कोरोना काल के भांति-भांति के नुस्खे, औषधियां व तकनीकी जुगाड़

कोरोना काल के भांति-भांति के नुस्खे, औषधियां व तकनीकी जुगाड़

अशोक “प्रवृद्ध”

कोरोना महामारी के इस काल में भारत में तरह -तरह के नुस्खे, विभिन्न प्रकार की औषधियां, अनेक जुगाड़ तकनीकियां आजमाई जा रही हैं। कोरोना संक्रमण से बचाव और इम्युनिटी बढ़ाने के लिए भांति- भांति के पारम्परिक प्रयोग किए जाने की खबरें नित्य ही दृृश्य- श्रव्य माध्यमों की सुर्खियाँ बन रही हैं। कोरोना के इलाज में बगैर जांचे- परखे अपनाए जा रहे नुस्खों आदि से सम्भावित खतरे के प्रति चिकित्सकों के आगाह किये जाने की खबरों के मध्य लोगों का कहना है कि कोरोना वायरस का इलाज आयुर्वेद में है और जड़ी- बूटियों, वनौषधियों से उसके संक्रमण को दूर किया जा सकता है।

कोविड 19 का इलाज सुझाते इन विषयों पर भले ही किसी ने कोई ध्यान न दिया और इन सुझाए जा रही विधियों पर अनुसन्धान किये जाने के सम्बन्ध में कोई नहीं सोच रहा, फिर भी देश भर से अनेक वैद्यों ने संचार माध्यमों में इस वायरस से होने वाली बीमारी के लिए जड़ी बूटियों से इलाज का दावा किया है। इन दिनों सामुदायिक संचार माध्यमों अर्थात सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर कोरोना से बचाव की विभिन्न आयुर्वेदीय औषधियों, पारम्परिक प्रक्रियाओं, स्थानीय उपलब्ध वनौषधियों के प्रयोग और उनसे प्राप्त होने वाली चिकित्सीय लाभ सम्बन्धी विवरणियों के साथ ही शरीर में गिरते आक्सीजन लेवल को बढ़ाने तक के तरीके बताते घरेलू नुस्खों की बाढ़ आई हुई है। जड़ी-बूटी, गिलोय, अदरक-तुलसी या अदरक-शहद-नींबू से निर्मित गर्म चाय खांसी को नियंत्रित, सांस के अंगों को स्वस्थ, वजन कम करने और इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक व प्रचलन में होने से इनके सेवन की बात तो भारत में आम है परन्तु झारखण्ड, उत्तरप्रदेश, छतीसगढ़, मध्यप्रदेश, उड़ीसा आदि वनोत्पाद से समृद्ध प्रान्तों से तो महुआ फूल- फल, फुटकल (पाकर) के कोंपल, बेंग साग (ब्राह्मी), कटहल, पुटू (रूगड़ा) मशरूम आदि दर्जनों स्थानीय उत्पादों के विविध उपयोग और कोरोना से बचाव में लाभ प्राप्त होने की भी खबरें आई हैं। देश के अन्य राज्यों से भी इस प्रकार की खबरें आती रही हैं।

सर्दी के मौसम में गले से पीडि़त होने अथवा प्रदूषण के कारण स्थिति ज्यादा खराब होने पर गले की परेशानी से राहत प्राप्ति हेतु गुनगुने पानी में नमक डालकर कुल्ला करना आम बात है। सर्वाधिक प्रभावी और सबसे आसान घरेलू उपाय मानी जाने वाली इस उपाय से गले की खराश, गले में दर्द और न्यूमोनिया के कारण होने वाली निरंतर खांसी कम होने से यह विधि उत्तम मानी जाती है। सर्दी और खांसी में गर्म भोजन सेवन के साथ भाप लेना लाभदायक माना जाता रहा है। आमतौर पर तौलिये को गुनगुने पानी में भिगोकर भाप लिया जाता है परन्तु गर्म पानी के भाप लेने अर्थात स्टीम इन्हेलेशन के लिए भी भांति- भांति के जुगाड़ लगाए जा रहे हैं। बिहार के नरकटियागंज रेलवे के रनिंग रूम में पदस्थापित मुख्य क्रू नियंत्राण उमेश कुमार के द्वारा घरेलू उपकरणों से निर्मित स्टीम इनहेलेशन से लोको पायलट, गार्ड के साथ अन्य रेल कर्मी सुबह-शाम भाप ले रहे हैं ताकि रेल कर्मी कोरोना की चपेट में आने से बच सकें। इस स्टीम इनहेलेशन में स्टीम गैस सिलेंडर पर रखे कुकर के जरिए पाइप से निकलती है। कुकर में पानी डालकर गर्म किए जाने से गीजर वाले पाइप के जरिए गर्म पानी से भाप निकलने लगती है, और पाइप के माध्यम से ही लोगों की नाक तक पहुंचती है।

