शिक्षा का वैश्वीकरण और बदलते स्वरूप

शिक्षा का वैश्वीकरण और बदलते स्वरूप

पुष्पेश कुमार पुष्प

आज के इस डिजिटल युग में जहां हर काम डिजिटल होता जा रहा है तो शिक्षा का क्षेत्रा इससे कैसे अछूता रहता। वैसे भी हमारी शिक्षा व्यवस्था में हाल के वर्षों में काफी बदलाव हुआ है। एक समय था जब हम ऑफलाइन शिक्षा पर आश्रित थे। फिर धीरे – धीरे ऑनलाइन शिक्षा का पादुर्भाव हुआ, जो केवल बड़े – बड़े शहरों तक सीमित था। लेकिन इस कोरोना काल में इस शिक्षा से छात्रा जुड़ते चले गये। लॉकडाउन में जब सारे शिक्षण संस्थान बंद थे और छात्रों की पढ़ाई बाधित होने के कगार पर थी। तब ऐसे समय में विकल्प के रूप में ऑनलाइन शिक्षा ने उनकी शिक्षा को बाधित होने नहीं दिया। इस प्रकार हमारी शिक्षा पद्धति भी डिजिटल हो गयी। ऑनलाइन शिक्षा पद्धति ने घर बैठे बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में कोई व्यवधान उत्पन्न नहीं होने दिया। घर बैठे बच्चे शिक्षा सहित तकनीक से भी रूबरू होते रहे।

बढ़ते तकनीक के प्रयोग ने हमारे बच्चों को भी इस क्षेत्रा में सबल बना दिया। इंटरनेट के इस्तेमाल से बच्चों ने नई – नई जानकारियां प्राप्त कीं, तो वही शिक्षकों ने लॉक डाउन में पढ़ाने का नया तरीका ढूंढ़ लिया। ऑनलाइन शिक्षा से ग्रामीण क्षेत्रा के बच्चे जरूर वंचित हो गये। वैसे ग्रामीण क्षेत्रा जहां बेहतर इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध नहीं है। वे आज भी ऑफलाइन शिक्षा प्राप्त कर रहंे हैं या उसकी आस में बैठे हैं। वैसे भी ऑनलाइन शिक्षा सबके बूते की बात नहीं है।

ऑनलाइन शिक्षा पद्धति और ऑफलाइन शिक्षा पद्धति में काफी अंतर है। ऑफलाइन शिक्षा पद्धति जहां बच्चों को नैतिकता और व्यवहारिकता ज्ञान कराता है, वही ऑनलाइन शिक्षा पद्धति में इसका अभाव साफ झलकता है। ऑनलाइन शिक्षा पद्धति में अनुशासन का भी पूर्ण अभाव है, तो इस शिक्षा पद्धति से बच्चे पूर्णतः संतुष्ट भी नहीं हो पाते। शिक्षक – छात्रा में सामंजस्य होना चाहिए, वो ऑनलाइन शिक्षा पद्धति में नहीं है। यही कारण है कि बच्चे आसानी से शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाते क्योंकि उन्हें समझने के लिए कम समय जो मिलता है ?

छात्रा जब समूह में पढ़ता है तो उनमें प्रतिस्पर्धा की भावना जागती है। ऑनलाइन शिक्षा में प्रतिस्पर्धा की भावना तो कहीं दिखती ही नहीं। ऑनलाइन शिक्षा उन बच्चों के लिए ही बेहतर है जो बुद्धिमान और परिपक्व हैं। बाकी बच्चे तो कुछ समझ ही नहीं पाते। यह सही है कि आज हर क्षेत्रा में टेक्नोलॉजी का धड़ेल्ले से प्रयोग हो रहा है। वैसे में हमारे बच्चे भी इस क्षेत्रा में अब पीछे नहीं रहे। वे भी इस तकनीक का प्रयोग कर संचार माध्यम से अपनी समस्याओं का समाधान स्वयं कर रहे हैं।

लेकिन मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर के अधिक प्रयोग से बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। वे बच्चे इनके आदि होते जा रहे हैं और वे इस सुविधा का दुरूपयोग भी करते हैं। शिक्षा का सही माध्यम तो ऑफलाइन शिक्षा ही है। भले ही आज के बदलते परिवेश में ऑनलाइन शिक्षा पद्धति का विस्तार तीव्रगति से हो रहा है लेकिन यह शिक्षा का उचित माध्यम नहीं हो सकता। इस कोरोना काल में ऑनलाइन शिक्षा पद्धति बेहतर विकल्प के रूप में जरूर उभरा पर सब बच्चे इस शिक्षा का लाभ न ले सके। काफी सारे बच्चे तो इस शिक्षा से वंचित रह गये। ऑनलाइन शिक्षा न तो सार्थक है और न निरर्थक लेकिन इस कोरोना काल में शिक्षा का बेहतर माध्यम जरूर बना।

(अदिति)

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