सुभाष शिरढोनकर
1980 के दशक के उत्तरार्ध में भारतीय सिनेमा में वैनिटी वैन कल्चर का आगमन मनोरंजन उद्योग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ जिसने सिने एक्टर्स की कार्यक्षमता को पूरी तरह बदल कर रख दिया।
वैनिटी वेन के आगमन से पहले एक्टर्स को, खासकर आउटडोर शूटिंग के दौरान काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। पेड़ों के पीछे या फिर टेंट में जाकर या स्थानीय लोगों के घरों में जाकर कॉस्टयूम चेंज करना पड़ता था लेकिन वैनिटी वैन के आने के बाद इस तरह की तमाम मुश्किलें पूरी तरह खत्म हो गईं।
एक्ट्रेस पूनम ढिल्लन को भारत में वैनिटी वैन का जनक माना जाता है। पूनम ने व्यवसायिक रूप से वैनिटी वैन के निर्माण और इसे किराए पर देने के बिजनेस की शुरुआत की।
हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान पूनम ने बताया कि भारत से बहुत पहले पश्चिमी देशों में यह कल्चर स्थापित हो चुका था। 1920 और 30 के दशक से ही हॉलीवुड में ‘ट्रोलर’ या ‘मोटरहोम्स’ का उपयोग होने लगा था। शूटिंग के दौरान सितारे इन्हीं में आराम करते थे।
ब्रिटेन और फ्रांस के फिल्म उद्योगों में भी द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से ‘मोबाइल ड्रेसिंग रूम्स’ का चलन शुरू हो गया था। इसका कारण विदेशी लोकेशंस और कड़ाके की ठंड में कलाकारों को कपड़े बदलने और मेकअप करने के लिए पोर्टेबल सुविधाओं की सख्त जरूरत होती थी।
पूनम ने बताया कि एक बार वह यू एस में अपने फ्रेंड की फिल्म की शूटिंग पर गई थी जो वहां पर इंटरटनेशनल फिल्म बनाते हैं। वहां शूटिंग लोकेशन पर पहली बार उन्होंने एक ब्यूटीफूल केयरवैन देखी जिसमें वेल फर्निश्ड बेडरूम, फ्रिज और डाइनिंग टेबल की व्यवस्था थी ।
पूनम ने जब अपने मित्र से इस बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि ये केयरवैन आउटडोर शूटिंग पर आती है। इसके बाद पूनम ने इंडिया आकर इसी तरह की वैन बनाने की ठान ली।
पूनम ने अपनी कार्य योजना को मूर्त रूप देते हुए पहली वेनिटी वैन तैयार की। जो कुछ उन्होंने यूएस में देखा, वे सारे इंतजामात उन्होंने अपनी वेनिटी में किए। इंटीरियर पूरा होने के बाद जब पूनम ने उसे रजिस्ट्रेशन के लिए भेजा, तब सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि इस तरह की वैन के रजिस्ट्रेशन की कोई केटेगरी नहीं थी।
महाराष्ट्र के क्षेत्रीय परिवहन विभाग को समझ में नहीं आ रहा था कि इसे कमर्शियल, नॉन कमर्शियल, ट्रक या कार किस केटेगरी में इसे रजिस्टर्ड किया जाये। महीनों तक परिवहन विभाग में इसके क्लीयरेंस पर माथा पच्ची के बाद इसे स्पेशल केटेगरी में श्वेनिटी वैन श् नाम दिया गया। इस तरह पहली वेनिटी वैन का आगमन हुआ।
धीरे धीरे पूनम ने 1 से 2, 2 से 4 वेनिटी वैन बना लीं और किराये पर देने की शुरूआत की लेकिन इसकी डिमांड लगातार बढती ही गई। ऐसे में दूसरे प्रोडक्शन हाउस और कुछ स्टार्स ने अपनी निजी वेनिटी वैन बनाना शुरू कर दिया।
साल 1987-88 के आसपास अमिताभ बच्चन जब एक फिल्म की शूटिंग कर रहे थे, तब उन्हें धूप और भीड़ से बचने के लिए एक निजी स्थान की आवश्यकता महसूस हुई। उस वक्त उन्होंने अपनी पहली वैनिटी वैन विशेष रूप से डिजाइन करवाई ।
अमिताभ बच्चन की तरह आजकल शाहरुख खान, सलमान खान और अल्लू अर्जुन जैसे सितारों की वैनिटी वैन की कीमत करोड़ों में है जो विशेष रूप से उनकी पसंद के अनुसार कस्टमाइज की गई हैं।
मशहूर डिजाइनर दिलीप छाबड़िया व्दारा शाहरुख खान के लिए डिजाइन की गई वैनिटी वैन भारत की सबसे महंगी वैन में से एक मानी जाती है जिसकी कीमत लगभग 5 करोड़ के आसपास है। इसमें जिम, हाई-एंड टेक गैजेट्स और पारभासी कांच का फर्श है।
साउथ सिनेमा के सुपरस्टार अल्लू अर्जुन के पास श्फाल्कनश् नाम की बेहद शानदार वैनिटी वैन है। इसका इंटीरियर पूरी तरह से ब्लैक, सिल्वर और व्हाइट थीम पर है और इसकी लाइटिंग इसे किसी स्पेसशिप जैसा लुक देती है।
भारतीय सिनेमा में वैनिटी वैन अब केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि एक श्स्टेटस सिंबलश् बन चुकी है। आज के समय में लगभग हर बड़े स्टार के पास अपनी कस्टमाइज्ड वैनिटी वैन है जो उनके लग्जरी घरों से भी अधिक महंगी और हाई-टेक हैं।
यश राज फिल्म्स, धर्मा प्रोडक्शन्स और रेड चिलीज एंटरटेनमेंट जैसे बड़े प्रोडक्शन हाउस अपनी फिल्मों की शूटिंग के दौरान सुचारू कामकाज के लिए अपनी खुद की वेंस रखते हैं या उन्हें लंबे समय के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर लेते हैं।
आलेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं। इससे जनलेख प्रबंधन का कोई सरोकार नहीं है।