उमेश कुमार कहते हैं कि भाप लेने से इस कोरोना संक्रमण काल में काफी फायदा हो रहा है। रेल कर्मी प्रतिदिन इस देसी नुस्खे को आजमा रहे हैं। स्टीम इनहेलेशन घर पर आसानी से बनाकर कोरोना महामारी से बचा जा सकता है। सर्दी, खांसी, जुकाम की शिकायत वालों को भाप लेना शुरू करते ही फायदा हो रहा है लेकिन इसके विपरीत यूनिसेफ साउथ एशिया के रीजनल एडवाइजर एंड चाइल्ड हेल्थ एक्सपर्ट पालारटर ने एक मीडिया रिपोर्ट बताया है कि इसके कोई साक्ष्य मौजूद नहीं हैं कि स्टीम कोविड-19 को खत्म कर सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी कोरोना के इलाज के तौर पर स्टीम लेने का सुझाव नहीं देता। स्टीम लेने के कई खराब परिणाम हो सकते हैं। इसके लगातार उपयोग से गले और फेफड़े से बीच की नली में टार्किया और फैरिंक्स जल सकते हैं या गंभीर रूप से डैमेज हो सकते है।

सदियों से आयुर्वेद की दवाओं और स्थानीय स्तर पर प्रयुक्त होने वाली नीम के पत्ते, फूल आदि का प्रयोग भी इस काल में बढ़ा है और इसकी विधियां भी संचार माध्यमों में बताई जाती रही हैं। परन्तु इस बीच आल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ आयुर्वेद के द्वारा भी कोरोना महामारी से लड़ने के लिए नीम के प्रयोगों पर काम किया जा रहा है। वैज्ञानिकों की टीम यह पता लगाने में जुट गई है कि क्या नीम के गुण वायरस की समाप्ति के काम भी आ सकते हैं? गत वर्ष ही आल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ आयुर्वेद के द्वारा दी गई खबर के अनुसार हरियाणा के फरीदाबाद के एक अस्पताल में एक ह्यूमन ट्रायल किया जा रहा है और यह पता लगाया जा रहा है कि नीम कोरोना से लड़ने में कितना कारगर है? इससे जुड़े अनुसन्धान और परिक्षण के लिए एक टीम बनाई गई है और परीक्षण कर्ता नियुक्त किए गए हैं जो यह पता लगाएंगे कि नीम के गुणकारी तत्व कोरोना संक्रमण रोकने में कितने सफल हैं। ट्रायल में अहम भूमिका निभाने वालों का कहना था कि नीम एक प्रसिद्ध एंटीवायरल पौधा है जिसका उपयोग आयुर्वेद में बुखार, दाद वायरस जैसे विभिन्न रोगों के लिए किया जाता है। यह अपने गुणों के कारण रक्त को शुद्ध करने के लिए भी सहायक सिद्ध हुआ है।.नीम में कई गुणकारी तत्व होने के कारण हमें उम्मीद है कि यह कोरोना से जंग में एक महत्वपूर्ण हथियार साबित हो सकता है।

