आर्थिक चर्चा/ क्रिप्टो-करेंसी और राष्ट्रवाद की चुनौतियां

आर्थिक चर्चा/ क्रिप्टो-करेंसी और राष्ट्रवाद की चुनौतियां

पंकज जायसवाल

विश्व में भारत जैसे कई देश अर्थव्यवस्था में समानान्तर नकदी व्यवस्था की चुनौतियों से निपटने में लगे थे और नोटबंदी एवं अन्य प्रचार के माध्यम से लोगों को बैंकिंग एवं डिजिटल इकानमी की तरफ प्रोत्साहित कर रहे थे लेकिन अब इस नई डिजिटल इकानामी में भी क्रिप्टो-करेंसी नाम की एक डिजिटल करेंसी दस्तक दे रही है। यह कई देशों में तो पैर पसार ही चुकी है और इसका प्रवेश अब भारत में भी हो चुकी है। बिटकाइन, एटीसीकॉइन एवं तरह तरह नामों से यह आभासी पैसा बाजार में उतर आया है और देखते ही देखते यह अपना प्रभाव भी जमाने लगा है।

दुनिया के भौतिक बाजार आजकल आनलाइन हो रहे हैं और यह आनलाइन डेस्कटाप और लैपटाप की यात्रा को पार करते हुए हमारे फिंगर टिप्स पर बसे मोबाइल पर आ गये हैं और लोग अपनी खरीदारी का एक बड़ा भाग आजकल इस आभासी माध्यम मोबाइल इंटरनेट से कर रहें हैं। लोगों के पास भौतिक वैलट की जगह वर्चुअल वैलट होने लगे हैं। जैसे जैसे देश डिजिटल होते चले गये और लोगों के वैलेट एवं दुनिया मोबाइल में सिमटती गई, बाजार की बहुत सी चीजें सीधे मोबाइल के बहाने लोगों के पास प्रत्यक्ष अंगुलियों के टिप पर आ गईं।

जैसा कि उपर भी मैंने उल्लेख किया है, मुद्रा का अस्तित्व मानव जीवन के व्यवस्थित अस्तित्व के लिए एक बड़ा आविष्कार है जिसने मानव जीवन को नियंत्रित एवं व्यवस्थित करने का कार्य किया और यह किसी भी राष्ट्र के उसके खुद के आर्थिक, सामाजिक एवं राजनैतिक प्रशासन का मेरुदंड है। कालांतर मंस जब हमने मानव की बस्तियां बसाईं तो इस पृथ्वी ग्रह के बुद्धिमान प्राणियों ने विनिमय की शुरुआत की और जैसे जैसे मानवों की बस्तियां बढ़ीं, गांव बने, कस्बे बने, और धीरे धीरे राष्ट्र राज्य का जन्म हुआ। इसी राष्ट्र राज्य ने अपने राज्य में नागरिक प्रशासन एवं सुविधा के साथ व्यापार एवं लेन देन की प्रक्रिया को भी नियमित किया और माध्यम बनी मुद्रा , और तभी से विनिमय के लिए सत्ता प्रतिष्ठानों ने मान्यता प्राप्त धातु की एक भौतिक मुद्रा का चलन प्रारम्भ किया जिसे मुद्रा का नाम दिया गया और यहीं से विनिमय का मानकीकरण मुद्रा के रूप में होता गया और राज्यों का शासन एवं नियंत्राण मुद्रा के माध्यम से नागरिकों के ऊपर बढ़ता चला गया।

वस्तु विनिमय में जहां विनिमय हो रही मुद्रा का मानकीकरण नहीं था और विनिमय हो रही वस्तुओं के मूल्यों का निर्धारण विनिमय कर रहे दो व्यक्तियों के खुद की जरूरत और निर्धारण पर निर्भर करता था और राज्य का हस्तक्षेप टैक्स के भार को छोड़ दें तो लगभग नहीं ही था, उसे मुद्रा के आविष्कार से काफी हद तक साध लिया गया था। जब मुद्रा का जन्म हुआ तो राज्य को इन सौदों को, लगान को, राज्य के नागरिकों को और विभिन्न राज्यों के बीच अपने आपको मजबूत करने का एक साधन मिल गया और इसे विदेश व्यापार में भी प्रयोग किया जाने लगा। जिस राज्य की मुद्रा की साख अच्छी थी उस राज्य को अब विकसित माना जाने लगा जैसे वर्तमान में अमेरिका को।

