भारत : 80 करोड़ को राशन और 200 करोड़ का ब्लाउज, विपरीत ध्रुवों के बीच खड़ा एक राष्ट्र

अक्षपाद् भारत एक विचित्र मोड़ पर खड़ा है। एक ओर वह विश्वगुरु बनने के सपने देख रहा है, चंद्रमा पर पहुंचने का गौरव गा रहा

संगठित भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है जनवितरण प्रणाली की दुकान, जनता के राशन में घपला

रविंदर भारत में ‘सार्वजनिक वितरण प्रणाली’ ग़रीबों को अनाज मुहैया करवाने की सरकारी योजना है। इस प्रणाली के तहत सरकार निःशुल्क या बहुत कम क़ीमत

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