रहस्य रोमांच/ शाही घराने का एक भयानक रहस्य

रहस्य रोमांच/ शाही घराने का एक भयानक रहस्य

गुरिन्द्र भरतगढिया

प्रस्तुत घटना लगभग डेढ़ सदी पहले की है। स्काटलैंड के विशाल किलेनुमा रहस्यमयी राजमहल ग्लेमिस कैसल में एक दिन किसी कार्यवश एक अजनबी आया लेकिन वह शीघ्र ही वहां की भूल भुलैया में भटक गया। चारों ओर के गलियारे बिलकुल सुनसान पड़े थे, एकदम मौत सी भयानक निस्तब्धता लिए बेेचारा बाहर निकलने की राह पूछे तो किससे?

काफी देर तक वह इधर उधर भटकता रहा। सहसा एक बड़े दरवाजे पर उसकी नजर पड़ी। उसने साहस से काम लिया और आगे बढ़ कर दरवाजा खटखटाया लेकिन भीतर से कोई प्रतिक्रिया न हुई। आखिर कुछ सोच कर उसने दरवाजे को जोेर से धक्का मारा। अगले ही पल चीं चीं करता हुआ दरवाजा खुल गया। ज्यों ही उसने भीतर कदम रखा, सामने का खौफनाक दृश्य देख कर उसके मुंह से जोरदार चीख निकल गई औेर वह बेहोश होकर फर्श पर बिखर गया।

उसकी भयानक चीख महल के गहरे सन्नाटे में गूंज उठी और किसी अनहोनी की आशंका से कुछ लोग चीख की दिशा की ओर भागे। उन लोगों में ग्लेमिस कैसल के स्वामी लार्ड स्ट्रोकमोर का एक खास कर्मचारी भी था। उसने अविलंब उस अजनबी को एक कमरे में पहंुचाया और अन्य लोगों को यह कह कर चले जाने को कहा कि घबराने की कोई बात नहीं है। यह व्यक्ति थोड़ी ही देर में होेश में आ जाएगा।

लोगों के चले जाने के बाद उस कर्मचारी ने लार्ड स्ट्रोकमोर को इस घटना की सूचना दी। लार्ड स्ट्रोकमोर तुरंत वहां पहुंचा और उसने रातों-रात उस अजनबी को डरा धमका कर तथा काफी धन देकर शेष जीवन किसी अज्ञात स्थान में व्यतीत करने के लिए भेज दिया। वास्तव में उसे यह भय था कि यदि वह अजनबी स्काटलैंड में ही रहा, तो अचानक ही उसने जो दृश्य देखा है, उसके बारे में लोगों को बता देगा।

वह नहीं चाहता था कि महल का यह रहस्य आम लोगों को पता चले क्योंकि इससे शाही घराने की प्रतिष्ठा धूल में मिल जाती। वैसे भी भूत-प्रेतों के कई किस्सों के कारण ग्लेमिस महल पहले ही काफी बदनाम था लेकिन इतनी सावधानी व सतर्कता के बावजूद भी लार्ड स्ट्रोकमोर महल के साथ जुड़ी अजबो गजब चर्चाओं को फैलने से न रोक सका।

इस घटना के ठीक चालीस वर्ष पश्चात इसी महल में एक रात कुछ लोग भोजनोपरांत बैठे हंसी मजाक की बातें कर रहे थे कि सहसा भूत-प्रेतों की बात चल निकली। आधे लोगों का कहना था कि भूत-प्रेतों का कोई अस्तित्व नहीं होता और आधे उन में विश्वास प्रकट कर रहेे थे। आखिर फैसला किया गया कि आज ही महल में भटकते भूूतों की खोज की जाए।

परस्पर विचार-विमर्श करके उन्होंने भूतों को ढूंढनेे का एक सरल उपाय ढूंढ निकाला। उपाय यह था कि महल के उस हॉल के कमरे की सभी खिड़कियों पर तौलिए टांग दिए जाए और फिर बाहर खड़े होकर चोरी से उन पर निगाह रखी जाए। उन्होंनेे ऐसा ही किया। कुछ देेर तक तो तौलिए उसी प्रकार लटकते रहे, फिर एक खिड़की का तौलिया देखते ही देखते गायब हो गया। यह देेख कर बाहर खड़े लोग भय से कांप उठे। सभी के मन-मस्तिष्क में यही प्रश्न था कि आखिर तौलिया गया तो गया कहां?

