याद रखिए, क्रोध भी बढ़ाता है हृदयाघात की संभावना

याद रखिए, क्रोध भी बढ़ाता है हृदयाघात की संभावना

सोनी मल्होत्रा

हेनरी फोर्ड हास्पिटल के विशेषज्ञों द्वारा किए गए शोध के अनुसार क्रोध हृदय रोग की संभावना को बढ़ाता है। इन्हांेने अपने शोध में क्रोध और तनाव का हृदय पर पड़े प्रभावों का अध्ययन किया और पाया कि वे रोगी जो अधिक चिड़चिडे़ और गुस्से वाले होते हैं, उनमें इस्कैमिया के लक्षण पाए गए। इस्कैमिया का अर्थ है हृदय को आक्सीजन की कम मात्रा का पहुंचना जिससे हृदयाघात की संभावना बढ़ जाती है। मार्क के अनुसार हृदयाघात पर नियंत्राण के लिए आवश्यक है क्रोध पर नियंत्राण। क्रोध पर नियंत्राण के लिए मेडिटेशन सबसे उपयुक्त है। मेडिटेशन द्वारा व्यक्ति कुछ हद तक क्रोध पर नियंत्राण पा सकता है।

भोजन को अच्छी तरह से चबाना बढ़ाता है याद रखने की क्षमता को पाचन क्रिया को सही रखने के लिए भोजन को अच्छी तरह चबाना चाहिए। अगर भोजन सही तरह से न चबाया जाए तो दांतों के काम को आंतों को पूरा करना पड़ता है। नए शोधों से यह सामने आया है कि चबाने की क्रिया का संबंध न केवल पाचन क्रिया से है बल्कि इसका संबंध मस्तिष्क से भी है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि जो लोग भोजन सही तरह से नहीं चबाते, उनकी याद रखने की क्षमता में कमी आती है। इन वैज्ञानिकों के अनुसार हमारे मस्तिष्क में हिप्पोकैंपस कोशिकाएं होती हैं जो उम्र बढ़ने के साथ नष्ट होती जाती हैं। साथ ही वृद्धावस्था में मनुष्य की चबाने की क्षमता भी कम होती जाती है। वैज्ञानिक मनुष्य की स्मृति और हिप्पोकैंपस कोशिकाओं के बीच संबंध जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। अभी इस दिशा में और शोध होना शेष है।

डिप्रेशन की समस्या वंशानुगत भी

विशेषज्ञों के अनुसार जिन व्यक्तियों के परिवार में डिप्रेशन की समस्या वंशानुगत चली आ रही है, उनके आगे के वंश में भी यह समस्या होने की संभावना बढ़ जाती है। कैंसर, डायबिटिज, उच्च रक्तचाप की तरह डिप्रेशन में भी जीन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए आप डॉक्टर से काउंसलिंग ले सकते हैं और अपने आप को शुरू से ही सशक्त बनाने का प्रयास करते हैं ताकि डिप्रेशन आप पर हावी न हो सके।

डॉक्टरों की सलाह

डॉक्टरों के अनुसार भारत में 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं प्रायः ऑस्टियोपोरोसिस रोग से पीडि़त हैं। ऑस्टियोपोरोसिस रोग में हड्डियां भंगुर हो जाती है। इसका कारण हड्डी ऊतकों का अत्यधिक मात्रा में क्षरण है। इस रोग के हो जाने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और उनके टूटने की संभावना बढ़ जाती है। यही कारण है कि कई लोगों को जरा सी चोट लगने पर फ्रेक्चर हो जाता है, खास तौर पर रीढ़ की हड्डी, कलाई व कूल्हे की हड्डी में आस्टियोपोरोसिस रोग का पता हम डेन्सीटोमीटर टेस्ट द्वारा करा सकते हैं जिससे हड्डियों की मजबूती का पता चल जाता है।

मस्तिष्क के सही विकास के लिए मां का दूध आवश्यक

अभी तक यह माना जाता रहा है कि मां के दूध में कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो बच्चों को कई रोगों से बचाते हैं परन्तु हाल ही में किए गए शोधों से यह सामने आया है कि बच्चे के मस्तिष्क के सही विकास के लिए भी मां का दूध अति उत्तम है। मां के दूध में डी एच ए एसिड और ए ए एसिड होते हैं जो बच्चों के मस्तिष्क के विकास में महत्वूपर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञों ने बच्चों में हुए विकास का अध्ययन न केवल बच्चों की शुरू की अवस्था में किया बल्कि 4 से 9 वर्ष की आयु में पुनः किया और पाया कि मां का दूध पीने वाले बच्चे दूसरे बच्चों की तुलना में अधिक बुद्धिमान थे।

छोटी आयु में धूम्रपान कैंसर की संभावना को बढ़ाता है

छोटे बच्चों में बढ़ते धूम्रपान का कारण टी. वी पर सिगरेट के आकर्षक विज्ञापन व बड़ों की देखा-देखी धूम्रपान है जो उनको यह शौक लगाने हेतु उत्तरदायी हैं। शौक-शौक में वे इसके आदी हो जाते हैं। नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार छोटी आयु में धूम्रपान कैंसर होने की संभावना को बढ़ा देता है। इस भयंकर रोग से बचने के लिए जरूरी है धूम्रपान के खतरों के बारे में बच्चों को ज्ञान होना। माता-पिता भी बच्चों के सामने सिगरेट मत पिएं। माता-पिता को खुलेआम सिगरेट पीते देख बच्चे भी इसके प्रति आकर्षित होते हैं। शोधों से यह भी पता चला है कि जो अभिभावक सिगरेट पीते हैं, उनके बच्चों में भी सिगरेट पीने की प्रवृत्ति अधिक देखने को मिलती है।

(स्वास्थ्य दर्पण)

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