यह स्वाभाविक है, सामान्य शारीरिक क्रियाओं को होने दें

यह स्वाभाविक है, सामान्य शारीरिक क्रियाओं को होने दें

अयोध्या प्रसाद ’भारती‘

देह को ठीक रखने में कुछ सामान्य क्रियाएं स्वतः होती रहती हैं। हम प्रायः इन्हें बाधित करने का प्रयास करते हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। इन शारीरिक क्रियाओं को सामान्य रूप से होने दें।

छींक: नाक में अवांछित पदार्थ के घुसने पर नाक स्वाभाविक प्रतिक्रिया करती है जिससे हमें छींक आती है। छींक को रोकना खतरनाक है। छींक से नाक साफ होती है और अवांछित वस्तु के बाहर आने की पूरी संभावना होती है। यदि नाक में घुसा बाहरी पदार्थ शरीर में प्रवेश करे तो जुकाम, सिरदर्द, साइनस या सांस की तकलीफें पैदा कर सकता है।

मूत्रा: मूत्रा आया हो तो उसे फौरन त्यागने का प्रयास करें। मूत्रा अधिक देर तक रोकने से मूत्राशय में दर्द होने लगता है। मूत्रा देर तक रोकने पर फिर मूत्रा त्यागने में परेशानी होगी अर्थात दर्द के साथ-साथ रूक-रूक कर मूत्रा निकलेगा। पेशाब रोकने से सिरदर्द, पथरी की समस्या या मूत्राशय में संक्रमण भी हो सकता है।

जम्हाई: जम्हाई भी हमारी देह की सामान्य प्रवृत्ति है। जम्हाई रोकने से मांसपेशियों में अकड़न, नाक, आंख, गले और कान की बीमारियां हो सकती हैं। यही नहीं, जम्हाई को रोकने से हमारे शरीर मंे कंपन, थरथराहट या फिर मूर्छा की स्थिति भी आ सकती है।

नींद: नींद भोजन से भी अधिक जरूरी है। अगर आप एक समय भोजन न करें तो आपके स्वास्थ्य पर कोई विशेष प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा मगर यदि आप एक रात सो न पाए तो आप दिन में सामान्य नहीं रह सकते। प्राचीन काल से आज तक सजा के तौर पर यह भी किया जाता रहा है कि जिसे सताया जाना है, उसे जबरदस्ती जगाए रखा जाए।

सोने से पूरे शरीर को न सिर्फ आराम मिलता है बल्कि शरीर नई ऊर्जा प्राप्त करता है। सोने पर ही हमारे शरीर की कोशिकाएं नवजीवन प्राप्त करती हैं जिससे शरीर अगले 12-14 घंटों के काम के लिए तैयार होता है। अनिद्रा की स्थिति में अनिद्रा रोग, पाचन क्रिया में गड़बड़ी, मानसिक विकार, चिड़चिड़ापन, याददाश्त में कमी, बुद्धि हृास, दुर्बलता आदि का आप शिकार हो जाएंगे।

धीरे-धीरे सारा शरीर रोगों का वास बन जाएगा इसलिए आपका प्रयास होना चाहिए कि आपको जब भी नींद आए थोड़ी बहुत नींद अवश्य लें। यदि आपको बहुत कम नींद आती हो तो अधिक नींद आए, इसका उपाय करें।

प्यास: जब हमें प्यास लगती है तो इसका मतलब यह होता है कि आपके शरीर को तरल पदार्थ की जरूरत है। हमारा शरीर पानी के बिना नहीं रह सकता। यदि हम प्यास की उपेक्षा करते हैं तो हमें गले और मुंह की खुश्की, बहरेपन, हांफने, बल की कमी, बेहोशी, डीहाइड्रेशन, कार्डिएक पेन और मृत्यु तक की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है, अतः शरीर के सामान्य संचालन के लिए प्यास लगने पर पानी, जूस या लस्सी आदि कोई सामान्य तरल पदार्थ अवश्य पीना चाहिए।

आंसू: आंसू में तमाम तरह के रसायन होते हैं। आंखों की बनावट ऐसी है कि अत्यधिक भावुक होने या बहुत दुखी होने पर आंखों से पानी (आंसू) निकलने लगता है। आंखों से जितना पानी निकले, उसे निकलने दें। इस प्रवृत्ति को दबाने से आंखों के रोग, मस्तिष्क रोग, सीने सिर में दर्द, चक्कर आना और पाचन तंत्रा में गड़बड़ी हो सकती है।

शरीर और सिर में खुजली: कभी-कभी सिर या शरीर में कहीं भी खुजली हो सकती है। तब त्वचा हाथ का अच्छा स्पर्श मांगती है। हिचकी और खांसी रोकना भी खतरनाक होता है। ऐसे ही पेट से गुर्दा मार्ग को निकलने वाली वायु को रोकने की कोशिश भी आपको भारी पड़ सकती है।

(स्वास्थ्य दर्पण)

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