National Population Register में ऐसा कुछ भी नहीं जो आपको डराए

National Population Register में ऐसा कुछ भी नहीं जो आपको डराए

हसन जमालपुरी 

“एनपीआर का उद्देश्य एक व्यापक पहचान डेटाबेस बनाना है जिसमे देश में रह रहे हर सामान्य निवासी का पूर्ण पहचान और अन्य विवरण पंजीकृत हो। इससे सरकारी योजनाओं, कार्यक्रमों के तहत लाभ और सेवाओं को बेहतर ढंग से लक्षित करने, योजना में सुधार और पहचान धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिलेगी।’’

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के मामले में केन्द्रीय गृहमंत्रालय ने सफाई दी है। हालांकि इससे पहले आधार के बारे में भी यही कहा गया। कुल मिलाकर भारतीय नागरिकों के लिए कई प्रकार के पहचान पत्र हैं लेकिन सरकार के द्वारा नित नए पहचान और पंजियों से जनता में अविश्वास का माहौल तो बन ही गया है। दरअसल, इसी अविश्वास को हम दूर करने का प्रयास करने वाले हैं। आइए तो समझते हैं एनपीआर क्या है और इससे क्या फायदा होने वाला है। 

राष्ट्रीय जनसंख्या पंजीकरण (एनपीआर) एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है जिसे असम को छोड़कर सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों में अप्रैल से सितंबर 2020 के दौरान जनगणना 2021 के हाउस लिस्टिंग चरण के साथ अद्यतन किया जाना था। इसका उद्देश्य दशक भर में जनसंख्या की वृद्धि को देखना, भारतीय नागरिक और उनकी आजीविका की स्थिति की पहचान करना तथा बेहतर सुविधाएं प्रदान करना है, ताकि भारत सरकार कमजोर लोगों के लिए चलायी जा रही कल्याणकारी योजनाएं को सही व्यक्ति तक पहुंचाने की कोशिश करे। नागरिकों की चिंताओं को दूर करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिकों को एनपीआर में खुद को पंजीकृत करने के लिए कोई दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं है। उनके द्वारा दस्तावेजी प्रमाण द्वारा समर्थित जानकारी एनपीआर में खुद को पंजीकृत करने के लिए पर्याप्त होगी।
दूसरी बात एनपीआर हाल की बात नहीं है न ही मोदी सरकार ने अपनी ओर से इसे थोपने की कोशिश की है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार से ठीक पहले यूपीए -2 सरकार ने भारत की जनगणना 2011 की हाउस लिस्टिंग चरण के साथ राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के लिए डेटा पहली बार 2010 में एकत्र किया गया था। ऐसा इसलिए किया गया ताकि सरकार दस्तावेजों की बहुलता को कम करने और छात्रवृत्ति, नौकरी, रियायत, खाद्यान्न और रसोई गैस आदि की सुविधा के दौरान नकल से बचने तथा कई अन्य लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति के ऑनलाइन डेटाबेस का निर्माण कर सके। 

तीसरी सबसे महत्वपूर्ण बात, देश की सुरक्षा और मजबूती करना है। इस पंजीकरण से प्रत्येक नागरिक की पहचान सुनिश्चित की जा सकती है  तथा घुसपैठियों और विदेशी एजेंटों को अलग किया जा सकता है। वर्तमान एनपीआर किसी भी व्यक्ति की आपराधिक और हिंसक मामलों में भागीदारी का पता लगाने के लिए सबसे प्रामाणिक और विश्वसनीय स्रोत हो सकता है। अमेरिका का सामाजिक सुरक्षा नंबर और कार्ड इस संबंध में एक आदर्श उदाहरण है। सामाजिक सुरक्षा नंबर, अमेरिकी प्रशासन को अपने नागरिकों की देखभाल करने में सहूलियत प्रदान कर रहा है। साथ ही किसी आपात स्थिति का सामना करने में भी इस कोड ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।  

एनपीआर का विरोध करने वालों को याद रखना चाहिए कि देश के प्रत्येक नागरिक को 2004 में संशोधित नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 14 ए के अनुसार भारतीय नागरिक (एनआरआईसी) के एक राष्ट्रीय रजिस्टर में पंजीकरण करना अनिवार्य है। भारत का एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते, यह सभी की जिम्मेदारी बनती है कि वे किसी भी विरोध और शोर के बिना एनपीआर पंजीकरण में सहभागी बने। पंजीकरण के लिए अपना प्रामाणिक विवरण दर्ज कराएं। इसका दूरगामी प्रभाव बेहतर होने वाला है। 

एनपीआर की घोषणा होने के बाद, अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा किए जा रहे विरोध राजनीतिक ही लगता है। हालांकि, ध्यान देने से पता चलता है कि एनपीआर के माध्यम से एकत्र किए गए आंकड़ों का उपयोग अंततः जनता के लाभ के लिए किया जाएगा। एक भारतीय नागरिक की पहचान पहले से ही मतदाता पहचान पत्र, आधार आदि सहित विभिन्न दस्तावेजों के माध्यम से एकत्रित किया जा चुका है। परेशान होने की जरूरत नहीं है। एनपीआर केवल सभी उपलब्ध व्यक्तिगत सूचनाओं और आंकड़ों को सिंक्रनाइज व संकलित करेगा। एक भारतीय नागरिक होने के बावजूद आवश्यक दस्तावेजों से वंचित होने के कारण उन लोगों को कई रास्ते उपलब्ध कराए गए हैं, जिन्हें आसानी से एक्सेस किया जा सकता है। केवल जाली दस्तावेजों के तहत नागरिकता का दावा करने वाले और अपने स्वयं के लाभ के लिए सरकारी धन चूसने वालों को चिंतित होने की जरूरत है।

कुल मिलाकर एनपीआर से किसी को घबड़ाने की जरूरत नहीं है। इसके लिए किसी को अलग से कोई प्रमाण पत्र उपलब्ध करवाने की जरूरत नहीं है। नागरिकता प्रमाणित करने के सारे वैध प्रमण पत्र की यह केवल जांच और डेटा तैयार की विधि मात्र है। इससे किसी को डरने की भी जरूरत नहीं है। यदि कोई यह सोचता है कि इससे किसी की नागरिता खतरे में पड़ जाएगी तो यह निराधार है। वैसे डर स्वाभावित है। क्योंकि असम में ऐसे ही एक कार्यक्रम के परिणाम बहुत अच्छे नहीं आए हैं लेकिन केन्द्र सरकार असम में हुई विसंगतियों को दूर करने की पूरी कोशिश कर रही है। इसलिए केन्द्रीय गृह मंत्रालय बार बार लोगों को विश्वास दिला रहा है। 

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