AI के दौर में भी MBA की चमक बरकरार, नियोक्ताओं का भरोसा कायम

AI के दौर में भी MBA की चमक बरकरार, नियोक्ताओं का भरोसा कायम

नयी दिल्ली/ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच यह आशंका लगातार जताई जा रही है कि प्रबंधन शिक्षा, विशेषकर एमबीए जैसी डिग्रियों की उपयोगिता भविष्य में कम हो सकती है। हालांकि, दुनिया भर के नियोक्ताओं की राय इससे अलग है। वैश्विक स्तर पर किए गए एक नए सर्वेक्षण से स्पष्ट हुआ है कि कंपनियों का एमबीए डिग्रीधारकों पर भरोसा आज भी मजबूत बना हुआ है और आने वाले समय में भी उनकी मांग बनी रहने की संभावना है।

यह निष्कर्ष ‘ग्रेजुएट मैनेजमेंट एडमिशन काउंसिल’ (जीएमएसी) की वार्षिक ग्लोबल कॉर्पाेरेट रिक्रूटर्स सर्वे रिपोर्ट में सामने आया है। जीएमएसी वही अंतरराष्ट्रीय संस्था है जो ग्रेजुएट मैनेजमेंट एडमिशन टेस्ट (जीमैट) का संचालन करती है और दुनिया के प्रमुख बिजनेस स्कूलों के साथ मिलकर प्रबंधन शिक्षा से जुड़े वैश्विक रुझानों का अध्ययन करती है।

रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश वैश्विक नियोक्ताओं ने इस वर्ष भी एमबीए स्नातकों की भर्ती करने की योजना जताई है। कई कंपनियों ने संकेत दिया कि वे पिछले वर्ष के बराबर या उससे अधिक संख्या में एमबीए पेशेवरों को नियुक्त करना चाहती हैं। नियोक्ताओं का मानना है कि एआई भले ही डेटा विश्लेषण, स्वचालन और दोहराए जाने वाले कार्यों को अधिक कुशल बना रहा हो, लेकिन नेतृत्व क्षमता, रणनीतिक सोच, जटिल व्यावसायिक निर्णय, संकट प्रबंधन और टीम संचालन जैसे क्षेत्रों में मानवीय कौशल की आवश्यकता पहले की तरह बनी हुई है।

रिपोर्ट बताती है कि आज के कॉर्पाेरेट जगत में केवल प्रबंधन की पारंपरिक समझ पर्याप्त नहीं है। कंपनियां ऐसे एमबीए स्नातकों को प्राथमिकता दे रही हैं जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल तकनीकों को समझते हों तथा उन्हें व्यावसायिक रणनीति और निर्णय प्रक्रिया में प्रभावी ढंग से इस्तेमाल कर सकें। दूसरे शब्दों में, एआई अब प्रबंधन शिक्षा का विकल्प नहीं बल्कि उसका एक अनिवार्य सहयोगी बनता जा रहा है।

सर्वेक्षण में शामिल नियोक्ताओं ने जिन क्षमताओं को सबसे अधिक महत्व दिया, उनमें समस्या समाधान, रणनीतिक सोच, प्रभावी संचार, नेतृत्व क्षमता, परिवर्तन के अनुरूप स्वयं को ढालने की योग्यता तथा डेटा-आधारित निर्णय लेने की दक्षता प्रमुख हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यही वे गुण हैं जिन्हें एआई पूरी तरह प्रतिस्थापित नहीं कर सकता।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि एमबीए स्नातकों का शुरुआती वेतन अब भी सामान्य स्नातकों और कई अन्य स्नातकोत्तर डिग्रीधारकों की तुलना में अधिक बना हुआ है। इससे स्पष्ट होता है कि उद्योग जगत प्रबंधन शिक्षा को निवेश के रूप में देखता है और उसके आर्थिक मूल्य को स्वीकार करता है।

भारत सहित एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भी एमबीए पेशेवरों की मांग मजबूत बनी हुई है। विशेष रूप से परामर्श, वित्तीय सेवाओं, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित प्रबंधन विशेषज्ञों के लिए अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। डिजिटल परिवर्तन और एआई आधारित कारोबारी मॉडल के विस्तार के साथ ऐसे पेशेवरों की मांग और बढ़ने की संभावना जताई गई है, जो तकनीकी समझ के साथ व्यावसायिक नेतृत्व भी प्रदान कर सकें।

रिपोर्ट का समग्र निष्कर्ष यह है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता रोजगार बाजार की प्रकृति अवश्य बदल रही है, लेकिन प्रबंधन शिक्षा की आवश्यकता समाप्त नहीं कर रही। भविष्य के सफल प्रबंधक वे होंगे जो एआई की क्षमताओं का प्रभावी उपयोग करते हुए मानवीय नेतृत्व, नवाचार, नैतिक निर्णय और दीर्घकालिक व्यावसायिक दृष्टि का संतुलन स्थापित कर सकें। ऐसे में, बदलते तकनीकी दौर में एमबीए की भूमिका समाप्त होने के बजाय और अधिक विकसित तथा बहुआयामी होती दिखाई दे रही है।

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