प्रयागराज के आयुर्वेद चिकित्सक वैद्य आशुतोष मालवीय ने तो इस खतरनाक वायरस का इलाज आयुर्वेद से सम्भव बताते हुए इसके लिए पांच प्रकार की वनौषधियाँ तय कर उन जड़ी- बूटियों के नाम भी बाकायदा घोषित कर दिए। उनके अनुसार ये पांच तरह की जड़ी -बूटियाँ- पित्त पापड़ा, नागर मोथा, तगड़, उसीर व लाल चंदन है। पित्त पापड़ा और नागर मोथा किसी भी प्रकार के संक्रमण को आसानी से दबाता है। तगड़ मस्तिष्क को शून्यता से बचाता है। उसीर व लाल चंदन शरीर में आ रहे तेज बुखार को कम करता है। विजातीय द्रव्य को मूत्रा के मार्ग से बाहर करता है। इन सभी वन औषधियों को बराबर मात्रा में लेकर उसका 15 ग्राम पाउडर बना तीन सौ ग्राम पानी में इसे उबालने पर जब जल कर आधा अर्थात डेढ़ सौ ग्राम पानी बचे तो उसे 15-15 ग्राम दिन में दो या तीन बार लेना चाहिए। इस औषधि से कोरोना वायरस से होने वाली बीमारी से राहत पाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि बुखार ठंड देकर आने पर इसके साथ सुदर्शन घनवटी को भी उपयोग किया जा सकता है। कोरोना वायरस की चपेट में आने से बचाव के लिए सोंठ और तुलसी का सेवन करने की सलाह देते हुए आशुतोष कहते हैं कि इन दोनों से बनी औषधि का उपयोग करने वाले लोग कोरोना वायरस की चपेट में जल्दी नहीं आएंगे।

इसी प्रकार की एक खबर उत्तर प्रदेश के बस्ती के वरिष्ठ चिकित्सक डाक्टर रमेश चन्द्र श्रीवास्तव की ओर से आई है जिसमें उन्होंने कहा है कि कटहल के सेवन से इम्युनिटी बढ़ जाती है। इम्युनिटी बढ़ाने में गुणकारी कटहल में अनेक पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटेशियम की उपलब्धता के कारण मांसपेशियांे, हड्डियों को मजबूती मिलती है। इसमें विटामिन सी व ए शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की शक्ति होती है। हृदय रोग में भी कटहल लाभदायक होता है और उच्च रक्तचाप कम करता है। कटहल के सेवन से इम्युनिटी तीव्रगति से बढती है। कोरोना महामारी में इम्युनिटी बढ़ाने के लिए कटहल का उपयोग भी करना चाहिए।

उधर सांस लेने में परेशानी होने वाले कोरोना संक्रमितों को आक्सीजन खींचने में सहायक बताकर नेबुलाइजर बेचे जाने की खबर भी आई है। फेसबुक, ट्विटर और वाट्सऐप पर साझा किए गए एक वीडियो में एक व्यक्ति एक चिकित्सीय संस्थान के सामने हिन्दी में कह रहा है, हमारे वातावरण में पर्याप्त आक्सीजन है, और यह नेबुलाइजर इसे आपके शरीर के अंदर पहुंचा सकता है। आक्सीजन खींचने के लिए आपको सिर्फ एक नेबुलाइजर की जरूरत है। वीडियो में यह कथित डाक्टर यह दावा कर रहा है कि नेबुलाइजर आक्सीजन सिलेंडर का काम कर सकती है। नेबुलाइजर एक ऐसी मशीन होती है जिसके जरिए मरीज सांस खींच कर दवा अपने शरीर में पहुंचाती है। दवा स्प्रे में तब्दील हो जाती है और मरीज इसे सांस खींच कर अंदर लेता है। मेडिकल विशेषज्ञों ने कहा है यह तकनीक अतिरिक्त आक्सीजन मुहैय्या कराने में बिलकुल कारगर नहीं है। विडियो में दिखाए जा रहे चिकित्सीय संस्थान का भी कहना है कि नेबुलाइजर से आक्सीजन मिल सकती है, इसका कोई प्रमाण या वैज्ञानिक अध्ययन नहीं है।

