नदियों की अमर प्रेमकथा : घने जंगल और पहाड़ों में आज भी कोयल-कारो की विरह वेदना सुनाई देती है

गौतम चौधरी (4) JANLEKH – YouTube झारखंड की धरती पर नदियां केवल जल प्रवाहित नहीं करती। वह यहां की स्मृतियों, संघर्षों, आजीविका और लोकविश्वासों का

हिन्दी के कालजयी रचनाकार ‘रेणु’ पर वेब संगोष्ठी का आयोजन

गौतम चौधरी  इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र, रांची द्वारा आजादी की 75 वीं वर्षगांठ को समर्पित ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत हिंदी के सुप्रसिद्ध

जंगलों को बचाना है तो वनवासियों को सौंपिए सुरक्षा की जिम्मेबारी

सरहुल पर विशेष गौतम चैधरी भारत में आदिवासियों की संख्या लगभग 10 करोड़ के आसपास है। अधिकतर आदिवासी आज भी जंगलों में रहते हैं लेकिन

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