राजेश श्रीवास्तव
नीट पेपर रद होने से चार छात्रों ने अपनी जान गंवा दी। 23 लाख छात्रों का भविष्य अधर में हैं और विपक्ष सरकार में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा मांग रहा है। लेकिन विपक्ष ने शायद कभी रक्षामंत्री रहे राजनाथ सिंह का बयान नहीं सुना कि हमारी सरकार में इस्तीफे नहीं होते, यह सब यूपीए सरकार में होता था, उनकी मानें, तो नैतिकता, उत्तरदायित्व और जवाबदेही यह सब यूपीए सरकार के बंधन थे।
राजग सरकार इन बंधनों से मुक्त है। हालांकि राजनाथ सिंह ने नीट मामले पर नहीं किसी दूसरे मुद्दे पर यह भाषण दिया था लेकिन तब शायद राजनाथ सिंह को यह नहीं पता था कि उनका यह भाषण उनकी ही सरकार में पत्थर की लकीर बन जायेगी, उनकी सरकार में मंत्री चाहे जिस स्तर पर नाकाम होंगे, न तो उनसे कोई सवाल किया जायेगा और न ही वह उत्तर देने के लिए बाध्य होंगे। तो फिर धर्मेंन्द्र प्रधान क्यों इस्तीफा दें. वह कह तो रहे हैं कि दोबारा परीक्षा होगी, फीस नहीं पड़ेगी और क्या कर दें। पिछली बार जो एनटीए का सर्वाेच्च अधिकारी था उसे तो पुरस्कार मिल चुका है. अब इस बार वाले की बारी है। उसे भी अहम पद मिलेगा, यह तय है। मोदी सरकार में अब तक 89 परीक्षा के पेपर लीक हो चुके हैं।
नीट यूजी में पेपर लीक कोई इकलौती घटना नहीं है। पुलिस भर्ती से लेकर बोर्ड परीक्षाओं तक कोई ऐसी परीक्षा नहीं, जिसका पेपर लीक होने से बचा हो। पिछले पांच साल में एक करोड़ से अधिक अभ्यर्थी इसके पीड़ित हैं। नीट यूजी 2024 के पेपर लीक मामले में बड़े पैमाने पर धरपकड़ जारी है लेकिन पेपर लीक का यह कोई इकलौता मामला नहीं है। पिछले कुछ साल में पेपर लीक और पेपर आउट जैसे शब्द अक्सर ही सुनने को मिलते रहे हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले पांच साल में यानी 2019 से जून 2024 के बीच कम से कम 65 बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं। ये वो मामले हैं, जिनमें या तो एफआईआर दर्ज हुई, गिरफ्तारियां हुई या परीक्षा ही रद्द कर दी गई। जिन बड़ी परीक्षाओं के पेपर पिछले पांच साल में लीक हुए हैं उसमें भारतीय सेना की भर्ती परीक्षा कॉमन एंट्रेंस एग्जाम 2023, सीटीईटी 2023, जेईई मेन्स 2021और नीट यूजी 2023 जैसी परीक्षाएं शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक पेपर साल 2021 में लीक हुए। उस साल 17 परीक्षाओं के पेपर आउट हुए। इसके बाद साल 2019 में नौ, 2020 में 12, 2022 में 11, 2023 में 12 और 2021 में अब तक पांच भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं। ये पेपर लीक के मामले देश के 19 राज्यों के हैं। आंकड़ों से यह भी पता चला कि सबसे ज्यादा पेपर लीक के आठ से ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश में हुए हैं। इसके बाद राजस्थान और महाराष्ट्र सात-सात मामलों के साथ दूसरे स्थान पर है।
बिहार में पेपर लीक के छह मामले, गुजरात व एमपी में 4-4 मामले हुए हैं। इसके अलावा हरियाणा, कर्नाटक, ओडिशा और बंगाल में स्कैम के तीन-तीन केस सामने आए हैं। वहीं, दिल्ली, मणिपुर और तेलंगाना में दो-दो घटनाएं दर्ज की गई। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, झारखंड और नागालैंड में पेपर लीक के एक-एक केस सामने आए हैं। यह आंकड़ा जनवरी 2019 से 25 जून 2024 के बीच के हैं।
अब बात अगर एनटीए की की जाये तो 2017 में परीक्षाएं कराने के लिए गठित हुए एनटीए ने मात्र 9 साल में अपना अस्तित्व ही बदल लिया है। अब लोग एनटीए को श्नेवर टह्नस्ट एजेंसी’ के रूप में जानने लगे हैं। 2017 में एनटीए के गठन के बाद से संस्था किसी न किसी पेपर लीक या परीक्षा रद्द करने के लिए चर्चा में रहती है। शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, 2018 से 2024 तक एनटीए ने 16 बड़ी परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। इसी कड़ी में ताजा मामला नीट यूजी-2026 का पेपर कैंसिल होना है। यानी एनटीए की नाकामी पर एक दाग और लग गया है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नवंबर 2017 में एनटीए के गठन को मंजूरी दी थी। इसका मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिले के लिए होने वाली परीक्षाओं को पारदर्शी और कुशलतापूर्वक आयोजित करना था। आज यह संस्था जेईई (मेन), नीट-यूजी, सीयूईटी-यूजी, यूजीसी-नेट और सीएसआईआर-नेट जैसी तमाम राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं कराती है। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब एनटीए की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठी हैं। 2017 में अपने गठन के बाद से यह एजेंसी कई बार विवादों का केंद्र रही है। एनटीए का गठन 2017 के अंत में हुआ था लेकिन उसने 2018 से परीक्षाएं आयोजित करनी शुरू कीं। जुलाई 2024 को संसद में शिक्षा मंत्रालय की दी गई जानकारी के मुताबिक, 2018 से 2024 तक एनटीए कम से कम 16 बड़ी परीक्षाओं को स्थगित कर चुका है। इनमें से कई परीक्षाएं कोविड-19 महामारी, प्रशासनिक या तकनीकी कारणों से स्थगित की गई थीं, लेकिन बीते सालों में पेपर लीक और अनियमितताओं की वजह से परीक्षाएं रद्द होने की घटनाएं ज्यादा चर्चा में रही हैं।
2024 में एनटीए ने मात्र 29 परीक्षाएं आयोजित कीं, जो 2019 के बाद सबसे कम थीं। परीक्षार्थियों की संख्या में भी भारी गिरावट देखी गई, जो 2023 के 1.33 करोड़ से घटकर 2024 में 85.78 लाख रह गई। 2025 में एनटीए के कामकाज में सुधार की बजाय, समस्याएं जारी रहीं ।एनटीए की विफलता सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कई आयाम हैं। पेपर लीक और भ्रष्टाचार सबसे गंभीर आरोप है, जो छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। 2024 के नीट यूजी मामले में झारखंड के हजारीबाग और बिहार के पटना से पेपर की तस्वीरें खींचकर व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म के जरिए सर्कुलेट किया गया था।
कुछ उम्मीदवारों ने 30-50 लाख रुपये तक चुकाकर पेपर खरीदने की बात स्वीकार की थी। अब 2026 में भी इसी तरह के आरोप सामने आए हैं। 2024 में यूजीसी-नेट परीक्षा रद्द करनी पड़ी, सीएसआईआर-नेट स्थगित हुई और नीट यूजी का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. इसके बाद भी 2026 में फिर से वही स्थिति पैदा होना एनटीए की तैयारियों और सुरक्षा इंतजामों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
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