मीरा नायर की फिल्म ‘अमरी’ में अमृता शेरगिल को आप पर्दे पर देख पएंगे

मीरा नायर की फिल्म ‘अमरी’ में अमृता शेरगिल को आप पर्दे पर देख पएंगे

एक्‍ट्रेस अंजलि शिवारमन इन दिनों मशहूर डायरैक्टर मीरा नायर की अगली बायोपिक फिल्म ‘अमरी’ में अमृता शेरगिल का किरदार निभाने की खबरों को लेकर सुर्खियों में है। बतौर लीड ऐक्ट्रेस अंजलि शिवारमन के कॅरियर के लिए फिल्‍म ‘अमरी’ को बेहद खास माना जा रहा है। इस फिल्‍म में प्रियंका चोपड़ा का नाम भी फिल्‍म के एक कैमियो के लिए फायनल किया जा चुका हैं।

अमृता शेरगिल के किरदार में जो गहराई, मासूमियत और आर्टिस्टिक फील चाहिए थी, मीरा नायर को वह अंजलि में नजर आई। इन्‍हीं तमाम खूबियों के चलते उन्‍होंने फेमस कास्टिंग डायरेक्टर दिलीप शंकर की मदद से 100 से ज्यादा एक्ट्रेसेस का ऑडिशन लेने के बाद इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए अंजलि को चुना ।

कास्टिंग डायरेक्टर दिलीप शंकर को लगता है कि अंजलि और अमृता के बीच कई सारी समानताएं हैं। फिल्म की शूटिंग बुडापेस्ट और उसके बाद भारत में भी कुछ अलग-अलग हिस्सों में की जाएगी।

17 अक्टूबर 1994 को बेंगलुरु में पैदा हुई अंजलि शिवरामन लोकप्रिय भारतीय गायिका चित्रा अय्यर और जाने माने भारतीय वायु सेना पायलट विनोद शिवरामन की बेटी हैं। पिता की नौकरी की वजह से अंजलि को कई शहरों और अलग-अलग माहौल में रहना पड़ा। इसी अनुभव ने उसे अलग-अलग संस्कृतियों, सोच और लोगों को समझने का मौका दिया। शायद यही वजह है कि उनकी पर्सनैलिटी में एक अलग तरह की गहराई नजर आती है।

महज 15 से 20 सैकंड तक, टेलीविज़न पर दिखाए जाने वाले एड से बतौर मॉडल करियर की शुरुआत करने वाली अंजलि शिवारमन ने तरुण ताहिलियानी और सब्यासाची मुखर्जी जैसे मशहूर डिजाइनर्स के लिए रैंप वॉक करते हुए अनेक बड़े डिजाइनर्स के साथ काम किया।

अंजलि जब एक्‍ट्रेस बनने का ख्‍वाब दिल में संजाए हुए बेंगलुरु से मुंबई आई तब यहां उन्हें 7 एपीसोड वाली वेब सीरीज श्पीएम सेल्‍फीवालीश् (2018) में मीरा के किरदार से ओटीटी पर डेब्‍यू करने का अवसर मिला

इसके बाद वह नेटफ्लिक्स की शॉर्ट फिल्म ‘कोबाल्ट ब्लू’ (2022) और वेब सीरीज ‘क्लास’ (2023) में एक बिगड़ैल ड्रगिस्ट सुहानी के किरदार में नजर आईं। इसके बाद से वह लगातार ओटीटी जगत में तेजी से अपनी पहचान बना रही है।

यह फिल्म कई कारणों से विशेष मानी जा रही है। यह कोई पारंपरिक ‘महान व्यक्तित्व की जीवनी’ नहीं है, बल्कि एक कलाकार के मन, उसकी बेचौनी, उसकी रचनात्मकता और उसकी सांस्कृतिक पहचान की खोज की सिनेमाई यात्रा है। मीरा नायर ने स्वयं कहा है कि ’’अमरी’’ अमृता शेर-गिल के जीवन जितनी ही उनकी कला के बारे में भी है।

फिल्म की कहानी 20वीं शताब्दी के शुरुआती दशकों में हंगरी, फ्रांस और भारत के बीच चलती है। इसमें दिखाया गया है कि किस प्रकार एक हंगेरियन माँ और भारतीय पिता की बेटी अमृता शेर-गिल यूरोप में कला का प्रशिक्षण लेने के बाद भारत लौटती हैं और भारतीय समाज, ग्रामीण जीवन तथा आम लोगों के चेहरे अपनी चित्रकला का केंद्र बनाती हैं। उनकी कला केवल सौंदर्यबोध नहीं, बल्कि भारतीय जीवन की आत्मा की खोज बन जाती है।

फिल्म का शीर्षक ’’अमरी’’ भी रोचक है। यह ‘अमृता’ का आत्मीय और संक्षिप्त रूप है, जिससे संकेत मिलता है कि फिल्म केवल ऐतिहासिक घटनाओं का विवरण नहीं देगी, बल्कि कलाकार के निजी जीवन, उसके संबंधों, प्रेम, अकेलेपन और सृजनात्मक संघर्ष को भी संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करेगी।

