फिल्म साक्षात्कार/ अपनी किस्मत पर अचरज होता है : जैकलीन फर्नांडिस

फिल्म साक्षात्कार/ अपनी किस्मत पर अचरज होता है : जैकलीन फर्नांडिस

सुभाष शिरढोनकर

जैकलीन फर्नांडिस अपने स्टाइलिश अंदाज और बेहतरीन एक्टिंग से हर किसी के दिल पर राज करती रही हैं। वे अपनी फिटनेस और हॉटनैस के लिए भी जानी जाती हैं। जब वे 2009 में पहली बार फिल्म इंडस्ट्री में अपनी किस्मत आजमाने भारत आई, पहली बार उन्हें सुजॉय घोष की ’अलादीन’ (2009) का ऑफर मिला। उन्हें एक बड़ी हीरोइन बनने में डायरेक्टर साजिद खान का योगदान रहा है। दोनों के बीच प्यार भी परवान चढ़ा लेकिन साजिद खान के पजेसिव नेचर के कारण जैकलीन ने उनसे दूरी बना ली।

साजिद खान के बाद जेल में बंद ठग सुकेश के साथ कथित रिलेशनशिप को लेकर जैकलीन काफी चर्चाओं में रही हैं। सुकेश और जैकलीन की कुछ अंतरंग फोटो सोशल मीडिया पर लीक भी हो गए थे। इस मामले में गिरफ्तारी की तलवार जैकलीन पर लटकी नजर आने लगी है।
जैकलीन की आने वाली फिल्मों में रणवीर सिंह के अपोजिट ’सर्कस’ और अक्षय कुमार के अपोजिट ’राम सेतु’ शामिल हैं। ’सर्कस’ उनके कैरियर के लिए सबसे खास है। ’राम सेतु’ एक एक्शन एडवेंचर फिल्म है जिसमें अक्षय कुमार के अलावा नुसरत भरूचा भी हैं।

’रेस 3’ (2018) के बाद जैकलीन फर्नांडिस कोई बड़ी हिट नहीं दे सकी हैं, जिसकी वजह से उनकी ब्रांड वैल्यू में गिरावट आई है। इसलिए आने वाली फिल्में उनके कैरियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। प्रस्तुत है उनके साथ की गई बातचीत के मुख्य अंश:

70 और 80 दशक की चर्चित अभिनेत्राी प्रिया राजवंश की बायोपिक में आप प्रिया राजवंश की भूमिका अभिनीत कर रही है। इस बारे में कुछ बताइये?

यह बायोपिक मुझे किस्मत से मिली। इसके लिए प्रदीप सरकार करीना या कैटरीना मंे से किसी एक को लेना चाह रहे थे लेकिन उनके साथ शायद उनकी बात नहीं बनी और इस तरह यह मुझे मिल गई।

’रेस 3’ (2018) के बाद आपने अब तक कोई दूसरी हिट नहीं दी है लेकिन इसके बावजूद काम की आपके पास कोई कमी नहीं है?

मुझे अपनी किस्मत पर अचरज होता है जिसकी बदौलत मुझे कभी खाली नहीं बैठना पड़ा। मेरे पास लगातार काम आता रहा है। मैं बहुत खुश हूं कि अपनी किस्मत और अपने काम के जरिये आज यहां इस मुकाम तक पहुंची हूं।

क्या आपने शुरू से अपना लक्ष्य निर्धारित कर रखा था हिंदी फिल्मों की एक्ट्रेस बनना है?

14 की उम्र में मैंने पहली बार एक कार्यक्रम होस्ट किया था। शायद उसके बाद से ही मेरे दिलो दिमाग में एक्ंिटग की बात आई थी। कुछ ही दिनों में, अचानक मेरा रूझान फिल्मो और एक्टिंग की तरफ हो गया लेकिन यहां आकर फिल्मों में काम करने के बारे में मैंने कभी नहीं सोचा था। मैं तो हॉलीवुड की फिल्में करना चाहती थी।

’अलादीन’ (2009) और ’जाने कहां से आई है’ (2010) न चलने के बाद आप वापस श्रीलंका लौट गई थीं?

उस वक्त मैं थोड़ी निराश हो गई थी लेकिन कहीं गई नहीं थी। मैं तो पहले से ठान कर आई थी कि खाली हाथ कभी नहीं लौटूंगी। निराशा के उस दौर में मैने हर तरह की चुनौती के लिए खुद को तैयार रखा था और हर किसी से कुछ न कुछ सीखने की कोशिश की और लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार मुझे कामयाबी मिल सकी।

आप पहली इंटरनेशनल फिल्म ’टैल इट लाइक ए वुमन’ कर रही हैं। इसके बारे में कुछ बताइये?

यह मेरी पहली इंटरनेशनल फिल्म नहीं है। इसके काफी पहले मैं 2015 में ब्रिटिश हॉरर फिल्म ’डैफिनिशन ऑफ फियर’ के जरिए इंटरनेशनल फिल्मों में कदम रख चुकी हूं। ’टैल इट लाइक ए वुमन’ आठ महिला डायरेक्टर्स का एक संकलन होगा। इसमें मेरे वाला हिस्सा लीना यादव ने डायरेक्ट किया है। इसे लेकर मैं न सिर्फ बहुत एक्साइटेड हूं बल्कि इसका हिस्सा बनकर मैं खुद को गर्वित महसूस कर रही हूूं।

(अदिति)

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