आप पायेंगे कि मुद्रा की सबसे बड़ी विशेषता होती है उसकी जन द्वारा सामान्य स्वीकृति जो मुद्रा के लिए सत्ता या राज्य प्रतिष्ठान द्वारा मान्यता प्राप्त होने की शर्तों से भी ज्यादा जरूरी है। अगर किसी मुद्रा में जन द्वारा सामान्य स्वीकृति नहीं है तो राज्य प्रतिष्ठान द्वारा मान्यता प्राप्त होने के बाद भी वह मुद्रा नहीं हो सकती है। आज के दौर की क्रिप्टो करेंसी बाजार ने इसी सूत्रा वाक्य को पकड़ा है। जैसे जैसे दुनिया भौतिक से आभासी होती जा रही है, अपने हथेलियों के बीच फंसे मोबाइल में बसती जा रही है, क्रिप्टो करेंसी नाम की व्यवस्था धीरे धीरे फेसबुक एवं अन्य आनलाइन माध्यम से इस मोबाइल के अंदर घुस कर नागरिकों के बीच अपना घर बनाती जा रही है।

आज का दौर एक बड़े बदलाव का दौर है। एक बार 1991 में भारत में ग्लोबल इकानामी का दौर चला था, डंकल ने अपना प्रस्ताव दिया था, तब भी क्रिप्टो करेंसी जैसी व्यवस्था की उतनी आहट नहीं थी जितनी आज है। बहाई धर्म के संस्थापक बहाउल्ला ने भी विश्व करेंसी की बात कही थी लेकिन ये सब आज के क्रिप्टो करेंसी के स्वरूप से अलग थे। सब के पीछे जो करेंसी की अवधारणा थी, वह एक वैध मुद्रा के रूप में थी जिसे अंतिम स्वरूप में भौतिक होना ही था लेकिन आज के क्रिप्टो करेंसी की व्यवस्था में भौतिक मुद्रा की चुनौती तो है ही, राष्ट्र की चुनौतियां बहुत हैं, जो आज आर्थिक हैं कल राजनैतिक भी हो सकती हैं।

आज के दौर में क्रिप्टो करेंसी एक आभासी मुद्रा है और आज की इस भौतिक मुद्रा की तरह इसका कोई धातु या कागज का स्वरूप नहीं है, न ही अंतिम तौर पर इसकी गारंटी किसी राज्य एवं उसके केन्द्रीय बैंक द्वारा कोई भौतिक स्वरूप में है। यह विशुद्ध रूप से एक डिजिटल करेंसी है जिसे आप ना तो देख सकते हैं और न ही आप छू सकते हैं। हां, इसे आप अपने डिजिटल वैलट में डिजिटली संग्रहीत कर सकते हैं। अगर किसी के पास क्रिप्टो करेंसी है तो वह इस आभासी बाजार में कई जगह आम मुद्रा की तरह ही सामान खरीद सकता हैं क्यंूकि कई वेबसाइट इसे भुगतान में स्वीकार कर रहें हैं।

जहां आम बैंकिंग चैनल से भुगतान करने में लगभग कुछ लेनदेन शुल्क लगता है, वहीं इसके लेनदेन में कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगता। इस वजह से भी यह लोकप्रिय होता जा रहा है। किसी अन्य क्रेडिट कार्ड की तरह इसमें कोई क्रेडिट लिमिट नहीं होती और न ही कोई नगदी लेकर घूमने की समस्या है। खरीदार की पहचान का खुलासा किए बिना पूरे क्रिप्टो-करेंसी नेटवर्क के प्रत्येक लेन देन के बारे में भी पता किया जा सकता है। आज भी कई लोगों के पास बैंकिंग सुविधा नहीं है लेकिन उन लोगों की संख्या अधिक है जिनके पास इंटरनेट के साथ मोबाइल है और वे इंटरनेट के माध्यम से लेनदेन में पेटीएम या ऐसी ही किसी अन्य माध्यमों का प्रयोग कर रहे हैं। ब्लाकचेन, मोबाइल इंटरनेट, लायल्टी पाइंट, रिवार्ड पाइंट एवं वैलट की विचारधारा ने क्रिप्टो करेंसी की विचारधारा की आधारभूत सरंचना को खड़ा करने में मदद की हैं।

