रेहाना शेख और झारखंड के साज़िद द्वारा दिखाई जा रही मानवता की यह राह

रेहाना शेख और झारखंड के साज़िद द्वारा दिखाई जा रही मानवता की यह राह

रजनी राणा चौधरी 

मुंबई की रहने वाली 40 वर्षीय रेहाना शेख पुलिस विभाग में प्रधान आरक्षी के पद पर तैनात है। रेहाना शेख को उसके पती नासीर, जो स्वयं भी पुलिस विभाग में कार्यरत हैं, प्यार से मदर टरेसा बुलाते हैं। मदर टेरेसा बुलाना लाजमी है। रेहाना ने अपनी बेटी के जन्म दिन और ईद के त्योहार के लिए की जाने वाली खरीदारी के लिए जोड़े गए पैसों को महाराष्ट्र के रायगढ जिले के बाजे तालुका में स्थित ध्यानी विद्यालय में पढ़ने वाले गरीब बच्चों की सहायता के लिए दान कर दिया है।

उसी प्रकार डाॅ. मोहम्मद शाजिद हुसैन झारखंड राज्य के रामगढ़ जिले के सुदूरवर्ती गांव में बच्चों के बीच विज्ञान शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। शाजिद भारतीय प्रबंधन संस्थान से पढ़ाई करने के बाद जर्मनी चले गए और वहीं से आपने डाॅक्ट्रेट किया। शाजिद नौकरी भी किए लेकिन उन्हें नौकरी से ज्यादा समाज सेवा पर भरोसा हुआ और अपने गांव चितरपुर लौट आए। चितरपुर के पांच एकड़ जमीन पर उन्होंने एक विद्यालय की नीब डाली है और उस विद्यालय में बच्चों को प्रायोगिक ढ़ंग से विज्ञान पढ़ा रहे हैं। पढ़ाई के दौरान वे किसी प्रकार का भेद-भाव नहीं रखते हैं और हर समुदाय के बच्चे उनके विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। गांव में विज्ञान और पढ़ाई के साथ हुनर शाजिद का नारा है। यही नहीं झारखंड के सरकारी शिक्षकों को भी विज्ञान के आसान सूत्र बता कर गुमला, लोहरदगा, चतरा, हजारीबाग, रामगढ़, लातेहार, पलामू आदि जिलों में अभिनव व अद्भुद शिक्षा का प्रचार कर रहे हैं।

इधर मुंबई की रेहाना शेख सहयोग करते समय बच्चों के धर्म या जाति आदि पर कोई ध्यान नहीं देती हैं। इसके अलावा रेहाना ने स्कूल में पढ़ने वाले 50 बच्चों की 10वीं कक्षा तक पढ़ाई कराने का वादा भी किया है। महामारी के दौरान मानवता का अनूठा उदाहरण पेश करते हुए उन्होंने 54 लोगों को प्लाजमा अस्पताल में विस्तर तथा खून व आॅक्शीजन आदि उपलब्ध कराने में सहायता की। सामाजिक कार्य के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए वहां की पुलिस कमिश्नर हेमंत नगराले ने 8 अगस्त 2021 को उन्हें सर्वषेष्ठ ता प्रमाणपत्र प्रदान किया।

हमारे समाज में चाहे समाचार माध्यम या पूर्वाग्रह से ग्रस्थ लोग जितना सामुदायिक लाड़ाई का प्रचार कर लें लेकिन भारत का बहुसंख्यक समाज किसी प्रकार की वैमनश्यता से दूर है और आज भी एक-दूसरे के लिए खड़ा दिख रहा है। विगत दिनों दिल्ली के दंगों में यह देखने को मिला तो कोरोना काल में हिन्दू, मुसलमान, सिख एवं ईसाई आपस में मिलकर ऐसा सुरक्षा कबच बनाया कि कोरोना का भयानक प्रभाव कुंद पड़ गया। यह हमारे भारतीय समाज की ताकत है। इसे बनाए रखने की जरूरत है।

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