सावधानी के साथ खेलिए होली, नहीं तो होगी परेशानी

सावधानी के साथ खेलिए होली, नहीं तो होगी परेशानी

राजा तालुकदार

होली हर्षोल्लास व भाईचारे का त्योहार है। लोग एक-दूसरे पर रंग डालकर व चेहरे पर गुलाल लगाकर अपनी खुशी का इजहार करते हैं तथा एक दूसरे से गले मिलते हैं। यह हर्षोल्लास का त्योहार कहीं गम का त्योहार न बन जाए, इसका सदैव ध्यान रखना चाहिए।

एक-दूसरे पर रंग डालते समय तथा चेहरे पर गुलाल लगाते समय सावधान रहना चाहिए कि ये आंखों में न चले जाएं। अच्छी गुणवत्ता वाले रंग व गुलाल का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि त्वचा को किसी प्रकार का नुक्सान न पहुंचे। नकली व घटिया रंग और अबीर आंखों व त्वचा दोनों के लिए हानिकारक होते हैं। अभ्रक मिले गुलाल का भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योेंकि ऐसे गुलाल को चेहरे व माथे पर लगाने से त्वचा छिल सकती है।

त्वचा रोग विशेषज्ञ डाॅ. मुनीश पाल का कहना है कि होली सावधानीपूर्वक खेलनी चाहिए। चूंकि होली रंगों व गुलाल से खेली जाती है इसलिए प्राकृतिक रंगों का ही इस्तेमाल करना चाहिए जैसे टेसू के फूलों का तरल रंग तथा अरारोट का गुलाल। गुलाल में थोड़ा इत्रा डालकर इसे और मनमोहक व बढि़या बनाया जा सकता है। इनके संग होली खेलने से किसी प्रकार की हानि नहीं होगी।

पक्के रंग, पेंट व घटिया गुलाल त्वचा के संपर्क में आते ही प्रतिक्रिया करते हैं और व्यक्ति एलर्जी का शिकार हो जाता है। इन रंगों से सराबोर त्वचा को साफ करना भी काफी मुश्किल होता है क्योंकि ये रंग रोमकूपों द्वारा त्वचा में प्रवेश कर जाते हैं जिसकी वजह से रगड़ते-रगड़ते भले ही त्वचा छिल जाए लेकिन होली के दिन ये पक्के रंग त्वचा से नहीं उतरते। ये रंग जब तक त्वचों से चिपके रहेंगे, तब तक कैमिकल के कारण त्वचा के उस हिस्से को नुक्सान पहुंचता रहेगा। रंगों व गुलाल से होने वाले एलर्जी के कारण व्यक्ति खुजाते-खुजाते त्वचा छील लेता है जिससे पानी निकलने लगता है और शरीर के दूसरे भाग में भी इससे एलर्जी फैल जाती है।

होली खेलने के बाद एलर्जी के कारण त्वचा पर रेशेज या लाल-नीले धब्बे उभर आते हैं। ऐसा होने पर फौरन किसी त्वचा रोग विशेषज्ञ से मिलकर परामर्श लेना चाहिए तथा उसके निर्देशानुसार दवाइयां लेनी चाहिए। इससे एलर्जी से जल्दी छुटकारा मिल जाएगा। सिल्वर पेंट काफी घातक होता है जिसके कारण त्वचा की एलर्जी के साथ सांस की एलर्जी व दमा भी हो सकता है। कपड़ा रंगने वाले रंगों में मौजूद सीसा रक्त में पहुंचकर काफी समय तक हानि पहुंचाता है।

होली खेलते समय निम्न सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए :

