अब दौर है प्राकृतिक चिकित्सा का, प्राकृतिक तरीके से स्वास्थ्य की करें देखभाल

अब दौर है प्राकृतिक चिकित्सा का, प्राकृतिक तरीके से स्वास्थ्य की करें देखभाल

आर.के. महर्षि

प्राकृतिक चिकित्सा अत्यंत सरल और प्रभावी चिकित्सा है जिसमें प्राकृतिक संसाधनों द्वारा रोगी को रोगमुक्त बनाने के लिए प्रयास किया जाता है। बिना किसी दवा के ही इस पद्धति से रोग को दूर किया जाता है। उपवास, आहार चिकित्सा, जल चिकित्सा व मिट्टी चिकित्सा विधि आदि प्राकृतिक चिकित्सा के अंग हैं। इन विधियों द्वारा रोग को दूर करके रोगी को आरोग्यता प्रदान की जाती है।

उपवास

उपवास या लंघन स्वेच्छा से भोजन न करने को कहा जाता है। यह आंतरिक शुद्धिकरण की प्रक्रिया है। उपवास से हमारे आंतरिक अंगों को क्रियात्मक विश्राम मिलता है तथा शरीर को रोगी बनाने वाले विकारों का उपवास से नाश होता है।

आहार चिकित्सा

रोगी को आहार नियंत्राण द्वारा स्वास्थ्य लाभ प्रदान किया जाता है। रोगी को संतुलित आहार ग्रहण करने की सलाह दी जाती है। मिर्च मसालेदार चीजें, घी, तेल, मांसाहार, मद्यपान व धूम्रपान न करने तथा साग-सब्जियां व फल आदि पर्याप्त मात्रा में सेवन करने की सलाह दी जाती है। सादा और संतुलित आहार ग्रहण करके रोगी रोगमुक्त हो जाता है।

जल चिकित्सा

लोग कहते हैं कि भगवान ने पानी से पिंड संवारा है अर्थात जीवन का विकास जल से हुआ है। हमारे शरीर का 70 प्रतिशत केवल जल है और यही जल बीमार होने पर नवजीवन देता है। जलोपचार में कई प्रकार के स्नान, जल पट्टी, सेंक, एनिमा, गीली चादर व स्पंज आदि शामिल हैं। इन विधियों द्वारा जलोपचार से रोगी को स्वास्थ्य लाभ मिलता है।

मिट्टी चिकित्सा

मिट्टी चिकित्सा के दौरान मिट्टी का विभिन्न रूपों में उपयोग किया जाता है। इससे शरीर के विभिन्न विकार दूर होकर आरोग्य लाभ प्राप्त होता है। विभिन्न रूपों में मिट्टी के उपयोग से शरीर को शीतलता मिलती है। शरीर के विकार मिट्टी द्वारा अवशोषित होकर शरीर से बाहर निकल आते हैं। चिकित्सा के दौरान आंख, माथा, पेट और पेडू पर गीली मिट्टी की पट्टी लगाई जाती है। सारे शरीर पर मिट्टी का लेप किया जाता है।

इनके अतिरिक्त रोगी के स्वास्थ्य लाभ के लिए मालिश, योगासन, टहलना, जल नेति, सूत्रानेति, कुंजल आदि का भी सहारा लिया जाता है।

प्राकृतिक चिकित्सा प्रकृति के साथ संतुलन बिठाने का विज्ञान है। जब शरीर के प्राकृतिक तत्वों में असंतुलन आ जाता है तब शरीर रोग ग्रस्त हो जाता है, प्राकृतिक चिकित्सा में प्राकृतिक तत्वों को सही अनुपात में शरीर में प्रवेश कराकर रोगी को स्वस्थ किया जाता है। इसके सिद्धांतों को समझकर या चिकित्सक द्वारा परामर्श लेकर कोई भी लाभ उठा सकता है।

(स्वास्थ्य दर्पण)

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