ग्लेमिस महल के साथ जुड़ी ऐसी ही कई अन्य अफवाहों में एक यह भी थी कि काफी पहलेे रात के समय जब चारों ओर गहरा अंधेरा और सन्नाटा छा जाता था तो महल के बलू रूम के दरवाजों को कोई जोर-जोेर से खटखटाने लगता था। शोर सुन कर कर्मचारी जब वहां पहुंचते तो उन्हें कोई भी प्राणी दिखाई नहीं देता था। इससे सभी कर्मचारी आतंकित हो उठते थे। यही नहीं, अंधेरी तूफानी रातों में इस महल में रहने वालों ने एक खूबसूरत नवयौवना को कई बार टहलते देखा था जो उनके निकट पहुंचते ही किसी मायाजाल की भांति लोप हो जाती थी।

पत्थरों से निर्मित लगभग हजार वर्ष पुराने ग्लेमिस कैसल महल के साथ इसी तरह की अनेक अविश्वसनीय एवं हास्यास्पद अफवाहें जुड़ी हुई थीं। फिर भी अपने निर्माण से लेकर अब तक पता नहीं कितने ही रहस्यमय भेद, कितने हाहाकारी दृश्य और कितनी खौफनाक घटनाओं, अफवाहों को यह महल अपने सीने में समेटेे हुए मौन खड़ा है क्योंकि कहा जाता है कि मैल्कम द्वितीय की हत्या इसी महल में हुई थी और 1537 में जादू टोना करने तथा स्काटलैंड के जेम्स पंचम के विरूद्ध षडयंत्रा रचने के आरोप में लेडी ग्लेमिस को भी इस महल में जिंदा जलाया गया था और अफवाहों के अनुसार इंग्लैंड की राजमाता ने, जिनका बचपन इसी महल में गुजरा था, उसकी भटकती हुई आत्मा को कई बार महल के क्लॉक टावर पर मंडराते देखा था। एक बार तो उन्होंने इस महल में एक नीग्रो कर्मचारी के प्रेत को भी देख लेने की बात कही थी।

भूत-प्रेतों, भटकती आत्माओं और डायनों के गढ़े अनगढ़े चाहे कितने ही किस्से ग्लेमिस महल के बारे में हांे लेकिन इससे जुड़ी एक दर्दनाक घटना अवश्य ही सत्य प्रतीत होती है। संभव है, उसी घटना ने ही जनमानस को भूतांे प्रेतों की कहानियां गढ़ने का आधार दिया हो। कहते हैं, 1820 में उस समय की लेडी स्ट्रोकमोर ने एक बच्चेे को जन्म दिया था लेकिन ज्यों ही उसनेे अपने नवजात शिशु को देखा, मारे भय के उसके मुंह से चीख निकल गई।

बच्चा बहुत ही कुरूप था, बिलकुल राक्षसों जैसा, एकदम खौफनाक और लंबे लंबे दांतों वाला। लेडी स्ट्रोकमोर भयभीत हो उठी। वह नहीं चाहती थी कि लोग उसको भयानक अर्द्ध मानव या अर्द्ध पशु जैसा दिखने वाले बच्चे की मां के रूप में जानें लेकिन ममता के कारण उसे मारना भी नहीं चाहती थी इसलिए उसने बचपन से ही बच्चे को आजीवन एक कमरे में बंद रखा।