मुख्य भूमिका में ’’अंजलि सिवरामन’’ हैं, जबकि ’’जयदीप अहलावत’’, ’’जिम सर्भ’’, ’’एमिली वॉटसन’’, ’’अंजना वासन’’ और ’’प्रियंका चोपड़ा जोनस’’ भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे। फिल्म की शूटिंग भारत और हंगरी सहित उन स्थानों पर की गई है, जहाँ अमृता शेर-गिल ने अपना जीवन बिताया था।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह फिल्म ऐसे समय आ रही है जब भारत में आधुनिक कला और कलाकारों के जीवन पर बहुत कम बड़े स्तर की फिल्में बनी हैं। इसलिए ’’अमरी’’ केवल एक बायोपिक नहीं, बल्कि भारतीय आधुनिक कला, स्त्री स्वायत्तता, औपनिवेशिक भारत, सांस्कृतिक पहचान और रचनात्मक स्वतंत्रता पर एक गंभीर सिनेमाई हस्तक्षेप के रूप में देखी जा रही है। यदि मीरा नायर अपनी पूर्ववर्ती फिल्मों-जैसे ैंसंउ ठवउइंल!, ज्ीम छंउमेंाम और डवदेववद ॅमककपदहकृकी तरह संवेदनशीलता और दृश्यात्मक सौंदर्य बनाए रखती हैं, तो ‘अमरी’ भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित जीवनीपरक फिल्मों में शामिल हो सकती है।

अब थोड़ा अमृता के बारे में भी जानना जरूरी है। अमृता शेर-गिल को अक्सर ’’आधुनिक भारतीय चित्रकला की अग्रणी कलाकार’’ कहा जाता है। उन्होंने बहुत कम आयु में भारतीय कला को एक नई दृष्टि दी। यदि अमृता शेर-गिल का जीवन लंबा होता, तो संभवतः वे विश्व की महानतम आधुनिक चित्रकारों में और भी प्रमुख स्थान रखतीं।

उनका जन्म ’’30 जनवरी 1913’’ को बुडापेस्ट (हंगरी) में हुआ था। उनके पिता उमराव सिंह शेर-गिल मजीठिया एक सिख अभिजात परिवार से थे, जबकि उनकी माता मारी अन्तोआनेत गोट्समैन हंगरी से थीं। इस प्रकार अमृता बचपन से ही भारतीय और यूरोपीय-दोनों सांस्कृतिक परंपराओं के बीच पली-बढ़ीं।

किशोरावस्था में वे पेरिस गईं, जहाँ उन्होंने प्रसिद्ध कला संस्थान ’’र्बिंवसम कमे ठमंनÛ-।तजे’’ में औपचारिक प्रशिक्षण लिया। शुरुआती चित्रों पर यूरोपीय प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है, लेकिन भारत लौटने के बाद उनकी कला में बड़ा परिवर्तन आया। उन्होंने महसूस किया कि भारत की वास्तविक आत्मा राजमहलों में नहीं, बल्कि गाँवों, खेतों, श्रमिकों और विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बसती है।

उनकी प्रसिद्ध कृतियों में ’’ष्थ्री गर्ल्स (ज्ीतमम ळपतसे)ष्’’, ’’ब्राइड्स टॉयलेट (ठतपकमश्े ज्वपसमज)’’, ’’हिल वूमेन (भ्पसस ॅवउमद)’’, ’’साउथ इंडियन विलेजर्स गोइंग टू मार्केट’’ और ’’यंग गर्ल्स’’ शामिल हैं। इन चित्रों में भारतीय महिलाओं की गरिमा, मौन, संघर्ष और संवेदनाओं का अत्यंत गहरा चित्रण मिलता है। उस समय अधिकांश कलाकार राजसी या पौराणिक विषयों को चित्रित करते थे, जबकि अमृता ने साधारण भारतीय जनजीवन को अपनी कला का केंद्र बनाया।

उनकी शैली में यूरोपीय आधुनिकता और भारतीय परंपरा का अद्भुत संगम दिखाई देता है। उन पर पॉल गोगैं का प्रभाव था, लेकिन उन्होंने उसकी नकल नहीं की। उन्होंने भारतीय भित्तिचित्रों, विशेषकर अजंता गुफाएँ की रंग-संवेदना और भारतीय लोकजीवन को अपनी मौलिक शैली में रूपांतरित किया।

अमृता का निजी जीवन भी उतना ही चर्चित रहा जितनी उनकी कला। वे अपने समय की सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देने वाली स्वतंत्र विचारों की महिला थीं। उन्होंने अपने जीवन, संबंधों और कला के बारे में खुलकर लिखा और जिया। यही कारण है कि उन्हें केवल एक चित्रकार नहीं, बल्कि आधुनिक भारतीय स्त्री चेतना के शुरुआती प्रतीकों में भी गिना जाता है।

दुर्भाग्यवश, ’’5 दिसंबर 1941’’ को मात्र ’’28 वर्ष’’ की आयु में उनका निधन हो गया। उनकी मृत्यु का कारण आज भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है; विभिन्न ऐतिहासिक स्रोत अलग-अलग संभावनाओं का उल्लेख करते हैं, लेकिन कोई सर्वसम्मत निष्कर्ष नहीं है।

आज उनकी अधिकांश महत्वपूर्ण कृतियाँ राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय के संग्रह में सुरक्षित हैं। भारत सरकार ने उनकी कला को राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा दिया है, इसलिए उनकी मूल पेंटिंग्स का देश से बाहर निर्यात प्रतिबंधित है।

यही कारण है कि मीरा नायर की ’’अमरी’’ केवल एक कलाकार की जीवनी नहीं होगी। यह उस युवती की कहानी भी होगी जिसने पश्चिम में कला सीखी, लेकिन अपनी सृजनात्मक पहचान भारत की मिट्टी, उसके गाँवों और उसके लोगों में खोजी। यही खोज अमृता शेर-गिल को आधुनिक भारतीय कला के इतिहास में एक अद्वितीय स्थान दिलाती है।

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