इस दिनों सामुदायिक संचार माध्यमों अर्थात सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर कोविड 19 का इलाज सुझाते और शरीर में गिरते आक्सीजन लेवल को बढ़ाने तक के तरीके बताते घरेलू नुस्खों से सम्बन्धित विवरणियों व वीडियो को खूब साझा किया जा रहा है। एक वीडियो में बताया जा रहा है कि कपूर, अजवाइन और यूकेलिप्टस के तेल का मिश्रण कोविड के मरीजों में आक्सीजन लेवल बढ़ाने में काफी कारगर है। एक डाक्टर की ओर से डाले गए इस पारंपरिक आयुर्वेदिक दवा को प्रमोट करने वाले वीडियो को फेसबुक व वाट्सऐप पर खूब शेयर किया जा रहा है लेकिन इसके कोई प्रमाण नहीं हैं कि यह कोविड-19 संक्रमित मरीजों को कोई फायदा पहुंचाता है। चिकित्सकों का कहना है कि आम तौर पर स्किन क्रीम और मलहम के तौर पर इस्तेमाल होने वाले कपूर को शरीर के अंदर लिया जाना घातक हो सकता है। अमेरिका के सेंटर फार डिजीज कंट्रोल ने चेतावनी दी है कि कपूर की भाप शरीर के अंदर जाकर विषाक्त हो सकता है।

विजय संकेश्वर नाम के एक वरिष्ठ राजनेता और उद्यमी ने हाल में दावा किया कि नाक में दो बूंद नींबू का रस डालने से शरीर में आक्सीजन सेचुरेशन लेवल बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने उन सहकर्मियों से इस नुस्खे को आजमाने के लिए कहा था जिनका आक्सीजन लेवल कम था। उन्होंने दावा किया, इस नुस्खे को आजमाने के बाद इन सहकर्मियों का आक्सीजन लेवल 88 फीसदी से बढ़ कर 96 फीसदी हो गया। भारत की अस्सी फीसदी आक्सीजन समस्या इसी नुस्खे से खत्म हो जाएगी लेकिन आक्सीजन लेवल सुधारने में इस नुस्खे के रोल का भी कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है बल्कि छत्तीसगढ़ से एक शिक्षक के नाक में नींबू रस डालने पर लगातार उलटी होने से मृत्यु की खबर संचार माध्यमों की सुर्खियाँ बनी थी।

भारत के लोकप्रिय योग गुरु रामदेव भी आजकल न्यूज चैनलों और अपने यूट्यूब चैनल के वीडियो में लोगों को घर बैठे ही आक्सीजन लेवल बढ़ाने के तरीके बताते दिख रहे हैं। पेट को सिकोड़ते हुए वे कहते हैं- पूरी दुनिया में इसके लिए हाय तौब्बा मची हुई है, देखिए मेरा आक्सीजन लेवल गिरता जा रहा है, आक्सीजन को नीचे जाने में 20 सेकेंड लगेगा। दो बार लंबी सांस लीजिए और आपके खून में आक्सीजन खुद आ जाएगी क्योंकि वातावरण में पर्याप्त आक्सीजन है।

आमतौर पर योग करना स्वास्थ्य के लिए अच्छा है लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि जब कोविड-19 जैसे किसी स्वास्थ्य कारण से शरीर में आक्सीजन सेचुरेशन लेवल कम होता है, तो इसे बाहर से देनी पड़ती है, अर्थात सप्लीमेंटल मेडिकल आक्सीजन की जरूरत होती है। डब्यूएचओ की डा. जेनट डियाज कहती हैं- मरीज के शरीर में आक्सीजन का लेवल कम होने की स्थिति लंबे समय तक बनी रहने के बाद भी इसका इलाज नहीं होने से शरीर की कोशिकाएं अपने आप ठीक तरीके से काम करना बंद कर देती हैं। इस स्थिति में सिर्फ मेडिकल आक्सीजन ही जान बचा सकती है।

(अदिति)

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