लोकतंत्र या हिंसातंत्र : किंकर्तव्यविमूढ़ लोक की नियति और लोक संवाद की पुनर्स्थापना

विवेक रंजन श्रीवास्तव राजतंत्र की राजनीति का एक स्पष्ट और स्वीकृत सिद्धांत रहा है, दंड विधान। वहाँ शत्रु और मित्र की परिभाषाएं सीमाओं, सिंहासनों और

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