इसने राष्ट्र राज्य सत्ता या उसके केन्द्रीय बैंक की अनिवार्य मान्यता की शर्त को हटा कर सिर्फ एक सूत्रा वाक्य को पकड़ा है वह है जन की सामान्य स्वीकार्यता और यह फिर से हमें ले गया है उस दौर में जब विनिमय के लिए मानवों ने देश की सीमाओं के रूप में बड़ी रेखाएं नहीं खींची थी। बिना राज्य प्रतिष्ठान की गारंटी केन्द्रीय बैंक के नियमन के भी आप आभासी दुनिया में अब क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से लेन देन कर सकते हैं क्योंकि इस क्रिप्टो करेंसी पर किसी व्यक्ति विशेष सरकार या कंपनी का कोई स्वामित्व नहीं होता क्रिप्टो करेंसी पर कोई भी केंद्रीय नियमन अथारिटी भी नहीं है। आज क्रिप्टो करेंसी काफी आकर्षक हो रही है, वह सिर्फ इसलिये क्यूं कि इसे मुद्रा शक्ति एवं मान्यता वो लोग दे रहे हैं जो आभासी दुनिया में ही जीते हैं और यह ब्लाकचेन जैसी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के तहत है जिसे भेदना लगभग नामुमकिन है।

आज के राष्ट्र राज्य की अवधारणा में क्रिप्टो करेंसी एक नई और बड़ी चुनौती है। यह एक नई आभासी दुनिया का निर्माण कर रही है, उस आभासी दुनिया की करेंसी का निर्माण कर रही है और उसकी नई सीमा रेखा का निर्माण कर रही है। अब कोई भी देश दूसरे देश को आर्थिक रूप से बर्बाद करना चाहे तो इस क्रिप्टो करेंसी के इस्तेमाल से यह संभव हो सकता है जिसमें उस देश के लोग जब उस देश के केन्द्रीय बैंक की मुद्रा को नकारने लगे। यह काले धन और काले कारोबारियों के लिए भी एक बड़ा खाद पानी है और इसके माध्यम से पैसा राष्ट्र से बाहर भी जा सकता है। अब किसी देश के नागरिकों को किसी देश की मान्यता प्राप्त करेंसी को संग्रहीत करने, बैंक में जमा करने, लेन देन करने, और लेखा करने की जरूरत नहीं है। इस आभासी दुनिया की इस आभासी करेंसी पर न तो बहुत से राज्यों का नियमन है और न ही इस पर राज्यों का कानून काम कर पा रहा है। यह पूरी तरह पीयर टू पीयर अवधारणा पर काम कर रहा हैं जहां राज्य का हस्तक्षेप नहीं है।

आज की यह आधुनिक करेंसी हमें वर्तमान व्यवस्था से अलग ले जा रही है जब मानवों के विकास एवं सुखमय जीवन के लिए राज्य की स्थापना हुई थी और राज्य का नियंत्राण जनता पर पूरी तरह स्थापित हो पाया था और कर भार लगाने का एक आधार मुद्रा का जन्म हुआ था और राज्यों से सीमा रेखा के माध्यम से संप्रभु राष्ट्र को स्थापित किया गया था। क्रिप्टो करेंसी का प्रचलन केवल राष्ट्र की भूमिका और उसके राष्ट्रवाद को ही नहीं खत्म कर रहा है, यह उस राज्य के द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स आधार को भी खत्म कर दे रहा है। यह अन्य टैक्स बेस-ईरोजन से बड़ा बेस-ईरोजन है। मानव सभ्यता के बड़े दुश्मन आतंकवादी, ड्रग माफिया एवं तस्कर भी इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर कर सकते हैं।

जब तक आभासी दुनिया, लोगों को अपनी नई दुनिया , नई सीमा रेखा के गिरफ्त में लेकर एक नया नियम और एक नई सीमा रेखा को स्थापित करे, पूरी दुनिया को इसपर शोध एवं चिंतन करने की जरूरत है ताकि इस सच्चाई को स्वीकार करते हुए इसका मानव एवं समाज हित में कैसे इस्तेमाल किया जा सके और इसे राष्ट्र की संप्रभुता की चुनौती, ब्लैक मनी और माफिया के इस्तेमाल जैसी बुराइयों से बचाया जा सके।

(यह लेखक के निजी विचार हैं। इससे जनलेख प्रबंधन का कोई लेनादेना नहीं है।)

(अदिति)

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Translate »