बिकिनी दृश्यों से चर्चा में आईं श्रुति मराठे

बिकिनी दृश्यों से चर्चा में आईं श्रुति मराठे

सुभाष शिरढोनकर

10 अक्टूबर 1986 को जन्मीं श्रुति मराठे मराठी, तमिल और हिंदी फिल्मों तथा टेलीविजन की जानी-पहचानी अभिनेत्री हैं। हाल ही में वह राजकुमार हिरानी निर्मित और अविनाश अरुण निर्देशित छह एपिसोड की वेब सीरीज ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ (2026) में नजर आईं। जियोहॉटस्टार पर प्रसारित इस सीरीज में उन्होंने श्रद्धा देसाई का किरदार निभाया है, जो खेल मंत्री दिलीप सरदेसाई की पत्नी हैं। इस भूमिका में उनके अभिनय और भाव-भंगिमाओं के साथ बिकिनी दृश्यों की भी चर्चा हो रही है।

श्रुति इससे पहले तमिल फिल्म ‘गुरु शिष्यन’ (2010) के गीत ‘कथारा कथारा…’ में बिकिनी पहने नजर आई थीं। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खास सफल नहीं रही, लेकिन उस गीत में उनके दृश्य लंबे समय तक चर्चा में रहे।

टेलीविजन पर श्रुति को खास पहचान मराठी धारावाहिक ‘राधा ही बावरी’ (2012–2014) से मिली। धारावाहिक के पहले एपिसोड में पूल के दृश्य में बिकिनी पहनने को लेकर उन्हें सोशल मीडिया पर आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। उनके वजन को लेकर भी टिप्पणियां की गईं। हालांकि, उन्होंने इन आलोचनाओं को अपने करियर पर हावी नहीं होने दिया। धारावाहिक आगे बढ़ने के साथ उनके अभिनय को दर्शकों की सराहना भी मिली।

श्रुति ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत मराठी टेलीविजन से की। मराठी फिल्म ‘सनाई चौघडे’ (2008) से उन्होंने बड़े पर्दे पर कदम रखा। इसके बाद तमिल फिल्म ‘इंदिरा विझा’ (2009) में काम किया, जो हिंदी फिल्म ‘ऐतराज’ (2004) का रीमेक थी।

तमिल फिल्म ‘अरवन’ (2012) में विशेष भूमिका निभाने के बाद श्रुति ने मराठी फिल्मों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया। इस दौरान उन्होंने ‘रमा माधव’ (2014), ‘तप्तपदी’ (2014), ‘मुंबई-पुणे-मुंबई 2’ (2015) और ‘बंध नायलॉन चे’ (2016) जैसी फिल्मों में अभिनय किया।

हिंदी फिल्मों में भी उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। ‘बुधिया सिंह–बॉर्न टू रन’ (2016) और ‘वेडिंग एनिवर्सरी’ (2017) उनकी हिंदी फिल्मों में शामिल हैं।

श्रुति के करियर का एक उल्लेखनीय पड़ाव तेलुगु फिल्म ‘देवरा: पार्ट 1’ (2024) भी है, जिसमें जूनियर एनटीआर मुख्य भूमिका में थे। फिल्म में जाह्नवी कपूर और सैफ अली खान भी नजर आए।

व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो श्रुति मराठे ने वर्ष 2016 में अभिनेता गौरव घाटणेकर से विवाह किया।

श्रुति का करियर बताता है कि किसी कलाकार की पहचान केवल उसके चर्चित दृश्यों तक सीमित नहीं होती। टेलीविजन से फिल्मों और फिर विभिन्न भाषाओं की परियोजनाओं तक उनका सफर उनके अभिनय करियर के विविध पहलुओं को सामने रखता है।

(युवराज फीचर्स)

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