत भारत विभिन्न देशों के साथ अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर सहयोग करता है, बिना किसी एक शक्ति-गुट पर अत्यधिक निर्भर हुए। यह नीति भारत को सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी और संप्रभुता से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय स्वतंत्र रूप से लेने की क्षमता प्रदान करती है।

रणनीतिक स्वायत्तता भारत को बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में जोखिमों को संतुलित करने और साझेदारियों में विविधता बनाए रखने का अवसर देती है। उदाहरण के लिए, भारत एक ओर Quadrilateral Security Dialogue जैसे मंचों के माध्यम से संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग को मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर रूस के साथ ऊर्जा और सैन्य संबंध भी बनाए हुए है। इसी प्रकार, सीमा तनाव के बावजूद चीन के साथ आर्थिक संबंध पूरी तरह समाप्त नहीं किए गए हैं। यह संतुलन भारत को यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि उसकी विदेश नीति किसी एक देश या गुट के अत्यधिक प्रभाव में न आए।

पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति इस संतुलित दृष्टिकोण का स्पष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है। भारत ने इज़राइल के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को गहरा किया है, जबकि साथ ही संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे प्रमुख अरब देशों के साथ मजबूत संबंध बनाए रखे हैं। इसके साथ ही भारत फिलिस्तीन के लिए दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन भी जारी रखता है। इस संतुलित दृष्टिकोण को अक्सर “डी-हाइफनेशन” नीति कहा जाता है, जिसके अंतर्गत भारत विभिन्न पक्षों के साथ अलग-अलग आधारों पर संबंध विकसित करता है, बिना किसी एक संबंध को दूसरे के साथ सीधे जोड़ने के। हाल के वर्षों में नरेंद्र मोदी की इज़राइल यात्रा भी इसी व्यावहारिक कूटनीतिक संतुलन को रेखांकित करती है।

भारत-इज़राइल सहयोग यह भी दर्शाता है कि रणनीतिक साझेदारियाँ आम नागरिकों के जीवन में ठोस लाभ कैसे ला सकती हैं। यह सहयोग केवल कूटनीतिक या राजनीतिक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि, जल प्रबंधन, नवाचार और रक्षा प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों तक विस्तृत है। Indo‑Israel Agricultural Project इसका एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जिसके अंतर्गत विभिन्न भारतीय राज्यों में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप इज़राइली कृषि तकनीकों का प्रदर्शन किया जाता है, जिससे किसान आधुनिक खेती, संरक्षित कृषि और कुशल सिंचाई पद्धतियों को प्रत्यक्ष रूप से सीख और अपनाते हैं।

जल प्रबंधन भी सहयोग का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बनकर उभरा है। माइक्रो-इरिगेशन, अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण और समुद्री जल विलवणीकरण जैसी तकनीकों के माध्यम से भारत जल संसाधनों के अधिक कुशल उपयोग की दिशा में काम कर रहा है। उदाहरण के तौर पर विशाखापत्तनम में प्रस्तावित विलवणीकरण संयंत्र जैसे प्रोजेक्ट शहरी जल आपूर्ति पर दबाव कम करने और दीर्घकालिक जल सुरक्षा को मजबूत करने में सहायक हो सकते हैं।

नवाचार और औद्योगिक सहयोग को संस्थागत समर्थन भी प्राप्त है। India‑Israel Industrial R&D and Technological Innovation Fund जैसे तंत्र संयुक्त अनुसंधान, स्टार्टअप सहयोग और तकनीकी व्यावसायीकरण को बढ़ावा देते हैं। इससे कूटनीतिक संबंध व्यावहारिक तकनीकी साझेदारी में परिवर्तित होते हैं और दोनों देशों के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलती है।

रक्षा सहयोग भी दोनों देशों के संबंधों का एक महत्वपूर्ण आयाम है। संयुक्त विकास कार्यक्रम भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा ढाँचे को भी सुदृढ़ करते हैं। यह सहयोग भारत के दीर्घकालिक लक्ष्य—आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता—के अनुरूप है।

समग्र रूप से, रणनीतिक स्वायत्तता भारत के लिए भू-राजनीतिक दबावों से सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण साधन होने के साथ-साथ नए अवसरों का सेतु भी है। संतुलित और हित-आधारित कूटनीति के माध्यम से भारत खाद्य और जल सुरक्षा, तकनीकी नवाचार, रोजगार सृजन और संस्थागत क्षमता निर्माण जैसे नागरिक-केंद्रित परिणाम हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। गहराते वैश्विक विभाजनों के बीच यह दृष्टिकोण एक ऐसे बहुध्रुवीय विश्व की कल्पना प्रस्तुत करता है, जो विकास, स्थिरता और सहयोग पर आधारित हो।

आलेख में व्यक्त विचार लेखिका निजी हैं। इससे हमारे प्रबंधन का कोई सरोकार नहीं है।

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