सन 1964 में एक जीव विशेषज्ञ पॉल बल्यूम फील्ड ने इस कहानी को जानने का प्रयास किया। इसको एक संयोग ही कहा जा सकता है कि अचानकं ही उसकी नजर सन 1820 के दो स्काटिश रजिस्टरों पर पड़ी। इनमें से एक रजिस्टर से पता चला कि लेडी स्ट्रोकमोर ने 21 अक्तूबर 1820 को एक बच्चे को जन्म दिया लेकिन उसी दिन उस बच्चे की मृत्यु हो गई। दूसरे रजिस्टर में उसकी मृत्यु तीन दिन बाद की दर्ज थी लेकिन पाल बल्यूम फील्ड का कथन है कि हकीकत में उस दानवी शक्ल सूरत वाले बच्चे की मौत तत्काल या तीन दिन बाद नहीं हुई थी बल्कि वह अपनी पूरी आयु एक कैदी के रूप में भोग कर मरा था और संभवतः वही बच्चा बाद में जिंदा प्रेत बन गया था।

वह बच्चा इतना कुरूप क्यों पैदा हुआ था? इसके बारे में कई तरह की ऊल जलूल अटकलें लोगों द्वारा लगाई गई जैसे कि इसके पीछे कोई भारी अभिशाप था या किसी अमानव के साथ प्राकृतिक सहवास लेकिन वास्तविकता क्या थी, यह आज भी रहस्य है।

प्रथम संतान होने के कारण वह बच्चा परंपरा के अनुसार व्यस्क होेने पर ‘अर्ल आफ स्ट्रोकमोेर’ का हकदार बनता लेकिन विधाता ने तो उसके नसीब में घोेर अंधेरे लिखे थे। उसे सदा-सदा के लिए महल के एक अनजान कमरे में बंद कर दिया गया था।

कहते हैं, इस घटना के बाद ‘अर्ल’ की उपाधि के प्रत्येक उत्तराधिकारी को उसकी इक्कीसवीं वर्षगांठ पर उस गुप्त कक्ष में ले जाया जाता और उसे कड़ी सौगंध दिला कर इस रहस्य से परिचित करवाया जाता लेकिन परिवार की स्त्रिायों के कानों में कभी इस बात की भनक नहीं पड़ने दी जाती। कुछ पीढियों बाद एक अन्य लेडंी स्ट्रोकमोर ने जब इस रहस्य को जानने की इच्छा प्रकट की तो उसको सख्ती से उत्तर मिला, ‘तुम स्वयं कोे भाग्यशाली समझो कि इस रहस्य के बारे में तुम्हें कुछ पता नहीं है। यदि यह रहस्य तुम पर खुल गया तो उम्र भर छटपटाती और तड़पती रहोगी। नर्क से भी बदतर बन जाएगी तुम्हारी जिंदगी।

पाल बल्यूम फील्ड अपने अनुमान औेर जांच के सहारे इस नतीजे पर पहुंचा कि वह भयंकर सूरत वाला दानवी बालक सन 1869 तक अर्थात 48 वर्ष तक जीवित रहा, इसलिए संभव है कि शुरू मंे दी गई घटना से संबंधित अजनबी व्यक्ति ने अनजाने में ही उस अभागे मानव को देखा हो और उसकी डरावनी शक्ल देख कर भय से अचेत हो गया हो।

आज ग्लेेमिस कैसल के उस गुप्त कमरे के बारे में जो एक जीवित व्यक्ति का मकबरा बन गया था, किसी को कुछ पता नहीं है। यहां तक कि स्ट्रोकमोर परिवार के सदस्य भी उसके बारे में जानकारी नहीं रखते। कहा जाता है कि इसके पीछे भी एक कारण था। सन 1962 में महल के एक अधिकारी ने बी.बी.सी टीवी पर एक साक्षात्कार के दौरान बताया कि दो-तीन पीढियों पूर्व‘ अर्ल ऑफ स्ट्रोकमोर’ की उपाधि के एक उत्तराधिकारी को जब परंपरा के अनुसार उस रहस्य को गुप्त रखने की शपथ लेने के लिए कहा तो उसने प्रार्थना की कि भगवान के वास्ते मुझे वह दर्दनाक रहस्य न बताया जाए। उसके पिता ने उसकी प्रार्थना स्वीकार कर ली और फिर उसी दिन से यह परंपरा सदैव के लिए खत्म हो गई। साथ ही साथ उस दानवी बालक के अदभुत जन्म की रहस्यमयी कहानी भी अतीत के कब्र में दफन हो गई।

(अदिति)

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