राजेश खण्डेलवाल कभी घर-घर में मिट्टी के दीये, मटके और बर्तनों की मांग होती थी। कुम्हार के चाक पर घूमती मिट्टी से सिर्फ बर्तन ही
राजेश खण्डेलवाल कभी घर-घर में मिट्टी के दीये, मटके और बर्तनों की मांग होती थी। कुम्हार के चाक पर घूमती मिट्टी से सिर्फ बर्तन ही