CITU की वर्चुअल मीटिंग में बनी केन्द्र सरकार के खिलाफ मोर्चेबंदी योजना

CITU की वर्चुअल मीटिंग में बनी केन्द्र सरकार के खिलाफ मोर्चेबंदी योजना

रांची/ सेंटर आफ इंडियन ट्रेड यूनियनंस (सीटू) ने कोरोना के दुसरे तुफान में राहत, मेहनतकशों की जीविका पर संकट और सभी का टीकाकरण किए जाने के मुद्दे पर तीन कार्यभार तय किया है।

इस संदर्भ में संगठन के महासचिव प्रकाश विप्लव ने बताया कि सीटू सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर करने और कोरोना से प्रभावित लोगों को राहत देने, लाकडाउन से उत्पन्न मेहनतकशों को जीविका के संकट से उबारने और सार्वभौम टीकाकरण के लिए व्यापक अभियान चलायेगी। इसका निर्णय आज सीटू राज्य कमिटी की आनलाइन संपन्न बैठक मे लिया गया। बैठक मे सीटू के अखिल भारतीय महासचिव तपन सेन भी वर्चुअल रूप से शामिल हुए।

मौके पर तपन सेन ने कहा की कोरोना महामारी के दूसरे भयानक दौर के खतरे से निपटने की तैयारियों के प्रति मोदी सरकार की निष्क्रियता एक आपराधिक कारनामा है क्यों कि सरकार ने एक साल का समय रहने के बावजूद इस मौत के तुफान से निपटने की कोई कार्य योजना नहीं बनायी। जिसके कारण आक्सीजन, जीवन रक्षक उपकरण और जरूरी दवाइयों की भारी कमी के चलते हजारों लोग मौत के शिकार हुए।

उन्होंने कहा कि अभी भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। सेन ने कहा कि केंद्रीय बजट मे सभी नागरिकों का टीकाकरण के लिए 32 हजार करोड़ रूपये रखे जाने के बावजूद केंद्र सरकार अब अपने हाथ खड़े कर कर रही है और टीकाकरण का सारा बोझ राज्य सरकारों पर फेंकने की तैयारी कर रही है। 18 से 45 साल के सभी लोगों को टीका दिए जाने की धीमी गति टीकाकरण के लंबे और कई सालों तक चलने वाले परियोजना का खाका पेश कर रही है। इसलिए सभी को वैक्सीन उपलब्ध हो इस मांग को जोरदार तरीके से उठाया जाना चाहिए।

सीटू राज्य कमिटी का यह मानना है कि एक ओर केंद्र सरकार कोविड-19 के महामारी के दुसरे वेभ के खतरे के प्रति उदासीन रही और दूसरी ओर भाजपा-आरएसएस से जुड़े लोग इस महामारी से बचने के लिए गौ मूत्र- गोबर चिकित्सा की वकालत करने का काम शुरू कर दिया है। यह उनके अवैज्ञानिक सोच को ही दर्शाता है। इस बीच महामारी के अवसर का लाभ उठाकर मोदी सरकार ने अपने कार्पोरेट आकाओं को खुश करने का एजेंडा बढ़ाने के काम मेऔर तेजी ही ला रही है।

सेन ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के कल-कारखानों और उधमो को बेचने का सिलसिला जारी है जिसका ताजा उदाहरण आईडीबीआई बैंक की बिक्री का है पहले तो घाटे मे चलने वाले इस बैंक को भारतीय जीवन बीमा निगम के हवाले किया गया जिसपर एलआईसी ने हजारों करोड़ रूपये निवेश किए और जब बैंक घाटे से उबर गया तो मोदी सरकार इसे बेच रही है।

कोविड महामारी के समय पूरे देश के लोगों ने देखा कि कैसे हमारे सार्वजनिक क्षेत्र के उधमो और स्टील प्लांटों ने औधोगिक कार्यों के लिए बनाए जा रहे आक्सीजन को मेडिकल उपयोग के लिए तब्दील कर लाखों लोगों की जान बचाने का काम किया। उसी प्रकार यदि टीका बनाने वाले हमारे सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठित उधमो को मदद दी जाय तो हम स्वयं बड़ी मात्रा मे टीका का उत्पादन कर सकते हैं लेकिन मोदी सरकार ने टीका उत्पादन की सभी जिम्मेदारी नीजि क्षेत्र को सौंप दिया है ताकि उनके आकाओं के मुनाफे के हितों की रक्षा हो सके।

बैठक का विवरण प्रेषित करते हुए विप्लव ने बताया कि इस पृष्ठभूमि मे सीटू ने मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जनता के बीच लगातार अभियान चलाए जाने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में 26 मई को किसानों के साथ देशव्यापी काला दिवस आयोजित करने, 30 मई को सीटू की स्थापना की 51 वीं वर्षगांठ के अवसर पर बड़े पैमाने पर मजदूरों के घरों बस्तियों, कालोनियों और कार्यस्थलों पर सीटू का झंडा फहराने तथा 1 जुन से 10 जुन तक ज्वंलत और तात्कालिक मुद्दों से संबंधित 14 सूत्री मांगपत्र पर सघन प्रचार अभियान चलाकर इस मांगपत्र को स्थानीय प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री को भेजा जाएगा।

राज्य कमिटी बैठक मे कोयला, इस्पात, कापर, भारी अभियंत्रण, फार्मा, निर्माण, परिवहन, स्कीम वर्कर समेत विभिन्न सेक्टरों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक की अध्यक्षता भवन सिंह ने की।

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