1/ पूरी बाजू की कमीज, फुलपैंट, पैरों में मोजे तथा सर पर टोपी लगाकर ही होली खेलें।
2/ होली खेलने से पहले सिर तथा शरीर पर तेल या वैसलीन लगा लेना चाहिए ताकि रोमकूपों द्वारा रंग व गुलाल त्वचा में न प्रवेश कर सकें।
3/ होली खेलने के बाद रंग से रंगे कपड़ों को जल्दी उतार दें क्योंकि रंगे कपड़े जितने समय तक त्वचा के संपर्क में रहेंगे, त्वचा को नुक्सान पहुंचाएंगे।
4/ अरारोट से बने गुलाल व टेसू के फूलों से बने प्राकृतिक रंगों से ही होली खेलें। ये रंग व गुलाल बड़े व बच्चे सभी के लिए सुरक्षित होते हैं।
5/ यदि होली खेलते समय रंग या गुलाल लगाते ही जलन महसूस हो तो तुरंत किसी मुलायम कपड़े से त्वचा साफ कर के धो डालें।
6/ यदि होली खेलते समय शरीर पर रैश उभर आएं या खुजली होने लगे तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से मिलकर निदान करा लें।
7/ आंखों का बचावः- होली के नकली घटिया रंगों व गुलाल से सबसे ज्यादा आंखों को नुक्सान पहुंचने की आशंका होती है, इसलिए घटिया रंगों, छीना-झपटी तथा रंग भरे गुब्बारे आदि से बचना चाहिए। बच्चों को हमेशा अच्छी क्वालिटी के रंग-गुलाल व पिचकारी देने चाहिए। प्राकृतिक रंगों से होली खेलनी चाहिए। कपड़ों की रंगाई-छपाई मंे काम आने वाले पक्के रंग आंखों के लिए काफी हानिकारक होते हैं। अक्सर लोग इन रंगों को हथेली पर पानी से गीला करके दूसरे के चेहरे पर पोत देते हैं।
8/ रंगों में मौजूद अल्कली या एसिड के कारण आंखों में होने वाले जख्म से आंखों की रोशनी जा सकती है। रंगों में मौजूद धातु या रेत के कण पुतली के ठीक बीचोंबीच चुभ जाते हैं जो आंखों को धोने या रगड़ने से भी नहीं निकलते। इन्हें केवल नेत्रा रोग विशेषज्ञ ही निकाल सकता है। उपचार में लापरवाही करने पर आंखों में संक्रमण भी हो सकता है।
9/ वार्निश या पेंट के आंखों में चले जाने से उनमें मौजूद अल्कोहल के कारण भी आंखों की रोशनी जा सकती है, इसलिए इनके द्वारा होली खेलने से बचना चाहिए।
10/ रंग भरे गुब्बारे फेंककर होली खेलना खतरनाक होता है, इसलिए आंखों को गुब्बारे के आघात से बचाना चाहिए। रंग भरे गुब्बारे से लगे आघात के कारण व्यक्ति अंधा हो सकता है। आंख फट सकती है। आंख का पर्दा फट सकता है। आंख का लेंस खराब हो सकता है। आंख की नस फट सकती है।
11/रंग और गुलाल के कारण आंखों में एलर्जी हो सकती है जिसके कारण आंखों में खुजली होती है। आंखों से पानी बहने लगता है।

निम्नलिखित सावधानियों को बरत कर होली के रंग व गुलाल से होने वाले नुक्सान से आंखों को आसानी से बचाया जा सकता है :

1/ पेंट, वार्निश, पक्के रंग व डाई का इस्तेमाल होली खेलने के लिए बिल्कुल न करें।
2/ बच्चों की आंखों पर प्लास्टिक के गागल्स लगाकर ही उन्हें होली खेलने के लिए जाने दें। ऐसा करने से बच्चों की आंखों पर घटिया रंगों का दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा।
3/ आंख में चोट लग जाने पर या आंखों से खून निकल आने पर आंख को ठंडे पानी से धोएं तथा शीघ्र नेत्रा रोग विशेषज्ञ से मिलकर सलाह लें। डॉक्टर की सलाह के बिना आंखों में कोई दवा न डालें।
4/ यदि होली के रंगों के कारण आंखों में जरा भी परेशानी हो तो आंखों को मलें नहीं बल्कि आंखों को ठंडे पानी से धोएं तथा शीघ्र नेत्रा रोग विशेषज्ञ से मिलें।

(स्वास्थ्य दर्पण)

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