डॉ. मत्स्येन्द्र प्रभाकर आज का युग श्सूचना का युगश् है। इस युग में मीडिया केवल समाचार देने का माध्यम नहीं है। बल्कि यह जनमत निर्माण,
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महामारी, मीडिया और भय का बाज़ार : क्या वैश्विक स्वास्थ्य समाचारों के पीछे केवल जनहित है या कुछ और भी?
गौतम चौधरी दरअसल, आज सुबह एक वरिष्ठ मित्र के साथ प्रभात भ्रमण के बाद, उनके आवास पर चाय पीने के लिए बैठ गया। चाय की
मोदी की यूक्रेन यात्रा पर पश्चिमी मीडिया का का पूर्वाग्रही दृष्टिकोण
डॉ रमेश ठाकुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूक्रेन दौरे को ग्लोबल मीडिया और विरोधी मुल्क हिकारत की नजरों से देख रहे हैं। विदेशी मीडिया ने
Afghanistan : Media rights violations rise as journalists detained and sentenced
New Delhi/ In another spate of crackdowns on Afghan media workers, journalist Abdul Rahim Mohammadi was reportedly detained by the Taliban’s General Directorate of Intelligence
पारंपरिक समाचार माध्यमों पर सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव
अनिल धर्मदेश तकनीक ने सोशल मीडिया के माध्यम से पूरी दुनिया को एक मंच पर लाने का क्रांतिकारी कार्य किया है। काल, परिस्थिति और स्थान
कृत्रिम बुद्धिमत्ता/ सोशल मीडिया बनता अदृश्य हथियार
डॉ. नीरज भारद्वाज अस्त्र और शस्त्र में एक बड़ा अंतर होता है। साधारण शब्दों में समझें तो अस्त्र दूरी से फेंककर मारा जाता है। दूसरा
मार्क्सवादी बनाम पत्रकार : समाचार माध्यमों के खिलाफ केरल सरकार
के. विक्रम राव केरल की मार्क्सवादी पार्टी और कम्युनिस्ट सरकार ने प्रदेश की मीडिया के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया है। प्रमुख मलयालम टीवी
तय कीजिए सोशल मीडिया की आचार संहिता
डॉ अरविन्द मिश्रा यदि हम सोशल मीडिया की बात करते हैं तो सबसे पहले और प्रमुखता के साथ फेसबुक और वाट्सऐप का नाम दिमाग में
समाज में लैंगिक समानता सुनिश्चित करने में मीडिया की भूमिका अहम : नफीसा
पटना/ समाज में जेंडर इक्विालिटी (लैंगिक समानता) को बढ़ावा देने के लिए पॉलिसी बनानेवाले से लेकर परिवार के सदस्यों तक सबकी बराबर की जिम्मेदारी है।
क्यों न लगें सोशल मीडिया पर कड़े कानून?
डा. वेदप्रकाश अब जब सोशल मीडिया भिन्न-भिन्न रूपों में धड़ल्ले से विकृति फैला रहा है, तब उस पर कडे़ कानून क्यों न लगें? सोशल मीडिया
