गौतम चौधरी अमूमन धार्मिक अवधारणाओं का मूल्यांकन केवल शाब्दिक अर्थ से किया जाता है और उसके व्यापक नैतिक व सामाजिक संदर्भों को नजरअंदाज कर दिया
गौतम चौधरी अमूमन धार्मिक अवधारणाओं का मूल्यांकन केवल शाब्दिक अर्थ से किया जाता है और उसके व्यापक नैतिक व सामाजिक संदर्भों को नजरअंदाज कर दिया