कोविड – 19 : वैज्ञानिकों के विरोधाभासी दावे और भ्रमित जनमानस

कोविड – 19 : वैज्ञानिकों के विरोधाभासी दावे और भ्रमित जनमानस

डाॅ. अरविंद मिश्रा

किसी भी बात पर अतिरिक्त जोर देना हो तो कह दिया जाता है कि ‘साईंटिफिकली प्रूव्ड’ है, वैज्ञानिकों द्वारा प्रमाणित है मगर मौजूदा कोविड महामारी ने इस जुमले को दरकिनार कर दिया है। यहां वैज्ञानिकों के बीच अब इतने मतभेद हैं कि सही क्या है और गलत क्या है, इसका निर्णय नहीं हो पा रहा है। आम जन पशोपेश में है, भ्रमित है। लम्बे समय से सरकारी नेतृत्व के साथ भी सही संदेशों के प्रसार न कर पाने की वैश्विक समस्या बनी हुई है। कुछ उदाहरणों से बात स्पष्ट हो जाएगी।

एक माह पहले वैज्ञानिकों के दावे थे कि तमाम सतहें, डायनिंग टेबल, दरवाजे की घुंडी, बिजली स्विच, पालीथीन पैकेट, स्टील आदि सभी पर कोरोना वायरस कुछ घंटों से कई दिन तक सक्रिय बने रह सकते हैं मगर अब इन ‘फोमाईट्स‘ से संक्रमण का खतरा कम होने का दावा सेन्टर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एन्ड प्रिवेंशन (सीडीसी) की ओर से किया गया है जो अमेरिका की एक विश्वसनीय और सम्मानित संस्था है। अपने वेबसाइट, ‘हाऊ कोविड – 19 स्प्रेड्स‘ में इसने स्पष्ट किया है कि सार्स सीओवी – 2 वायरस सहजता से लोगों के आपसी निकटता या संपर्क से ही फैलता है।

सीडीसी का कहना है कि फोमाईट्स नए कोरोना के फैलने का मुख्य स्रोत नहीं है। अब पता नहीं यह कहां तक सच है, इसलिए फिलहाल कुछ महीनों तक इस वायरस से हर पल आगाह रहने की जरुरत है। डब्ल्यू एच ओ तो गहरे विवादों के घेरे में है। शुरु में इसका दावा था कि आदमी से आदमी के बीच संक्रमण नहीं होता। फिर अपने इस दावे से कुछ दिनों में मुकर गया। तब तक यह साबित हो गया था कि यह एक महाछूत का रोग है। ऐसे ही अब तक डब्ल्यू एच ओ का दावा रहा है कि संक्रमण लक्षणहीन संक्रमितों से फैल रहा है जो इसके प्रसार को रोकने में कठिनाई उत्पन्न कर रहा है। इसलिए ही सोशल डिस्टेसिंग, मास्क धारण आदि पर विशेष बल दिया गया है मगर अब डब्ल्यू एच ओ की तकनीकी मुखिया मारिया वैन केर्खोव ने विगत आठ जून को एक अलग ही वक्तव्य दे डाला। एक प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा कि सार्स सीओवी 2 का संक्रमण लक्षणहीनों से फैलना ‘वेरी रेयर‘ है।

मारिया वैन कार्खोव ने कहा कि संक्रमण मुख्यतः संक्रमित लक्षण वालों से ही फैल रहा है जबकि इसके पहले स्क्रिप्स रिसर्च ट्रांसलेशनल इन्स्टीच्यूट ने एक शोधपत्रा में दावा किया है कि लक्षणहीनों से 45 प्रतिशत तक कोरोनावायरस के मामले सामने आए हैं। इस इन्स्टीच्यूट के डायरेक्टर डा. इरिक टोपाल ने डब्ल्यू एच ओ के दावे का खंडन किया है। वाशिंगटन विश्वविद्यालय के जैविकीविद कार्ल बर्गस्ट्राम ने भी डब्ल्यू एच ओ के दावे को सही नहीं माना है।

आखिर लक्षणविहीन ( एसिम्प्टोमैटिक) की परिभाषा क्या है? मान लीजिए कोई पांच दिन लक्षणविहीन है और छठवें दिन लक्षणधारी हो जाता है तो उसे किस श्रेणी में रखेंगे, इसलिए यह एक अलग रोगी श्रेणी हो गई – प्री सिम्प्टोमैटिक। मतलब सिम्प्टोमैटिक, एसिम्प्टोमैटिक और प्री सिम्प्टोमैटिक। अब इन प्री सिम्प्टोमैटिक से तो सावधान रहना ही होगा जो पांच दिन पहले से ही वायरस संक्रमण फैला रहे होंगें, इसलिए इस नजरिए से भी मास्क पहनने और अन्य सावधानियां बरती जानी चाहिए।

इन सभी दृृष्टान्तों से यही मानना सुरक्षित रहेगा कि इस महामारी से बचाव और सुरक्षा के प्रति मुस्तैद रहना है क्योंकि चूक की भारी कीमत हमें उठानी पड़ सकती है। अभी भी यह वायरस कम से कम भारत में तो उग्र रुप में है जिससे हमंे सोशल डिस्टेसिंग, साबुन या सैनिटाइजर से हैंड रब, मास्क धारण ही बचा सकता है। इन तमाम पारस्परिक विरोधी दावों से भ्रमित नहीं होना है।

(अदिति)

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