बाबूलाल को सर्वमान्य नेता के रूप में सहमति बनाने की कवायद

बाबूलाल को सर्वमान्य नेता के रूप में सहमति बनाने की कवायद

गौतम चौधरी 

संघ यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री 2024 विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री का चेहरा हो सकते हैं। दरअसल, इन दिनों बाबूलाल नियमित रूप से प्रदेश पार्टी मुख्यालय पर बैठ रहे हैं और सांगठनिक कार्यों में अभिरूचि भी ले रहे हैं। बता दें कि अपनी खोई साख को फिर से प्राप्त करने के लिए भारतीय जनता पार्टी इन दिनों अपने आप को वाॅर्मअप करने में जुट गयी है। इस वाॅर्मअप के नेता, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी को बनाया गया है। इन दिनों बाबूलाल, भाजपा के सांगठनिक गतिविधियोें में न केवल रूचि ले रहे हैं, अपितु पर्टी उनके उपर विश्वास भी जता रही है। पार्टी नेतृत्व उन्हें सर्वस्वीकर्य नेता के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश प्रारंभ कर दी है। इसका एक नमूना इन दिनों देखने को मिल रहा है। प्रदेश भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जानेे वाला प्रशिक्षण कार्यक्रम के अगुआ नेता के रूप में बाबूलाल मरांडी ने ही मोर्चा संभाला है।

बता दें कि भारतीय जनता पार्टी में सांगठनिक गतिविधियों के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वारा भेजे गए महामंत्री संगठन अधिकृत होते हैं। पार्टी में संगठन मंत्री की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। केन्द्रीय समिति से लेकर प्रांतीय समितियों तक संगठन मंत्री का पद भाजपा का महत्वपूर्ण पद माना जाता है। झारखंड में यह पद, मूल रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विजनौर के रहने वाले आरएसएस के प्रचारक धर्मपाल सिंह के पास हैं। धर्मपाल सिंह, विगत कुछ दिनों से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनव के सिलसिले में बाराणसी में हैं। तातकालिक रूप से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुुनाव को लेकर धर्मपाल सिंह को पूरे काशी क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी गयी है। भाजपा की दृष्टि से काशी को अलग प्रांत का दर्जा प्राप्त है। इस प्रांत में कुल 71 विधानसभा क्षेत्र हैं और धर्मपाल सिंह इन विधानसभाओं के सांगठनिक प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। पार्टी सूत्रों की मानें तो धर्मपाल अब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद ही रांची लौटेंगे। उनकी अनुपस्थिति में अघोषित रूप से संगठन के सांगठनिक कार्यक्रमों की पूरी जिम्मेदारी संघ के प्रचार रहे और प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बबूलाल मरांडी के उपर है।

भाजपा कैडरबेस पार्टी है। अपने कैडरों को सिद्धांत एवं कार्यपद्धतियों की मुकम्मल जानकारी के लिए भाजपा मंडल से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक प्रशिक्षण शिविर लगाती है। इन दिनों झारखंड में सभी स्तरों पर प्रशिक्षण के कार्यक्रम किए जा रहे हैं। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के दो पूर्व पूर्णकालिक कार्यकर्ता, सुमन कुमार एवं पंकज सिंहा को लगाया गया है। इन्हों दोनों के नेतृृत्व में पूरे प्र्रदेश का प्रशिक्षण चल रहा है। प्रशिक्षण के मामले में पंकज सिंहा ने बताया कि अभी तक 1500 से अधिक कार्यकर्तओं का प्रशिक्षण किया जा चुका है। सिंहा ने बताया कि सुमन कुमार इस कार्यक्रम की योजना बना रहे हैं और उसके कृयान्वयन के लिए पूरी टीम बनाई गयी है। सिंहा ने बताया कि प्रदेश के लगभग सभी 512 मंडलों के महत्वपूर्ण कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण किया जा चुका है। अब जिलासह प्रशिक्षण चल रहा है। सिंहा ने कहा कि 10-12 जिलों के कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण किया जा चुका है, शेष जिलों का प्रशिक्षण बांकी है। उन्होंने कहा कि 26 दिसंबर तक प्रदेश के सभी स्तर के कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण होना सूनिश्चित किया गया है।

प्रदेश प्रशिक्षण के सह प्रभारी सुमन कुमार ने बताया कि ऐसे प्रशिक्षण के लिए 50 वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की सूची बनाई गयी है लेकिन बाबूलाल जी का उपयोग ज्यादा से ज्यादा किया जा रहा है। चूकि बाबूलाल जी को संगठन और सिद्धांत दोनों की गहरी जानकारी है इसलिए इनका उपयोग हम ज्यादा करना चाहते हैं।

प्रशिक्षण के कार्य में बाबूलाल मरांडी की रूचि और भूमिका से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आगामी दिनों में भाजपा के सहज वैचारिक नेता बाबूलाल ही होंगे, जिन्हें पार्टी मुख्यमंत्री का चेहरा प्रस्तुत कर सकती है। यही नहीं प्रदेश नेतृत्व बाबूलाल मरांडी को सहज और स्वीकार्य नेता केे रूप में प्रस्तुत करने लगी है। हालांकि चर्चा यह भी है कि आगमी मुख्यमंत्री के रूप में युवा जनजातीय नेता एवं राज्यसभा के सदस्य समीर उरांव को प्रस्तुत किया जा सकता है लेकिन चूकि बाबूलाल अनुभवी हैं और संघ चिंतन के सहज नेता हैं इसलिए भाजपा फिलहाल बाबूलाल को चेहरे पर ही अपना ध्यान केन्द्रित कर रही है।

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